33 साल का सपना हुआ पूरा!शाहरुख ने कैसे बदली अपनी इमेज?
हर साल 2 नवंबर को जब मुंबई में ‘मन्नत’ के बाहर हजारों चाहने वालों का हुजूम उमड़ता है, तो वो सिर्फ बॉलीवुड के ‘किंग’ शाहरुख खान का जन्मदिन नहीं मना रहे होते, बल्कि उस जज्बे को सलाम कर रहे होते हैं, जिसने पिछले तीन दशकों में भारतीय सिनेमा के मायने बदल दिए. हालांकि, इस बार अपनी फिल्म ‘किंग’ की शूटिंग शेड्यूल में व्यस्त होने के कारण शाहरुख मन्नत की बालकनी से अपने फैंस को अपनी झलक नहीं दिखा पाएंगे, लेकिन चाहने वालों के उत्साह में कोई कमी नहीं है. आज उनके जन्मदिन पर हम सिर्फ शाहरुख के फैले हुए हाथों वाले आइकॉनिक रोमांटिक पोज की बात नहीं करेंगे, बल्कि आज बात उस तीस साल से ज्यादा पुरानी टीस और जिद की होगी, जिसने 57 साल की उम्र में 58 और 59 के पड़ाव पर आकर दुनिया को बॉलीवुड का सबसे बड़ा ‘एक्शन स्टार’ दिया.खुद शाहरुख खान ने एक इंटरव्यू में हंसते हुए ये किस्सा सुनाया था कि जब वो फिल्म इंडस्ट्री में नए-नए आए थे, तब उनका एक ही सपना था, हाथ में गन लेकर हॉलीवुड स्टाइल का एक्शन हीरो बनना. वो आदित्य चोपड़ा के पास भी ये सोचकर गए थे कि उन्हें कोई धांसू एक्शन स्क्रिप्ट मिलेगी.

लेकिन आदित्य ने उन्हें ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ की पटकथा थमा दी और बोले, “तुझसे पूरा देश प्यार करेगा!” इसके बाद तो ऐसा ताना-बाना बुना गया कि शाहरुख ‘किंग ऑफ रोमांस’ के ऐसे सांचे में ढल गए, जिससे बाहर निकलना किसी भी एक्टर के लिए नामुमकिन जैसा था. लेकिन शाहरुख तो शाहरुख हैं!90 के दशक की शुरुआत में जब दिल्ली का एक लड़का आंखों में सपने लेकर मुंबई आया, तो उसके पास न तो कोई फिल्मी खानदान का सहारा था और न ही रोल चुनने की लग्जरी. ‘फौजी’ और ‘सर्कस’ जैसे टीवी शोज से पहचान बनाने वाले इस आउटसाइडर ने वही किया जो उस दौर के बड़े हीरो करने से कतराते थे. जब रोमांटिक हीरो बनने का ट्रेंड चल रहा था, तब उन्होंने ‘बाजीगर’, ‘डर’ और ‘अंजाम’ जैसी फिल्मों में एंटी-हीरो यानी विलेन के रोल किए. मजबूरी और काम की तलाश में लिए गए इन फैसलों ने ये साबित कर दिया कि इस लड़के में एक्टिंग की कोई सीमा नहीं है.‘राज’ और ‘राहुल’ बनकर उन्होंने पूरी दुनिया को प्यार करना सिखाया. ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कुछ कुछ होता है’ और ‘दिल तो पागल है’ जैसी फिल्मों ने उन्हें सफलता के उस शिखर पर पहुंचा दिया जहां से नीचे देखना भी मुश्किल था. लेकिन शाहरुख कभी एक सांचे में बंधकर रहने वालों में से नहीं थे. जब उनका रोमांटिक करियर पीक पर था, तब भी उन्होंने ‘दिल से..’, ‘अशोका’, ‘स्वदेश’ और ‘चक दे! इंडिया’ जैसी फिल्में करके अपनी इमेज को चुनौती दी. ‘स्वदेश’ के मोहन भार्गव और ‘चक दे!’ के कबीर खान बनकर उन्होंने दिखाया कि वो सिर्फ बांहें फैलाकर प्यार करने वाले हीरो नहीं, बल्कि एक संजीदा अभिनेता भी हैं.हर बड़े कलाकार की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है जब उनके प्रयोग दर्शक पूरी तरह स्वीकार नहीं करते. शाहरुख ने ‘रा.वन’ में सुपरहीरो बनने की कोशिश की, ‘फैन’ में एक सनकी फैन का रोल निभाया और ‘जीरो‘ में बउआ सिंह बनकर कुछ अलग करने की ठानी. लेकिन बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्में वैसा कमाल नहीं दिखा पाईं जैसी उम्मीद थी. इसके बाद आया 2018 का वो दौर जब लगातार असफलता के बाद शाहरुख ने 4 साल का लंबा ब्रेक लिया. आलोचकों ने उनके करियर को खत्म मान लिया था, ट्रेड एनालिस्ट्स कहने लगे थे कि ‘खान्स’ का दौर अब ढल चुका है. लेकिन शाहरुख चुपचाप अपने अगले दांव की तैयारी कर रहे थे.चार साल की खामोशी के बाद जब जनवरी 2023 में ‘पठान’ का ट्रेलर आया, तो पूरी दुनिया देखती रह गई. लंबे बाल, सिक्स-पैक एब्स और हाथ में मशीन गन लिए जब 57 साल का ये सुपरस्टार बड़े पर्दे पर उतरा, तो सिनेमाघरों की छतें बज उठीं. इसके बाद ‘जवान‘ में उन्होंने विक्रम राठौर और आजाद का डबल रोल निभाकर एक्शन का तांडव मचाया. इन दोनों फिल्मों ने 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बिजनेस करके हिंदी सिनेमा का इतिहास बदल दिया. जो काम वो अपने करियर के शुरुआती 20-25 सालों में नहीं कर पाए थे, उसे उन्होंने अपने ढलते करियर की भविष्यवाणी करने वालों के मुंह पर करारा थप्पड़ मारकर पूरा किया. उन्होंने साबित कर दिया कि एक्शन स्टार बनने के लिए सिर्फ उम्र नहीं, बल्कि वो आग चाहिए जो उनके अंदर लगभग 30 सालों से जल रही थी.अब शाहरुख खान अपनी आने वाली फिल्म ‘किंग‘ के साथ एक बार फिर एक्शन अवतार में आने की तैयारी कर रहे हैं. ये कहानी है अपनी शर्तों पर जीने वाले उस इंसान की, जिसने खुद को हर दौर में री-इन्वेंट किया. रोमांस के बादशाह से लेकर बॉक्स ऑफिस के सबसे बड़े एक्शन वॉरियर बनने का ये सफर हमें सिखाता है कि अगर आपके इरादों में सच्चाई है, तो तीन दशकों का इंतजार भी एक नए इतिहास की शुरुआत बन जाता है।
