EVM पर दोहरा रवैया रखने का चिराग ने तेजस्वी पर लगाया आरोप,बोले-तेजस्वी को मंथन करना चाहिए
बिहार विधानसभा में नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने पटना लौटते ही चुनाव के नतीजों पर चुप्पी तोड़ी. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र नहीं धनतंत्र से यह चुनाव जीता गया है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में ‘जनता’ की हार हुई और ‘व्यवस्था’ की जीत हुई. तेजस्वी के इस बयान पर अब केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने पलटवार किया है.राजधानी पटना में पत्रकारों से बात करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि इस तरह से जनादेश का अपमान करना ही उनकी हार का कारण बना है. उन्होंने कहा कि ये लोग दावा करते हैं कि ‘लोकतंत्र नहीं, बल्कि व्यवस्था जीती है’, कभी ईवीएम को दोष देते हैं तो कभी एसआईआर पर. उन्होंने कहा कि ईवीएम तब ठीक होती है जब ये लोग जीतते हैं, लेकिन जब भी हारते हैं तो धांधली का आरोप लगाते हैं.इसके आगे केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस और आरजेडी पर निशाना साधते हुए कहा ‘जब तक ये लोग आत्मनिरीक्षण नहीं करेंगे, तब तक इनके पैर फिसलते रहेंगे.

उन्होंने कहा कि 2010 के बाद जो जनादेश एनडीए को मिला था, उसी समय पता चल गया था कि राजद और कांग्रेस कहां हैं.‘उन्होंने कहा कि इनकी (तेजस्वी यादव) चुप्पी से पार्टी के विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं में निराशा है. सत्र लंबे समय तक चलते हैं, आप (तेजस्वी यादव) विपक्ष के नेता हैं, फिर भी सत्र में नहीं रुकते. आपने अपने कार्यकर्ताओं को नतीजों के बारे में सूचित नहीं किया है. जब उनके पास कुछ कहने को होगा तभी वे बोलेंगे’. उन्होंने कहा कि तेजस्वी को मंथन करना चाहिए कि आखिर क्यों जनता ने उन्हें इतनी बुरी तरह से नकार दिया.दरअसल पटना में पत्रकारों से बात करते हुए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा था ‘पिछले साल का चुनाव खत्म हो गया है. पिछले चुनाव में लोकतंत्र में ‘जनता’ की हार हुई और ‘व्यवस्था’ की जीत हुई. जनता पराजित हुई और व्यवस्था ने चुनाव जीत लिया. उन्होंने जनमानस को धन-तंत्र और मशीनी व्यवस्था में बदल दिया है. हम जानते हैं कि क्या साजिश रची गई थी.उन्होंने छल और धोखाधड़ी से जीत हासिल की. नई सरकार कैसे बनी, यह सबको पता है’.इसके आगे तेजस्वी ने कहा ‘हम मौजूदा सरकार के पहले 100 दिनों में उसके फैसलों और नीतियों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. हम देखेंगे कि माताओं और बहनों को क्या मिलता है,1 करोड़ युवाओं को रोजगार मिलता है. इस सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने घोषणापत्र में किए गए वादों को जमीनी स्तर पर लागू करे. हम पहले 100 दिनों तक कुछ नहीं कहेंगे. 100 दिन बीतने के बाद जो घोषणा पूरी नहीं होगी, तब वह सामने आएंगे और सरकार की गलतियों को जनता के सामने उठाएंगे’.
