तीन महीने में चांदी के दामों में 46% की बड़ी गिरावट,खरीदने का आ गया सही समय
चांदी की जबरदस्त तेजी अचानक रुक गई है. 2025 में करीब 170% रिटर्न देने के बाद और जनवरी 2026 में 74% तक और चढ़ने के बाद अब इसमें तेज गिरावट आई है. अब चांदी की कीमत 2025 के क्लोजिंग लेवल से भी नीचे आ गई है (2.41 लाख रुपए से गिरकर करीब 2.38 लाख रुपए). इस अचानक गिरावट ने छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों को चौंका दिया है, जिससे लोग रिस्क कम करने के लिए पैसे निकालने लगे हैं.मई के चांदी फ्यूचर्स अपने रिकॉर्ड 4.39 लाख रुपए प्रति किलो से गिरकर सिर्फ तीन महीनों में 2.40 लाख रुपए के नीचे आ गए हैं. यानी करीब 2 लाख रुपए की भारी गिरावट आई है, जो बाजार में तेज बिकवाली दिखाती है.आमतौर पर सोना-चांदी संकट के समय सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, लेकिन इस बार उल्टा हुआ. बढ़ते तनाव और युद्ध के माहौल में भी कीमतें गिर गईं क्योंकि निवेशकों ने कैश बढ़ाने के लिए बिकवाली की.डॉलर मजबूत होने से चांदी महंगी लगने लगती है, जिससे इसकी मांग घट जाती है. साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने भी दबाव बढ़ाया.तेज तेजी के बाद ट्रेडर्स ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया, जिससे कीमतों में और गिरावट आ गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, गिरावट के बावजूद लंबी अवधि में चांदी का नजरिया अभी भी पॉजिटिव है. इंडस्ट्री में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जो कुल खपत का 60% से ज्यादा है. साथ ही सप्लाई की कमी भी बनी हुई है. लगातार 5 साल से बाजार में चांदी की कमी चल रही है और अब छठे साल में भी यही स्थिति है.एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी एक साथ बड़ी खरीदारी करने के बजाय धीरे-धीरे (staggered) निवेश करना बेहतर रहेगा. खासकर जब कीमतें मजबूत सपोर्ट लेवल के आसपास हों.MCX पर चांदी फिलहाल 2,45,200 रुपए के आसपास ट्रेड कर रही है. 2,46,000 रुपए पर रेजिस्टेंस है और अगर ये स्तर पार होता है, तो कीमत 2,47,0002,48,000 लाख रुपए तक जा सकती है. गिरावट भले ही तेज हो, लेकिन लंबे समय में चांदी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. समझदारी से निवेश करने का मौका मिल सकता है.
