फिट दिखने वाले युवाओं में क्यों बढ़ रहे हार्ट अटैक?आप भी जाते हैं जिम तो हो जाइए सावधान
क्या आपको लगता है कि जिम में घंटों पसीना बहाने वाला, अच्छी बॉडी बनाने वाला या बिल्कुल फिट दिखने वाला इंसान अंदर से भी पूरी तरह हेल्दी है? अगर आपका जवाब हां है, तो भारत के जाने-माने कार्डियक सर्जन डॉ. देवी शेट्टी की ये बातें आपकी आंखें खोल देंगी. उनका साफ कहना है कि किसी के बाहर के रूप-रंग या उसकी बॉडी को देखकर यह अंदाजा बिल्कुल नहीं लगाया जा सकता कि उसका दिल अंदर से कितना सुरक्षित है.आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपनी सेहत को लेकर कई तरह की गलतफहमियां पाल लेते हैं. एनडीवी से वर्ल्ड हार्ट डे के मौके पर एक खास बातचीत में डॉ. शेट्टी ने दिल से जुड़ी कई चौंकाने वाली और जरूरी बातें शेयर की हैं. आइए जानते हैं कि वे कौन सी बातें हैं जिन्हें हमें तुरंत जानने की जरूरत है.

डॉ. देवी शेट्टी का कहना है कि यह एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. कई युवा, जिनके दिल की धमनियों में कोई ब्लॉकेज नहीं होता, वे भी डाइटरी सप्लीमेंट्स, हार्मोन और शरीर को आकर्षक बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कई रसायनों की वजह से गंभीर हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं.उन्होंने कहा कि युवाओं को यह समझाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है कि आर्टिफिशियल तरीके से मांसपेशियां बढ़ाने वाले रसायन गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं. उन्होंने ऐसे कई शिक्षित और सफल लोगों को देखा है जिन्हें इन चीजों के कारण हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक हुआ.डॉ. शेट्टी के अनुसार, हार्ट अटैक के बाद मिलने वाले लगभग 50% मरीजों को पहले कभी पता ही नहीं चला कि उन्हें दिल की बीमारी है. उन्हें लगता था कि वे पूरी तरह फिट हैं, लेकिन अचानक हार्ट अटैक आ गया.आज की तकनीक से लगभग हर हार्ट रोग का पता लगाया जा सकता है. इसलिए यह कहना उचित नहीं है कि कोई दिल की समस्या इतनी बड़ी थी कि उसका पता नहीं लगाया जा सकता था.यदि किसी व्यक्ति में पहले से ब्लॉकेज बनने की प्रवृत्ति है या धमनियों में रुकावट मौजूद है, तो तनाव और खराब लाइफस्टाइल बीमारी को तेजी से बढ़ा सकते हैं.इमोशनल तनाव शरीर में ऐसे बदलाव ला सकता है जो हार्ट अटैक का कारण बन सकते हैं. हालांकि, आमतौर पर ऐसे लोगों में पहले से कोई न कोई हार्ट रोग मौजूद होता है. केवल “दिल टूटने” से पूरी तरह हेल्दी हार्ट वाले व्यक्ति की मृत्यु होना वास्तविक जीवन में बहुत दुर्लभ है।डॉ. शेट्टी का मानना है कि वर्षों से लोग तेल को दोषी मानते हैं, जबकि असली नुकसान अधिक मात्रा में कार्बोहाइड्रेट भी पहुंचाते हैं.उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक कटोरी चावल शरीर में बड़ी मात्रा में ग्लूकोज में बदल सकता है. लोग उतनी चीनी शायद सीधे कभी न खाएं, लेकिन रोज दो समय चावल खा लेते हैं.. शेट्टी का सुझाव है कि देशभर, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में, ऐसे डायग्नोस्टिक सेंटर बनाए जाएं जहां कोई भी व्यक्ति लगभग एक घंटे में यह जान सके कि उसे भविष्य में हार्ट से जुड़ी बीमारी या कैंसर का खतरा है या नहीं.उनके अनुसार, हार्ट से जुड़ी बमारी और कैंसर का शुरुआती स्टेप में पता लगाना भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है.शेट्टी के अनुसार, खराब खानपान और रेडी टू ईट वाले फूड के कारण भारत मोटापे और डायबिटीज की ओर बढ़ रहा है.भारत में हार्ट सर्जरी कराने वाले लगभग 50% मरीज डायबिटिक होते हैं. अनकंट्रोल डायबिटीज हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और आंखों की समस्याओं का बड़ा कारण बनती है.उन्होंने कहा कि कई भारतीयों को यह तक नहीं पता कि उन्हें डायबिटीज है, क्योंकि रेगलर हेल्थ चेकअप की आदत नहीं है.डॉ. शेट्टी का मानना है कि कोविड वैक्सीन और आज दिखाई दे रहे हार्ट के रोगों के बीच कोई बड़ा संबंध नहीं दिखता.गंभीर कोविड संक्रमण के दौरान खून के थक्के बनने के कारण हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले देखे गए थे, लेकिन वर्तमान में दिख रहे मामलों को सीधे कोविड वैक्सीन से जोड़ना उचित नहीं है.उनके अनुसार, जागरूकता जरूर बढ़ी है. पहले भी हार्ट अटैक होते थे, लेकिन लोग अचानक मौत को हमेशा दिल के दौरे से नहीं जोड़ते थे.सोशल मीडिया और बेहतर डायग्नोस्टिक तकनीक की वजह से अब लोग अधिक सतर्क हैं और शुरुआती जांच करा रहे हैं.मस्कुलर बॉडी होने का मतलब यह नहीं कि हार्ट को खतरा नहीं है.डायबिटीज, हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, पारिवारिक इतिहास और लाइफस्टाइल जैसे जोखिम कारकों पर ध्यान देना जरूरी है।शुरुआती जांच और समय पर पहचान ही दिल की बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है.फिटनेस का सही मतलब केवल हेल्दी दिखना नहीं, बल्कि यह जानना है कि आपके शरीर के अंदर क्या चल रहा है।
