अब ऐसे चलेगा राम मंदिर ट्रस्ट,चढ़ावे की गिनती पर 43 लोगों की रहेगी निगरानी
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, SIT जांच, FIR, 8 गिरफ्तारियां और चंपत राय, अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट में बड़े और प्रशासनिक बदलाव शुरू हो गए. दअरसल, यह मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट में प्रबंधन और उसके पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हुए थे. ऐसे में 06 जुलाई को ट्रस्ट के पदाधिकारियों की बैठक के बाद प्रोफेशनल मैनेजमेंट को बढ़ावा देने, CEO की नियुक्ति और वित्तीय निगरानी को मजबूत करने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए पहला कदम उठाया भी जा चुका है.अब तक ट्रस्ट का महासचिव, श्रीराम जन्मभूमि क्षेत्र के प्रशासनिक और संचालन सबंधी जिम्मेदारियां संभालता था. अब जब चंपत राय ने पद छोड़ दिया है तो उनकी जगह अंतरिम महासचिव के तौर पर कृष्णमोहन की नियुक्ति की गई है. उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती ट्रस्ट की पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति लोगों के विश्वास को बहाल कराना है.ट्रस्ट ने सबसे बड़ा बदलाव बैंक राम मंदिर के बैंक खातों के लिए किया है. इसके संचालन के लिए 3 लोगों की समिति बनाई गई है.अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन के साथ उनके दो सहयोगियों जगदीश आफले और चंदन राय को शामिल किया गया है.अब बैंक खातों से जुड़े किसी भी वित्तीय लेनदेन के लिए इन तीनों के साइन की जरूरत होगी.अब किसी एक व्यक्ति के हस्ताक्षण से बैंक संबंधी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाएगी.

अब तक बैंकिंग व्यवस्था की जिम्मेदारी ट्रस्टी अनिल मिश्रा देखते थे. बैंक में उनके ही हस्ताक्षर मान्य थे.वहीं, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी के डिजिटल साइन का इस्तेमाल किया जाता था.ट्रस्ट के इस फैसले से वित्तीय लेन-देन को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही में इजाफा होगा.दान व्यवस्था को लेकर भी ट्रस्ट की तरफ से कई बदलाव किए गए. अब इस चढ़ावे की गिनती के लिए मल्टीलेयर निगरानी होगी. इसके लिए गणना स्थल पर 43 लोग मौजूद रहेंगे. साथ ही गणना स्थल के आसपास जहां कैमरे नहीं लगे थे, वहां नए कैमरे लगाए गए हैं. तकरीबन 13 एक्सट्रा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. दरअसल,ट्रस्ट अब दान पेटी से लेकर नगदी गिनने की हर गतिविधि कैमरे में कैद करना चाहता है.दान पेटियों से नकदी को गणना स्थल तक ले जाने के लिए 27 एसआईएस (SIS) सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है. इस दौरान गणना स्थल से लेकर दानपेटी के बीच के हर पिलर के पास पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे. पिलर नंबर 34 के पास रखी गुप्त पेटी के पास 3 पुलिसकर्मियों की तैनाती के निर्देश हैं.ट्रस्ट की तरफ से चढ़ावे की नियमित आंतरिक ऑडिट, बाहरी ऑडिट, डिजिटल अकाउंटिंग और भुगतान की ऑनलाइन निगरानी जैसी व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितताओं के विवाद से बचा जा सके.राम मंदिर चढ़ावा मामले की एसआईटी जांच के दौरान वीआईपी पास जारी करने को लेकर भी गड़बड़ियां सामने आई. गोपाल राव, जो ट्रस्ट में किसी आधिकारिक पद पर नहीं थे, वह भी वीआईपी पास जारी कर रहे थे. ऐसे में ट्रस्ट ने फैसला किया है कि अब वीआईपी पास अब सिर्फ ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास की डिजटल आईडी से ही जारी किए जाएंगे. बाकी सभी डिजिटल आईडी कार्ड निरस्त कर दिए गए हैं.ट्रस्ट से जुड़े कई लोगों ने अपने बयानों में संकेत दिया है कि ट्रस्ट को प्रोफेशनल मैनेजमेंट मॉडल के तहत चलाया जा सकता है. इसके लिए देश के बड़े मंदिरों, खासकर तिरुपति बालाजी जैसे संस्थानों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जा सकता है. हालांकि, इसको लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं किया गया है. लेकिन दिर प्रशासन को केवल धार्मिक संस्था की तरह नहीं बल्कि बड़े संस्थान की तरह संचालित करने की तैयारी है, जिसके जरिए कुछ बदलाव हो सकते हैं.SOP आधारित कार्यप्रणालीडिजिटल फाइलिंगमानव संसाधन (HR) प्रणालीजिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारासमय-समय पर काम की समीक्षाराम मंदिर का संचालन बढ़िया तरीके हो, वित्तीय मामलों पर और निगरानी की जा सके, इसके लिए ट्रस्ट में CEO की नियुक्ति की व्यवस्था लाई जा सकती है. सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है. इससे एक हद तक ट्रस्ट के कामकाज की निगरानी सरकार की नजर में होगी. दान, खरीद, ठेके, कर्मचारियों और वित्तीय प्रक्रियाओं की निगरानी एक तय प्रशासनिक ढांचे के तहत होगी. भीड़ और दर्शन का प्रबंधन बेहतर होगा. मंदिर के लिए लंबी परियोजनाओं को अच्छे से ट्रैक किया जा सकेगा. साथ ही ट्रस्ट पर बोझ भी कम होगा.
