बैंक अकाउंट में सेंधमारी!ग्राहक को मिलेगा पूरा पैसा?
ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक ब्रांच में किसानों के खाते जमा रकम और FD में हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद बैंक में जमा पैसों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं. खाताधारकों ने आरोप लगाया है कि उनकी मंजूरी के बिना खातों से रकम निकाली गई या एफडी तोड़ी गई. मामले में बैंक कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और जांच की खबरें सामने आई हैं.अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर किसी ग्राहक के खाते से उसकी जानकारी या सहमति के बिना पैसा गायब हो जाए, तो उसकी भरपाई कौन करेगा? क्या बैंक को पूरी रकम लौटानी होगी या ग्राहक को नुकसान उठाना पड़ सकता है?बैंक में पैसा जमा करते समय हर ग्राहक को भरोसा होता है कि उसकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहेगी. लोग अपनी जिंदगी भर की बचत, रिटायरमेंट का पैसा और बच्चों की पढ़ाई या शादी के लिए जमा की गई रकम बैंक में रखते हैं.

उन्हें उम्मीद होती है कि उनकी इजाजत के बिना कोई उनके खाते से पैसा नहीं निकाल सकता.लेकिन बैंक में भी धोखाधड़ी या कर्मचारियों की मिलीभगत से पैसे की हेराफेरी हो सकती है. ऐसे में सिर्फ पासबुक और बैंक की रसीद संभालकर रखना काफी नहीं है. अपने बैंक खाते और एफडी पर भी नजर रखना जरूरी है. अगर खाते से बिना इजाजत पैसा निकल जाता है, तो ग्राहक बैंक में शिकायत कर सकता है. इसके अलावा, मामले की जांच कराने के लिए दूसरे रास्ते भी मौजूद हैं.मान लीजिए, आपने सुबह मोबाइल पर अपना बैंक बैलेंस चेक किया और पता चला कि खाते से 2 लाख रुपये निकल गए हैं. आपने न तो कोई लेनदेन किया और न ही किसी को पैसे भेजने की अनुमति दी. ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत शिकायत करना जरूरी है. बैंक की आधिकारिक हेल्पलाइन, मोबाइल ऐप या शाखा के जरिए शिकायत दर्ज कराएं. शिकायत का नंबर जरूर लें. अगर डेबिट कार्ड, मोबाइल बैंकिंग या इंटरनेट बैंकिंग के गलत इस्तेमाल का शक है, तो संबंधित सुविधा बंद कराएं. अपना पासवर्ड और पिन भी बदल दें. पैसे निकलने की तारीख, रकम, बैंक स्टेटमेंट, मोबाइल पर आए संदेश और शिकायत की रसीद सुरक्षित रखें.अगर ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई है, तो तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें. आप राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. जल्दी शिकायत करने से पैसे को दूसरे खाते में जाने से रोकने की कोशिश की जा सकती है. हालांकि, पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं होती. अगर शक है कि बैंक कर्मचारी ने गलत तरीके से पैसा निकाला है या आपकी अनुमति के बिना एफडी तोड़ी गई है, तो शाखा प्रबंधक और बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत दें. जरूरत पड़ने पर पुलिस में भी शिकायत करें.इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि पैसा कैसे निकला, गलती किसकी थी और लेनदेन किस तरह हुआ. अगर बैंक की गलती, लापरवाही या सुरक्षा में कमी के कारण खाते से बिना अनुमति पैसा निकाला गया है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों के तहत ग्राहक को राहत मिल सकती है. कुछ मामलों में ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य होती है और बैंक को रकम वापस करनी पड़ सकती है.लेकिन अगर ग्राहक ने खुद अपना ओटीपी, पिन या पासवर्ड किसी दूसरे व्यक्ति को बता दिया है, तो नियम अलग हो सकते हैं. ऐसे मामलों में यह भी देखा जाता है कि पैसा निकलने के बाद ग्राहक ने बैंक को कितनी जल्दी सूचना दी. आरबीआई ने 6 जुलाई 2017 को अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन के लिए ग्राहकों की जिम्मेदारी तय करने संबंधी निर्देश जारी किए थे. इनके तहत बैंक की गलती या लापरवाही होने पर ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य हो सकती है.वहीं, अगर किसी तीसरे व्यक्ति की वजह से धोखाधड़ी हुई है और ग्राहक की भी कोई गलती नहीं है, तो कुछ मामलों में बैंक से सूचना मिलने के तीन दिन के भीतर शिकायत करने पर ग्राहक को शून्य जिम्मेदारी का लाभ मिल सकता है. शिकायत में देरी होने पर नियम बदल सकते हैं.ये नियम मुख्य रूप से अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन से जुड़े हैं. अगर बैंक कर्मचारी ने एफडी तोड़कर पैसा निकाल लिया, जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया या बैंक शाखा में ही हेराफेरी हुई, तो मामले की अलग से जांच करनी पड़ सकती है. ऐसे मामलों में बैंक की जिम्मेदारी और ग्राहक को मिलने वाली राहत जांच के नतीजों और लागू नियमों पर निर्भर करेगी.जब ग्राहक शिकायत करता है, तो बैंक को यह पता लगाना होता है कि पैसा खाते से कैसे निकला और लेनदेन की अनुमति किसने दी थी. इसके लिए बैंक कई तरह के रिकॉर्ड की जांच कर सकता है.पैसा किस तारीख और समय परनिकाला गया या दूसरे खाते में भेजा गया.लेनदेन बैंक शाखा, चेक, मोबाइल बैंकिंग या इंटरनेट बैंकिंग से हुआ.अगर एफडी तोड़ी गई, तो इसके लिए किसने अनुरोध किया और कौन-से दस्तावेज दिए गए.लेनदेन के लिए ग्राहक की सहमति, हस्ताक्षर, ओटीपी या दूसरे सुरक्षा तरीकों का इस्तेमाल हुआ या नहीं.बैंक कर्मचारियों ने अपने सिस्टम पर क्या गतिविधियां कीं और उपलब्ध रिकॉर्ड में क्या जानकारी है.पैसा किन खातों में भेजा गया और उसके बाद कहां-कहां ट्रांसफर हुआ.अगर पैसा किसी दूसरे बैंक के खाते में भेजा गया है, तो बैंक और जांच एजेंसियां उस खाते की भी जांच कर सकती हैं. जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित खाते में बची रकम को रोकने की कार्रवाई की जा सकती है. इसलिए अगर खाते से बिना अनुमति पैसा निकल जाए, तो तुरंत शिकायत करना और सभी सबूत संभालकर रखना बेहद जरूरी है. इससे बैंक और जांच एजेंसियों को मामले की जांच करने में मदद मिलती है.
