सोनिया गांधी की किताब पर बड़ा विवाद!चीन पर दावा और Penguin ने क्यों खींचे हाथ?
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित किताब ” belonging” के पब्लिकेशन को लेकर राजनीति और पब्लिशिंग हाउस को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. मीडिया रिपोर्ट्स और कांग्रेस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, किताब के भारतीय प्रकाशक ‘पेंगुइन इंडिया’ ने सोनिया गांधी से किताब के कुछ खास और संवेदनशील हिस्सों को हटाने या उनमें बदलाव करने का अनुरोध किया था. हालांकि, सोनिया गांधी ने अपनी किताब में किसी भी तरह की काट-छांट या बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया. जिसके बाद पेंगुइन इंडिया ने इस किताब को भारत में पब्लिश करने से मना कर दिया है.संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी की यह किताब उनके जीवन के अहम पड़ावों, व्यक्तिगत यादों और राजनीतिक यात्रा का एक विस्तृत लेखा-जोखा है. लेकिन इस संस्मरण में सिर्फ अतीत की बातें ही नहीं हैं, बल्कि इसमें वर्तमान राजनीतिक माहौल और केंद्र सरकार की नीतियों पर भी तीखे सवाल उठाए गए हैं. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, जिन हिस्सों पर पब्लिशर को आपत्ति थी, वे मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों से जुड़े हैं- इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह सामने आ रही है कि ‘पेंगुइन वर्ल्ड’ को इस किताब को वैश्विक स्तर पर पब्लिश करने में कोई आपत्ति नहीं थी, ऐसा कांग्रेस के सूत्रो ने NDTV को दी जानकारी. समस्या तब शुरू हुई जब ‘पेंगुइन इंडिया’ ने किताब की मैन्युस्क्रिप्ट समीक्षा के दौरान इसमें से कुछ अंशों को हटाने का आग्रह सोनिया गांधी से किया और उन्होंने इनकार कर दिया. कांग्रेस के करीबी सूत्रों का कहना है कि जब पब्लिशर की ओर से इन अंशों को एडिट करने या हटाने का प्रस्ताव आया तो सोनिया गांधी ने अपने रुख पर कायम रहते हुए किसी भी तरह के समझौते से साफ इनकार कर दिया.

उनका मानना था कि किताब में लिखे गए तथ्य और विचार उनके अपने अनुभव और दृष्टिकोण पर आधारित हैं, इसलिए इनमें बदलाव का सवाल ही नहीं उठता.विवाद गहराने के बाद पेंगुइन इंडिया की तरफ से भी प्रतिक्रिया सामने आई है. पब्लिशर का दावा है कि उनका मकसद किसी राजनीतिक दबाव में काम करना नहीं था, बल्कि उन्होंने केवल फैक्ट्स और डेटा के आधार पर लेखिका से कुछ संशोधनों का अनुरोध किया था. पेंगुइन का कहना है कि तथ्यात्मक सटीकता और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही यह सुझाव दिया गया था, जिसे राइटर ने स्वीकार नहीं किया.सोनिया गांधी की किताब को लेकर हुआ यह विवाद अब केवल पब्लिशिंग तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है. एक तरफ जहां अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक दबाव को लेकर बहस छिड़ गई है, वहीं दूसरी तरफ पाठकों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस बात को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है कि आखिर सोनिया गांधी की किताब ‘Belonging’ में ऐसा क्या लिखा है जिसे हटाने की मांग की जा रही थी.वही इस मामले पर कांग्रेस पार्टी ने इसे बीजेपी की साजिश बताते हुए हमला भी बोला हैं. अब देखना यह होगा कि पेंगुइन इंडिया के पीछे हटने के बाद सोनिया गांधी की यह चर्चित किताब भारत में किसी अन्य पब्लिशिंग हाउस के जरिए सामने आती है या नहीं. वैसे न्यूज़ रिपोर्ट के मुताबिक एक और पब्लिकेशन है जो इसे इंडिया में लॉन्च कर सकते हैं.
