इस दिन से शुरू होंगे शारदीय नवरात्र,जानें विजयादशमी की सही डेट
हिंदू धर्म में दशहरा यानी विजयदशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की थी। इस अवसर पर हर साल लंकापति रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। वहीं उत्तर भारत में इस त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। साथ ही मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का अंत किया था।इस वर्ष, शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर, 2026 को शुरू होगी और 20 अक्टूबर, 2026 को समाप्त होगी।आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 को रात 9:19 बजे शुरू होगी और अगले दिन यानी 11 अक्टूबर 2026 को रात 9:30 बजे समाप्त होगी।घटस्थापना मुहूर्त – सुबह 06:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तकघटस्थापना अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक।इस साल विजयदशमी तिथि दो दिन पड़ रही है।

इसलिए इस त्योहार को लेकर संशय बना हुआ है। आइए जानते हैं कब है दशहरा और रावण दहन का शुभ मुहूर्त।फ्यूचर पंचांग के मुताबिक, दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा। दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।पंचांग के अनुसार विजय मुहूर्त 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 01 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 02 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस समयावधि में माता अपराजिता और शमी के पेड़ की पूजा कर सकते हैं।रावण दहन का समय 20 अक्टूबर 2026 को सूर्यास्त के बाद किया जाएगा। इस दिन सूर्य देव शाम को 5 बजकर 47 मिनट पर अस्त हो रहे हैं।दशहरा पर्व का धार्मिक महत्व बहुत विशेष माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध किया था। वहीं, कई परंपराओं में इस दिन मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के संहार को भी शक्ति की विजय के रूप में याद किया जाता है। यही वजह है कि विजयदशमी को ‘विजय का पर्व’ कहा जाता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। इस दिन शस्त्र पूजा और नए कार्यों की शुरुआत करना भी शुभ माना जाता है। पूर्वी भारत में दशहरे को दुर्गा पूजा और दुर्गा विसर्जन के रूप में मनाया जाता है। वहीं उत्तर भारत में इस दिन रामलीला और रावण दहन का आयोजन किया जाता है। दशहरा पर शहर- शहर रावण, कुंभकरण और रावण के पुत्र मेघनाथ के पुतले का दहन करने का विधान है।
