उमर सरकार को कांग्रेस का झटका?कैबिनेट में शामिल होने से इनकार
जम्मू-कश्मीर में मंगलवार को होने वाले कैबिनेट विस्तार से ठीक पहले कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह सरकार का हिस्सा नहीं बनेगी. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि जब तक जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाता, तब तक कांग्रेस कैबिनेट में शामिल नहीं होगी. उन्होंने कहा कि पार्टी पिछले दो सालों से इस मांग को लेकर संघर्ष कर रही है और अपने रुख पर पूरी तरह कायम है.कर्रा ने कहा कि यह आंदोलन केवल आज का नहीं है, बल्कि सरकार के गठन से पहले से ही कांग्रेस जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाने की मांग उठाती रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा बहाल होने तक कांग्रेस सरकार की कैबिनेट में शामिल नहीं होगी.कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी ने इस मांग को लेकर श्रीनगर चलो, जम्मू चलो और दिल्ली चलो जैसे बड़े विरोध प्रदर्शन किए. इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में भूख हड़ताल और विभिन्न विरोध कार्यक्रम आयोजित किए गए.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इन कार्यक्रमों को केंद्रीय नेतृत्व का भी समर्थन मिला और पार्टी नेतृत्व ने इन प्रयासों को स्वीकार किया.मंगलवार को होने वाले कैबिनेट विस्तार से पहले कांग्रेस का यह बयान राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. राज्य में कैबिनेट विस्तार की तैयारियों के बीच पार्टी ने साफ कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करना उसकी प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर वह किसी तरह का समझौता नहीं करेगी.कर्रा ने दोहराया कि कांग्रेस का पूरा संगठन राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर एकजुट है. जब तक जम्मू-कश्मीर को उसका पूर्ण राज्य का दर्जा वापस नहीं मिलता, तब तक पार्टी कैबिनेट में शामिल होने के अपने फैसले पर कायम रहेगी. इसी बीच जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की तरफ से बाकायदा मंगलवार सुबह 10:30 बजे होने वाले कैबिनेट विस्तार का नोटिफिकेशन जारी कर सभी तरह के अफवाहों पर पूर्ण विराम लगा दिया है.सीएम उमर अब्दुल्ला ने अपनी पार्टी के साथियों और विधायकों से अपील की कि वे मंत्री पद पाने के लिए उनसे या नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला से संपर्क न करें. क्योंकि उनके विचार-विमर्श के बाद सूची पहले ही फाइनल हो चुकी है. अब फारूक साहब मेरे या किसी और के दरवाजे पर जाने की कोई जरूरत नहीं है. कौन मंत्री बनेगा इसका फैसला पेंडिंग नहीं है, यह पहले ही तय हो चुका है. इसलिए मैं अपने साथियों से धैर्य रखने की अपील करता हूं. अब्दुल्ला ने कहा कि जो होना है वह ईश्वर तय करता है. अपने साथियों से आग्रह करता हूं कि वे मंत्री पद पाने के लिए मैसेज भेजने या फोन कॉल करने से बचें.बताया जा रहा है कि विधायकों की तरफ से सीएम उमर अब्दुल्ला को लगातार सिफारिश की जा रही थी. जिस पर उन्होंने कहा कि कृपया व्हाट्सएप मैसेज भेजना बंद करें, मुझे लगातार बहुत लंबे-लंबे मैसेज मिल रहे हैं. जैसे पूरी किताबें लिखी जा रही हों, लोग अपना पूरा बायोडाटा भेज रहे हैं, मानो मुझे पता ही न हो कि वे कौन हैं! मैं उन्हें और उनके काम को पहले से ही जानता हूं. इसलिए जो भी होना है, वह अगले दो-तीन दिनों में हो जाएगा.’ सीएम के बयान से यह तय है कि अब उपराज्यपाल की तरफ से समय तय होते ही मंत्रिमंडल विस्तार हो जाएगा.सीएम उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को राज्यपाल से मुलाकात की है. उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल सिन्हा का हाल-चाल भी पूछा था. क्योंकि पिछले कुछ हफ्तों से उनकी तबीयत ठीक नहीं चल रही थी एलजी साहब काफी दिनों बाद श्रीनगर लौटे हैं, इस बीच उनकी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी, इसलिए मैं उनका हाल-चाल जानना चाहता था. कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर समय-समय पर चर्चा करना और उनकी राय लेना जरूरी है. हमारी मुलाकात को काफी समय हो गया था, इसलिए मैंने आज मिलने का समय मांगा. उन्होंने समय दिया और मैं अभी उनसे मिलकर लौटा हूं।
