लालू ने तानाशाही के खिलाफ एकजुट होने का किया आह्वान,कार्यकर्ताओं से बोले-RJD सिर्फ चुनाव लड़ने की मशीन नहीं
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) आज अपना 30वां स्थापना दिवस मना रहा है. 5 जुलाई 1997 को लालू प्रसाद यादव ने इस पार्टी का निर्माण किया था. हालांकि पार्टी ने इस बार स्थापना दिवस 1 जुलाई को ही मना लिया था, लेकिन आज इस विशेष मौके पर लालू प्रसाद यादव ने बिहार की जनता के नाम एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है.राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से बिहार के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने अपने संदेश में कहा कि 5 जुलाई का दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि आज ही के दिन अनेक वरिष्ठ साथियों के साथ मिलकर हमने गरीबों, शोषितों, दबे-कुचले वर्गों और अल्पसंख्यकों के हक की लड़ाई शुरू की थी.” बिहार की जनता के नाम संदेश “प्रिय साथियों,आप सभी को राष्ट्रीय जनता दल के 30वें स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! बिहार के करोड़ों लोगों के लिए 5 जुलाई का दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि 1997 को आज ही के दिन अनेक वरिष्ठ साथियों के साथ मिलकर हमने गरीबों, शोषितों, दबे कुचले…<=”” p>— lalu prasad yadav (@laluprasadrjd) July 5, 2026लालू प्रसाद ने कहा कि बिहार में व्याप्त सामाजिक एवं आर्थिक असमानता को खत्म करने के लिए राजद के असंख्य कार्यकर्ताओं ने त्याग और बलिदान की अनूठी मिसाल कायम की है. पार्टी के प्रति समर्पित इन कार्यकर्ताओं के खून-पसीने से ही संगठन का विस्तार संभव हुआ है.

मैं ऐसे तमाम समर्पित नेताओं और साथियों को सलाम करता हूं.हमारी राजनीति हमेशा सामाजिक-आर्थिक गैरबराबरी के खिलाफ रही है. हमारे विकास का मॉडल सिर्फ चमकते हवाई अड्डे, आलीशान मॉल और चमचमाते होटलों तक सीमित नहीं रहता है. हम विकास के हरेक पहलू में समाज के गरीब और आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति की समान भागीदारी और उसकी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं. हमने सामाजिक और राजनीतिक संरचना में व्याप्त असमानता के खिलाफ निरंतर संघर्ष कर अपने लोकतंत्र को समावेशी बनाया है. लोहिया, जेपी, कर्पूरी और अंबेडकर के मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और प्रगाढ़ हुई है. हमने वह मंजिल हासिल की है जहां से अब वंचितों के आर्थिक और मनोवैज्ञानिक सबलीकरण की लड़ाई को मुकम्मल अंजाम तक ले जाना है.देश में जनवादी और लोकतांत्रिक विचारधारा वाले दलों पर निराशा के बादल छाए हैं. संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा, आक्रामक बाजार, जनप्रतिनिधियों को खरीदने में पूंजी का असीमित उपयोग तथा दक्षिणपंथी राजनीति ने लोकतंत्र पर चुनौतियां खड़ी की हैं. पिछड़ों की भागीदारी, शिक्षा, रोजगार और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों को तथाकथित ‘हिंदुत्व के आवरण’ से ढंका जा रहा है.विगत राज्यों के चुनाव नतीजों की पड़ताल से साफ है कि भाजपा तानाशाही के बल पर देश को पीछे धकेल रही है. राजद की राजनीति इस परिस्थिति को स्वीकार करने की इजाजत नहीं देती है. इसलिए पार्टी के सभी साथियों को बिना वक्त गंवाए इस ऐतिहासिक चुनौती का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार होना पड़ेगा. पार्टी के हर कार्यकर्ता और नेता को यह गहराई से समझना होगा कि हमारा दल सिर्फ ‘चुनाव लड़ने की मशीन’ मात्र नहीं है. हमें समर्थक समूहों और अन्य प्रगतिशील वर्गों के साथ लगातार जीवंत संपर्क बनाए रखना होगा. उन्हें यह भरोसा दिलाना होगा कि राजद संसद और सड़क दोनों जगह लड़ने में पूरी तरह सक्षम है. यह लड़ाई पिछली लड़ाइयों से अलग है क्योंकि यह ‘असंवेदनशील संपन्नता’ और ‘चेतन विपन्नता’ के बीच की जंग है. यह लड़ाई संवैधानिक संस्थाओं के असंवैधानिक तरीकों को खत्म करने और संघ तथा कॉर्पोरेट घरानों की जुगलबंदी के खिलाफ है. छोटी-मोटी चिंताओं को ताक पर रखकर इस लड़ाई को जीतने के लिए सबको साथ मिलकर लड़ना होगा.
