यूपी,असम के बाद अब बंगाल में भी अवैध मदरसों पर एक्शन,बीजेपी सरकार ने खोल दी सबकी पोल
पश्चिम बंगाल ऐतिहासिक जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने अपना पहला बजट पेश कर दिया है. बजट में इस बार बंगाल में मदरसा एजुकेशन को आवंटित राशि को घटाकर आधा कर दिया गया है. सरकार की तरफ से माइनॉरिटी अफेयर्स और मदरसा एजुकेशन के लिए 2165 करोड़ रुपए तय किए गए हैं.ये रकम पिछली TMC सरकार की तुलना में आधी से भी कम है. टीएमसी की सरकार में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए माइनॉरिटी अफेयर्स और मदरसा एजुकेशन के लिए 5713 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे.इस बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रदेश के मदरसों को लेकर जानकारी मांगी है. सरकार की तरफ से सभी जिलाधिकारियों को 5 जुलाई तक मदरसों की फंडिंग, कैरिकुलम, शिक्षकों की योग्यता और गतिविधियों को लेकर रिपोर्ट देने को आदेश दे दिया गया है. सरकार के मुताबिक, अगर मदरसों में किसी तरह की गड़बड़ी या फिर विदेशी फंडिंग का मामला पाया जाता है तो उसे बंद करने में वह कोई गुरेज नहीं करेगी.राज्य में आधिकारिक तौर पर लगभग 614 सरकारी सहायता प्राप्त मदरसे हैं. वहीं, बिना रजिस्टर्ड (खारीजी) मदरसों की अनुमानित संख्या 8,000 से 11,000 के बीच है. अब सरकार के आदेश के बाद ऐसे मदरसों पर तलवार लटकी हुई है. इनको मिलने वाली फंडिंग की जांच के लिए एसआईटी का गठन भी सरकार कर सकती है.NCPR ने मदरसों पर राइट-टू-एजुकेशन (RTE) नियमों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था. 2.मदरसों पर सिर्फ धार्मिक शिक्षा पर फोकस करने का आरोप लगता रहा है. 3.कई मदरसों पर सरकारी फंडिंग का दुरुपयोग करने की चलते हुई कार्रवाई 4. कई मदरसों पर संदिग्ध फंडिंग के शक में भी लिया गया एक्शनमदरसों को मिलने वाली फंडिंग, कैरिकुलम, शिक्षकों की योग्यता और गतिविधियों को लेकर पहले भी सवाल उठते आए हैं. अलग-अलग राज्य सरकारें अपने तरीके से अवैध मदरसों पर कार्रवाई करती आ रही थीं. लेकिन इनमें तेजी तब आई, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR )सवाल उठाया.NCPCR ने सभी राज्यों को लेटर लिखकर कहा था कि मदरसों को दिया जाने वाला फंड बंद कर देना चाहिए. ये राइट-टू-एजुकेशन (RTE) नियमों का पालन नहीं करते हैं.NCPCR का कहना था कि ‘मदरसों में पूरा फोकस धार्मिक शिक्षा पर रहता है, जिससे बच्चों को जरूरी शिक्षा नहीं मिल पाती और वे बाकी बच्चों से पिछड़ जाते हैं’. इसके बाद से ही खासकर बीजेपी शासित राज्यों में मदरसों की स्क्रीनिंग और उन पर कार्रवाई में तेजी देखने को मिली.मदरसा एक अरबी शब्द है. इसका हिंदी अर्थ शैक्षणिक संस्थान है. इस्लाम की शुरुआत में मस्जिदें ही शिक्षा के केंद्र के रूप में भी काम करती थीं, लेकिन 10वीं सदी के बाद से, इस्लामी दुनिया में मदरसों ने इस्लाम में शिक्षा के संस्थानों के तौर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई. मदरसों का सबसे पुराना जिक्र रासान और ट्रांसऑक्सानिया से मिलते हैं, जो आज के पूर्वी और उत्तरी ईरान, मध्य एशिया और अफगानिस्तान के इलाके हैं.भारत में भी मदरसों की संख्या ठीक-ठाक रही है. यहां मदरसों की दो श्रेणियां हैं.

