जानिए मीनार अचानक कैसे गिरी?उज्जैन शाही मस्जिद को लेकर शुरू हुई सियासत
उज्जैन के गोपाल मंदिर और पुरानी शाही मस्जिद विवाद में अब सियासी हलचल भी तेज हो गई है। भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद शनिवार की शाम अचानक उज्जैन पहुंचे और पुलिस कंट्रोल रूम में कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और SP प्रदीप शर्मा से बंद कमरे में लंबी मुलाकात की. मुलाकात के बाद विधायक मसूद ने मीडिया से बातचीत में कई बड़े बयान दिए. आरिफ मसूद ने कहा कि शाही मस्जिद के पूर्व सदर अरशद भाई से मेरा काफी पुराना नाता रहा है. जिस दिन उनकी मौत हुई, मैं दिल्ली में था इसलिए नहीं आ पाया था, आज उनके परिजनों से मिलने आया था.उन्होंने कहा कि मस्जिद के नीचे दुकानें थीं और ऊपर का हिस्सा हटना था, लेकिन इस दौरान मीनार अचानक कैसे गिर गई? इसकी निष्पक्षता से जांच होना चाहिए. यही बात मैंने कलेक्टर और SP साहब से कही है. विधायक ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि मुस्लिम युवकों की अंधाधुंध धरपकड़ की शिकायतें लगातार फोन पर मिल रही हैं. इसपर रोक लगनी चाहिए. पहले CCTV फुटेज देखे जाएं और जिनके खिलाफ FIR है, सिर्फ उन्हें पकड़ा जाए.

उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मीनार गिरने से मस्जिद का जो हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है, उसे जल्द से जल्द दोबारा बना दिया जाए. हालांकि अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि निर्माण कार्य शुरू हो चुका है.आरिफ मसूद ने मुस्लिम समाज और नेताओं से भी संयम की अपील की. उन्होंने कहा, ‘मेरा मुस्लिम समाज के युवकों से कहना है कि यह समय संयम बरतने का है, एक-दूसरे पर आरोप न लगाएं, न लड़ें. कमेटियां भी आरोप-प्रत्यारोप बंद करें. उज्जैन एक अच्छा शहर है, जहां गंगा-जमुनी तहजीब के साथ हर त्योहार मनाया जाता है. ओवैसी की पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हों या कोई और, सबको बयानबाजी से बचना चाहिए, जिससे शहर का माहौल खराब न हो’.उन्होंने आगे कहा, ‘शहर काजी के घर पर पथराव होना गलत है, लेकिन मैं चाहूंगा कि काजी साहब उन लोगों को माफ कर दें और वो लोग भी काजी साहब से माफी मांग लें. मिसकम्युनिकेशन के कारण हालात बने, काजी साहब अपनी बात लोगों तक सही तरीके से नहीं पहुंचा पाए. आपने यह भी कहा कि पहले हमें तय करना होगा कि हमें सियासत करनी है या मजहब की हिफाजत की बात करनी है’.आरिफ मसूद ने अपनी ही पार्टी के स्थानीय नेताओं पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, इतना बड़ा मामला है और हम अपने उलेमा पर ही उंगली उठाने लगे. खासतौर पर उज्जैन के मुसलमानों को धन्यवाद कि गांधीवादी तरीके से रास्ता निकला. मैं इस बारे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से भी शिकायत करूंगा कि जब मैं 180 KM दूर भोपाल से उज्जैन आ सकता हूं, तो यहां के जिम्मेदारों ने इस मामले को संज्ञान में क्यों नहीं लिया.
