सोने-चांदी के बाजार में हलचल!क्या अब इतने सस्ते होंगे सोना-चांदी?
अगर आप सोना-चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो अभी जल्दबाजी न करें. बीते हफ्ते सर्राफा बाजार में सोने-चांदी के दाम धड़ाम हो गए. एक्सपर्ट्स का कहना है कि गिरावट का ये सिलसिला इस हफ्ते भी जारी रह सकता है. असल में, महंगे होते कच्चे तेल ने महंगाई की टेंशन बढ़ा दी है. वहीं, अब पूरी दुनिया के निवेशकों की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदम पर टिकी हुई हैं, जिससे बाजार की आगे की चाल तय होगी.घरेलू वायदा बाजार यानी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बीते हफ्ते बिकवाली का भारी दबाव रहा.

दिसंबर डिलीवरी वाला सोना ₹5,768 (करीब 4 फीसदी) की बड़ी गिरावट के साथ ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ. चांदी में तो सोने से भी ज्यादा बड़ी गिरावट देखने को मिली. बीते हफ्ते चांदी का भाव ₹15,087 यानी 7.14 फीसदी तक टूट गया. इस भारी गिरावट के बाद चांदी ₹2 लाख के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर ₹1.96 लाख प्रति किलो पर आ गई.अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमोबेश यही हाल रहा. कॉमेक्स (Comex) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 4.14 फीसदी लुढ़ककर 4,007.9 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ. शुक्रवार के कारोबार में तो ये भाव एक समय 3,989 डॉलर तक गिर गया था. वहीं वैश्विक बाजार में चांदी भी करीब 6 फीसदी टूटकर 53.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गई.सोने-चांदी में आई इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण काम कर रहे हैं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है. नियम सीधा है- जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो हर चीज की ढुलाई और लागत बढ़ने से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है. महंगाई को काबू में करने के लिए दुनियाभर के केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं. जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशक सोने-चांदी से पैसा निकालकर बॉन्ड और डॉलर में लगाना शुरू कर देते हैं.LKP Securities के रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के साथ-साथ डॉलर में आई मजबूती की वजह से सोने को निचले स्तरों पर भी सहारा नहीं मिल पा रहा है. वहीं JM Financial Services के प्रणव मेर बताते हैं कि औद्योगिक धातुओं में आई कमजोरी ने चांदी का खेल बिगाड़ा है. इसके अलावा, चांदी के दाम काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गए थे, जिससे बाजार में इसकी मांग में नरमी आई है. इसी कम मांग ने कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया.अब सवाल ये है कि आगे क्या होगा? अब, सारी निगाहें 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर हैं. फेड चेयरमैन के बयान से ही ये साफ हो पाएगा कि सोने-चांदी की कीमतें मौजूदा स्तर पर संभलेंगी या इनमें गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा.इस हफ्ते सिर्फ अमेरिकी फेड ही नहीं, बल्कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक सहित बैंक ऑफ जापान के फैसलों पर भी बाजार की नजर रहेगी. इसके अलावा अमेरिका के महंगाई के आंकड़े, तीसरी तिमाही की जीडीपी (GDP) के नंबर और उपभोक्ता विश्वास से जुड़े डेटा भी सामने आएंगे. ये तमाम आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे. अगर फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो डॉलर के साथ बॉन्ड यील्ड में और तेजी आएगी. इसका मतलब है कि सोने-चांदी के दाम और गिर सकते हैं. इसके उलट, अगर फेड का रुख नरम रहता है, तो कीमती धातुओं को इस गिरावट से थोड़ी राहत मिल सकती है.