एक है मदरसा दरसे निज़ामी, जो सार्वजनिक धर्मांध संस्थाओं के तौर पर चलते और राज्य के स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम का पालन करने के लिए बाध्य नहीं हैं.वे दारुल उलूम नदवतुल उलमा (लखनऊ) और दारुल उलूम देवबंद जैसे बड़े मदरसों के तय किए गए पाठ्यक्रम (सिलेबस) का पालन करते हैं. वहीं, दूसरा है मदरसा दरसे आलिया, जो राज्य के मदरसा शिक्षा बोर्ड से संबद्ध होते हैं. वे राज्य सरकार या एनसीआरटी द्वारा निर्देशित पाठ्यक्रम का पालन करते हैं.3 फरवरी, 2020 को तब के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने राज्यसभा को बताया था कि 2018-19 तक भारत में 24,010 मदरसे थे. इनमें से 19,132 मान्यता प्राप्त मदरसे थे और बाकी 4,878 गैर-मान्यता प्राप्त थे.देश के कुल मदरसों में से 60 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में थे. इनमें 11,621 मान्यता प्राप्त और 2,907 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे थी. नकवी द्वारा पेश किए गए राज्य-वार आंकड़ों के मुताबिक मदरसों की संख्या के मामले में राजस्थान दूसरे स्थान पर था. यहां 2,464 मान्यता प्राप्त और 29 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे थे.उत्तर प्रदेश में हाल के सालों में अवैध मदरसों पर तेजी से कार्रवाई हुई है. यूपी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक बिना मान्यता, अवैध अतिक्रमण और सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से संचालित होने वाले 300 से अधिक मदरसों पर अब तक कार्रवाई (ध्वस्तीकरण और सीलिंग) की जा चुकी है. इसके अलावा सरकार ने कई मदरसों की फंडिंग की भी पड़ताल की है. इस बीच मदरसों में बच्चों की संख्या साल दर साल घट रही है.10 वर्ष पहले यूपी के मदरसा बोर्ड परीक्षा में 4 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे. वहींं, इस इस परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की संख्या सिर्फ 63 हजार रह गई है. वहीं, प्रदेश में सरकारी अनुदान पर चलने वाले मदरसों की संख्या 558 थी. लेकिन छात्र नामांकन, अनुदान राशि में हेरफेर की शिकायतों पर सरकार ने 15 मदरसों की मान्यता निलंबित कर उनके अनुदान को रोक दिया है. वर्तमान में 543 मदरसों को अनुदान मिल रहा है. इन मदरसों कुल 10 हजार शिक्षक हैं.उधर असम में हिमंता विश्वा सर्मा की सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए 1,281 मदरसों की पहचान ही बदल दी थी.सरकारी सहायता से 21 जिलों में चल रहे मदरसों को मिडिल इंग्लिश (एमई) स्कूलों में बदल दिया गया था. इसके अलावा असम सरकार मदरसों के अवैध संचालन पर काफी सख्त है. अवैध तरीके से चलने और नियमों का पालन न करने वाले मदरसों पर सरकार की तरफ से लगातार कार्रवाई की जा रही है.उत्तराखंड सरकार द्वारा भी अब तक 200 से अधिक अवैध और बिना पंजीकरण वाले मदरसों को सील किया जा चुका है. इनमें से अधिकांश कार्रवाई राज्य के सीमावर्ती इलाकों में की गई. इसके अलावा हजारों बच्चों के रिकॉर्ड गायब मिलने और सरकारी फंड का दुरुपयोग पाए जाने के चलते मान्यता प्राप्त 11 मदरसों की पोषण योजना और 23 मदरसों की सरकारी फंडिंग रोक दी गई.इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार ने भी श्योपुर जिले में ही एकसाथ 56 मदरसों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी मान्यता रद्द की थी.
