पाकिस्तान का साथ देकर चीन ने भारत से बढ़ाई दूरी,भारत-पाकिस्तान संघर्ष में चीन का सामने आया कबूलनामा
चीन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उसने पिछले साल भारत के साथ चार दिवसीय संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को ऑन-साइट तकनीकी सहायता प्रदान की थी। यह खुलासा चीनी सरकारी मीडिया रिपोर्टों में सामने आया है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है।चीन के राज्य प्रसारक CCTV ने गुरुवार को एक इंटरव्यू प्रसारित किया, जिसमें एयरोस्पेस इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना (AVIC) के चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के इंजीनियर झांग हेंग ने इस दौरान पाकिस्तान को दी गई सहायता का जिक्र किया।रिपोर्ट के अनुसार, झांग हेंग ने कहा कि उन्होंने पिछले साल मई में चार दिवसीय युद्ध के दौरान पाकिस्तान को तकनीकी सहायता प्रदान की थी। पाकिस्तान की वायुसेना के पास चीन में निर्मित J-10CE फाइटर जेट्स का बेड़ा मौजूद है, जिन्हें AVIC की एक सहायक कंपनी द्वारा विकसित किया गया है।सीसीटीवी को दिए गए बयान में झांग हेंग ने बताया कि सपोर्ट बेस पर हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे। उन्होंने कहा कि लगातार फाइटर जेट्स की आवाज और एयर-रेड सायरन के बीच काम करना मानसिक और शारीरिक रूप से काफी कठिन था। उन्होंने यह भी कहा कि वहां का तापमान मई के महीने में ही 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा था, जिससे स्थिति और भी कठिन हो गई थी।झांग ने कहा कि उनकी टीम का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि उपकरण अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करें और बेहतर प्रदर्शन दें। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ J-10CE विमान की क्षमता का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि एक मजबूत कार्य संबंध और साझेदारी का भी प्रतीक था, जो उनके सहयोग के दौरान विकसित हुआ।दरअसल में भारत का ऑपरेशन सिंदूर इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण था कि पाकिस्तान की रक्षा व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं निकली जितना दावा किया जाता था। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, जब पाकिस्तान के रक्षा प्रणालियों को रियल-टाइम टारगेटिंग, एकीकृत वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के विरुद्ध परखा गया तो वे उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे।

अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट में कहा गया कि आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम से यह उम्मीद नहीं होती कि वह हर हमला रोक दे, लेकिन उससे कम से कम अहम सैन्य ठिकानों को बार-बार और एक साथ होने वाले हमलों से बचाने की उम्मीद जरूर की जाती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ऐसा करने में नाकाम रहा। रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय हमलों से पाकिस्तान के एयरफील्ड, हैंगर और रडार सिस्टम को काफी नुकसान पहुंचा।पाकिस्तान और चीन ने मिलकर विकसित किया जेएफ-17 मल्टीरोल फाइटर विमान भी कमजोर साबित हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि यह भारतीय हमलों को संवेदनशील सैन्य ठिकानों तक पहुंचने से नहीं रोक पाया। साथ ही शुरुआती हवाई लड़ाई के बाद भारतीय एयरबेस को किसी बड़े नुकसान का कोई साफ सबूत भी सामने नहीं आया। रिपोर्ट में कहा गया, जिस विमान को पाकिस्तान की सस्ती और मजबूत एयर पावर की रीढ़ बताया जाता था, उसके लिए यह प्रदर्शन भरोसा बढ़ाने वाला नहीं था।रिपोर्ट में कहा गया कि जे-10सी की कथित रणनीतिक सफलता अब तक बड़े निर्यात में नहीं बदली है। पेंटागन की 2025 की चीन सैन्य रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि पाकिस्तान अभी तक जे-10सी का इकलौता विदेशी ग्राहक बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान लंबे समय से चीनी सैन्य उपकरणों के परीक्षण के लिए एक भरोसेमंद प्रयोगशाला की तरह काम करता रहा है, और उनकी कमियों का असर भी उसे ही झेलना पड़ा है।रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान के सैन्य उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार भरोसे की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ऑपरेशन सिंदूर ने सिर्फ कुछ सिस्टम को नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि पाकिस्तान के इस दावे को भी कमजोर कर दिया कि उसकी रक्षा व्यवस्था पूरी तरह भरोसेमंद और युद्ध के लिए तैयार है।
