सीमावर्ती इलाकों में होगा कई अहम बदलाव!भाजपा सरकार की नजर पर है मुस्लिम बाहुल्य इलाका
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीमावर्ती राज्यों को लेकर लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं. चाहे वह बिहार का सीमांचल का इलाका हो या पश्चिम बंगाल का या फिर जम्मू कश्मीर, पंजाब, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश का सीमावर्ती इलाका हो या फिर पूर्वोत्तर राज्यों के सीमावर्ती राज्यों का ही मामला क्यों ना हो. वह लगातार बैठक कर रहे हैं औऱ दौरा भी कर रहे हैं. बिहार के भी चार सीमांचल जिलों पर अमित शाह की नजर रही है. इस साल भी अमित शाह सीमांचल का दौरा कर चुके हैं.पिछले दिनों मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के स्तर पर भी आला अधिकारियों के साथ सीमांचल को लेकर बैठक की गई थी. अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का एक बार फिर से देश के सीमावर्ती राज्यों के अधिकारियों के साथ बैठक महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि सीमांचल को लेकर केंद्र सरकार कोई बड़ा गेम प्लान पर काम कर रही है.केंद्र सरकार की ओर से सीमावर्ती राज्यों में आबादी के बदलते स्वरूप की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी बनाई गई है. कमेटी को जिम्मेदारी दी गई है कि अवैध और प्रवास और सामान्य बसावट के पैटर्न, संगठित पलायन, विभिन्न धार्मिक और सामाजिक समुदाय के बीच आबादी की संरचना में हो रहे बदलाव का अध्ययन करना. इस कमेटी के गठन के बाद अमित शाह की पहली बड़ी बैठक है.राजनीतिक विशेषज्ञ भोलानाथ का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार सीमांचल इलाकों का दौरा भी करते रहे हैं. पैरामिलिट्री फोर्स जो उन इलाकों में लगाई गई है, उनके साथ भी बैठक करते रहे हैं. बिहार का सीमांचल का इलाका बांग्लादेश और नेपाल से सटा हुआ है और लगातार वहां घुसपैठ की खबरें आती रहती है. बंगाल चुनाव के समय भाजपा का घुसपैठ को लेकर जीरो टॉलरेंस का नारा था, जिसका लाभ भी बीजेपी को मिला.वह कहते हैं कि बिहार के सीमांचल इलाकों में भी तेजी से डेमोग्राफी बदला है और बीजेपी का एक यह भी नारा है कि जो यहां के लोग हैं, वहीं सरकार चुनेंगे.

विदेशी वोट नहीं डालेंगे. भोलानाथ का कहना है कि डेमोग्राफी चेंज का असर परिसीमन पर भी पड़ने वाला है. इसलिए अमित शाह सीमांचल को लेकर लगातार एक्सरसाइज कर रहे हैं, क्योंकि अभी जो स्थिति है उसमें सत्ताधारी दल को नुकसान होगा. ऐसी स्थितियां बनाने की कोशिश हो रही है, जिससे बीजेपी को लाभ मिले.राजनीतिक विशेषज्ञ अमरनाथ तिवारी का कहना है कि केंद्र शासित राज्य बनने पर सीमांचल को लेकर कयास तो लंबे समय से लगाए जा रहे हैं. हालांकि आधिकारिक बयान न तो प्रधानमंत्री के स्तर से आया है न हीं केंद्रीय गृह मंत्री के स्तर से लेकिन जिस प्रकार से दौरा और बैठक सीमांचल इलाकों को लेकर अमित शाह कर रहे हैं, बड़ा गेम प्लान इनका है क्योंकि घुसपैठ जिस पैमाने पर हुए हैं और डेमोग्राफी बदली है तो आगे सब कुछ चेक बैलेंस करना है.वहीं, भाजपा प्रवक्ता डॉ राम सागर सिंह का कहना है कि घुसपैठियों को बाहर निकलने का वादा बीजेपी ने किया है और उस पर लगातार काम भी हो रहा है. साथ ही सीमा को कैसे सुरक्षित बनाया जाए, जिससे घुसपैठ नहीं हो. इसके लिए भी लगातार बैठक हो रही है.हालांकि आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बीजेपी के एजेंडा को आगे बढ़ा रहे हैं. सीमांचल के इलाके में जो मुस्लिम बहुल इलाका है, वहां नए कॉरिडोर बनाने की तैयारी में हैं.बिहार और बंगाल का सीमांचल से जुड़ा हुआ इलाका मुस्लिम बहुल है और यहां डेमोग्राफी तेजी से बदला है. बिहार के किशनगंज में लगभग 68% करीब 13 लाख मुस्लिम और 31.43% यानी करीब 6 लाख हिंदुओं की आबादी है. उसी तरह पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले में मुस्लिम और हिंदू दोनों की संख्या करीब-करीब बराबर है. यहां करीब 32 लाख से ऊपर आबादी है, जिसमें मुस्लिम 49.92% और हिंदू 49.31% हैं. ईसाई आबादी 0.56% है.यानी कहा जाय तो यहां भी मुस्लिम आबादी अधिक है. बिहार के पूर्णिया जिले में हिंदुओं की आबादी 60.94% तो मुस्लिमों की 38.46% है. वहीं कटिहार जिले में भी मुस्लिम करीब 31.43% हैं तो हिंदू 68% हैं.बिहार के पूर्वी भाग से सटे पश्चिम बंगाल के मुख्य रूप से तीन जिले हैं, जिनमें उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और दार्जिलिंग शामिल हैं. ये जिले बिहार के किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जिलों के साथ सीमा साझा करते हैं.दार्जिलिंग अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण बिहार के किशनगंज जिले से सटा है. उत्तर दिनाजपुर भी पश्चिम बंगाल के उत्तर-पूर्वी हिस्से में है. यह बिहार की सीमा से लगता है. दक्षिण दिनाजपुर भी बिहार की सीमा से सीमा साझा करता है. इन जिलों में घुसपैठ के कारण कई इलाकों में डेमोग्राफी बदली है. इसी कारण अमित शाह की नजर इस पर है.बिहार और बंगाल दोनों जगह जब विधानसभा का चुनाव हुआ तो घुसपैठिए को बड़ा मुद्दा बनाया गया था और अब उस पर काम भी हो रहा है. अमित शाह की बैठक इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव की ओर से यह आरोप लगाए जाते रहे हैं कि केंद्र सरकार दोनों राज्यों के सीमावर्ती जिलों को काटकर अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने कि साजिश कर रही है. बीजेपी वोट बैंक और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए यह कदम उठाना चाहती है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया था. वहीं बिहार विधानसभा चुनाव के समय सीमांचल में प्रधानमंत्री और अमित शाह के दौरे पर तेजस्वी यादव की तरफ से इस तरह के आरोप लगाए गए थे.देश के सीमावर्ती राज्यों में लगातार बॉर्डर को सुरक्षित बनाने के लिए कंटीले तारों के अलावे एंटी क्लाइंब स्मार्ट फेंसिंग और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम से लैस किया जा रहा है. इसके अलावे बिहार और बंगाल को लेकर जो चर्चा है, उसके मुताबिक 6 जिलों को अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया जा सकता है. हालांकि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बयान दिया था कि किसी तरह का कोई प्रस्ताव नहीं है लेकिन विशेषज्ञ कह रहे हैं कि लंबे समय से इस पर काम हो रहा है. जनगणना और परिसीमन के बाद इसको अंतिम रूप दिया जा सकता है.
