बिहार में गंगा का जलस्तर कई जगह खतरे से ऊपर,नेपाल की बाढ़ ने मचाई तबाही
बिहार में 30 सितंबर को बारिश को लेकर पटना मौसम विभाग के मुताबिक आसमान साफ रहेगा हालाकि बाढ़ का संकट पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. IMD के 29 सितंबर के पूर्वानुमान के अनुसार 30 सितंबर, 1 और 2 अक्टूबर को बिहार के लिए कोई मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है. फिर भी अगले 72 घंटों बाद यानी 3 से 5 अक्टूबर के बीच कुछ हिस्सों में गरज-चमक और आंधी की संभावना जताई गई है.नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी में अचानक बढ़े पानी ने उत्तर बिहार की चिंता बढ़ा दी है. 28 सितंबर को वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना है. इसके बाद पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा.पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक का जलस्तर 91.25 मीटर तक पहुंच गया, जिसे स्थानीय स्तर पर रिकॉर्ड ऊंचाई बताया गया है. बैराज से 5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी 13 घंटे तक और 4 लाख क्यूसेक से अधिक पानी 32 घंटे तक रहने की जानकारी सामने आई है. इसका असर डाउनस्ट्रीम इलाकों में दिखाई दे रहा है.

30 सितंबर की ताजा स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार पश्चिम चंपारण में गंडक के दबाव के बीच चंपारण तटबंध तीन जगह टूट गया है. बथुवरिया और बैरिया के फुलियाखाड़ समेत आसपास के कई गांवों में पानी फैलने की सूचना है. ग्रामीणों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है. प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें कटाव और तटबंध की मरम्मत में जुटी हैं.मुजफ्फरपुर के सरैया क्षेत्र में भी गंडक का बढ़ता जलस्तर चिंता बढ़ा रहा है. रेवाघाट पर नदी का पानी मंदिर परिसर तक पहुंचने की रिपोर्ट है. प्रशासन ने तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाने और राहत-बचाव की तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं.बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के रियल टाइम आंकड़ों के अनुसार 29 सितंबर की रात गंगा पटना के गांधीघाट पर 48.85 मीटर थी, जबकि खतरे का निशान 48.60 मीटर है. यानी यहां नदी खतरे के निशान से 25 सेंटीमीटर ऊपर थी. दीघाघाट पर जलस्तर 49.69 मीटर दर्ज हुआ, जो चेतावनी स्तर से ऊपर है. हथीदह में भी गंगा 41.67 मीटर पर थी, जबकि खतरे का निशान 41.76 मीटर है.कहलगांव में गंगा का जलस्तर 30.74 मीटर दर्ज हुआ, जबकि खतरे का निशान 31.09 मीटर है. सुल्तानगंज में जलस्तर 35.08 मीटर रहा, जो 34.50 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर है. अज़माबाद में भी नदी चेतावनी स्तर से ऊपर दर्ज की गई. इससे भागलपुर और आसपास के तटवर्ती इलाकों में निगरानी जारी है.सुपौल के वीरपुर में कोसी 75.29 मीटर पर दर्ज की गई, जबकि खतरे का निशान 74.70 मीटर है. खगड़िया के बलतरा में कोसी 35.20 मीटर पर थी, जो 33.85 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर है. खगड़िया में बूढ़ी गंडक भी चेतावनी स्तर से ऊपर है.सीतामढ़ी के ढेंग ब्रिज पर बागमती 70.70 मीटर दर्ज हुई, जो चेतावनी स्तर 70 मीटर से ऊपर है. मुजफ्फरपुर के रनिसैदपुर में बागमती 56.19 मीटर और बेनीबाद में 49.92 मीटर दर्ज की गई. सीवान के दरौली में घाघरा भी 61.15 मीटर पर थी, जो 60.82 मीटर के खतरे के निशान से ऊपर है.राज्य सरकार के आंकड़ों पर आधारित उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सितंबर के मध्य तक बिहार के 15 जिलों में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए थे. 15 सितंबर की रिपोर्ट में करीब 49.67 लाख लोगों के प्रभावित होने का आंकड़ा दिया गया था. यह आंकड़ा उस समय 15 जिलों, 88 प्रखंडों और सैकड़ों पंचायतों में बाढ़ के असर को दर्शाता है.सितंबर में बाढ़ से प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल रहे हैं. हालांकि 30 सितंबर की स्थिति में इन सभी जिलों में खतरे का स्तर समान नहीं है और मौजूदा नेपाल-गंडक संकट का तत्काल प्रभाव मुख्य रूप से डाउनस्ट्रीम उत्तर बिहार के जिलों में है.IMD के पटना केंद्र के आधिकारिक अपडेट में 30 सितंबर, 1 अक्टूबर और 2 अक्टूबर के लिए बिहार में कोई चेतावनी नहीं है. 3, 4 और 5 अक्टूबर को गरज-चमक, आंधी आदि की संभावना दर्ज की गई है. इसलिए फिलहाल बाढ़ का मुख्य खतरा नई भारी बारिश से ज्यादा नदियों में पहले से मौजूद अतिरिक्त पानी, तटबंधों पर दबाव और डाउनस्ट्रीम जलस्तर से जुड़ा है.मौसम साफ होने से तत्काल बारिश का दबाव कम हुआ है, लेकिन नदी का पानी एक साथ नीचे की ओर बढ़ने में समय लेता है. यही वजह है कि पश्चिम चंपारण से लेकर गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली तक तटवर्ती इलाकों में निगरानी महत्वपूर्ण बनी हुई है. जल संसाधन विभाग के आंकड़ों में गंडक, कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक, घाघरा और गंगा की कई गेज साइटों पर पानी चेतावनी या खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया है.बिहार में आसमान साफ होने लगा है, लेकिन बाढ़ का पानी अभी पूरी तरह पीछे नहीं हटा है. नेपाल में हुई बारिश के बाद गंडक में आया बड़ा जलप्रवाह उत्तर बिहार के लिए नई चुनौती बना है. वहीं गंगा, कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक और घाघरा की कई जगहों पर ऊंची स्थिति बताती है कि मौसम सुधरने का मतलब फिलहाल बाढ़ का खतरा खत्म होना नहीं है.
