नीतीश कुमार को मजबूत करेंगे RCP सिंह,सब कुछ हो गया तय!
आईएएस अधिकारी से राजनेता बने आरसीपी सिंह को कभी जनता दल यूनाइटेट के कद्दावर नेता के तौर पर पहचान थी लेकिन केंद्र में मंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार से दूरियां बढ़ गई. ललन सिंह से भी विवाद हुआ और अंत में जेडीयू छोड़ना पड़ा. अब 4 साल बाद उनकी नीतीश से मुलाकात हुई है. इसके साथ ही वापसी के कयास भी लगने लगे. हालांकि ये आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए पार्टी के शीर्ष नेताओं को मनाना होगा. वहीं निशांत कुमार की सहमति भी जरूरी होगी.रामचंद्र प्रसाद सिंह यानी आरसीपी सिंह का नीतीश कुमार के साथ पिछले तीन दशक का संबंध है. नीतीश जब केंद्र में मंत्री थे, तभी ही वह उनके साथ जुड़े. बिहार में नीतीश ने जब बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली, तब वह उनके सचिव बन गए. कुछ समय बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेकर जेडीयू में शामिल हो गए.जेडीयू में नीतीश कुमार ने उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी. राष्ट्रीय महासचिव, संगठन महासचिव से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक बने. एक समय स्थिति ऐसी हो गई कि जेडीयू का मतलब आरसीपी सिंह कहा जाने लगा लेकिन केंद्र में मंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार के साथ उनकी दूरियां बढ़ी. उसी बीच ललन सिंह से भी विवाद हुआ और उसका खामियाजा आरसीपी सिंह को जेडीयू छोड़कर चुकाना पड़ा.जेडीयू छोड़ने के बाद आरसीपी सिंह पिछले तीन-चार सालों में तीन पार्टी बदल चुके हैं. सबसे पहले वह भारतीय जनता पार्टी में गए, फिर अपनी पार्टी (आप सबकी आवाज) बनाई. पिछले साल प्रशांत किशोर की जन सुराज में अपनी पार्टी का विलय कर दिया. विधानसभा चुनाव में बेटी को टिकट दिलाया और खुद भी जमकर प्रचार किया लेकिन नाकामी हाथ लगी. अब उनका जन सुराज से भी मोहभंग हो गया है.पूर्व जेडीयू अध्यक्ष आरसीपी सिंह अब 4 साल बाद फिर से अपनी पुरानी पार्टी में आना चाहते हैं. जेडीयू छोड़ने के बाद पिछले दिनों पहली बार उनकी नीतीश कुमार से मुलाकात हुई. पूर्व सीएम से भेंट से गदगद आरसीपी सिंह कहते हैं कि मुलाकात बहुत आत्मीय रही. वहीं जेडीयू में वापसी के सवाल पर कहते हैं, ‘नीतीश बाबू हमारे नेता रहे हैं, हैं और आगे भी रहेंगे. हम तो उस घर (जेडीयू) में हैं ही.’चार वर्षों के उपरांत मेरी भेंट नीतीश बाबू से हुई, बहुत अच्छा लगा. जिस तरह माहौल के भेंट हुई और अच्छा था. हम तो घर में ही हूं जी. राजनीति में घर किसको कहते हैं? जो आपका बेस होता है. जिस बेस में हम काम किए हैं नीतीश बाबू के साथ रहकर तो बेस तो वही है ना. घर तो अपना है ही. साथ ही हैं मानकर चलिये ना.”- आरसीपी सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री सह पूर्व अध्यक्ष, जनता दल यूनाइटेडआरसीपी सिंह भले ही जेडीयू का अपना ‘घर’ और नीतीश कुमार को अपना ‘लीडर’ बताते हों लेकिन पार्टी का दरवाजा उनके लिए अभी तक खुला नहीं है. केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा सरीखे बड़े नेताओं की रजामंदी भी जरूरी होगी. साथ ही क्या निशांत कुमार के ‘फ्यूचर प्लान’ में वह फीट बैठते हैं? नीतीश कुमार के करीबी संजय गांधी कहते हैं कि फिलहाल उनको लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है. वैसे भी निर्णय तो शीर्ष नेता (नीतीश कुमार) को लेना है.नीतीश कुमार प्रतिदिन सुबह में सभी से मिलते हैं और इस दौरान आरसीपी सिंह से भी मुलाकात हुई है. मैं भी वहां मौजूद था. कोई खास बातचीत नहीं हुई. जैसे सबसे मिलते हैं. इस तरह मुलाकात नेता ने की है. जदयू में वापसी के लिए फैसला तो कमेटी और सर्वमान्यता ही करेंगे. पहले भी कई लोगों की वापसी हुई है. हम लोग तो सर्वमान्य नेता के फैसले का इंतजार करते हैं.”- संजय गांधी,विधान पार्षद, जनता दल यूनाइटेडराजनीतिक विशेषज्ञ अरुण पांडे कहते हैं कि समय बदल चुका है. अब नीतीश कुमार के स्थान पर निशांत आ गए हैं. जेडीयू में आरसीपी सिंह की कोई जरूरत भी नहीं है. आज नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द ललन सिंह, संजय झा, श्रवण कुमार और विजय चौधरी जैसे लोग हैं और इनकी ही चलती है. ऐसे में आरसीपी सिंह की क्या दरकार है?वह आगे कहते हैं कि आरसीपी सिंह जब नीतीश कुमार से मिलने गए थे तो 25 मिनट इंतजार करवाया गया. आरसीपी सिंह की वापसी संभव नहीं है. अगर वापसी होगी तो क्या फिर से उनको अब कोई नेता जेडीयू में पावर सेंटर बनने देगा?

2020 विधानसभा चुनाव में आरसीपी सिंह की अगुवाई में जेडीयू को प्रदर्शन बेहद खराब रहा था.नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को राजनीति में लाया और तमाम पद दिए लेकिन वह उनसे दूर हो गए. अब फिर घर वापसी के लिए उतावले हैं, परेशान है कि कब फिर से नीतीश कुमार के साथ दिखें लेकिन जदयू में वापसी अब संभव दिख नहीं रहा है. एक तो नीतीश कुमार की सेहत और उम्र के कारण अब लोगों को ठीक से पहचानते भी नहीं हैं. इसी कारण तो उन्हें बीजेपी को सत्ता सौंपनी पड़ी. निशांत को लाया गया. जदयू का भविष्य दांव पर है.”राजनीतिक विशेषज्ञ प्रिय रंजन भारती का कहना है कि आरसीपी सिंह के सामने सबसे बड़ी बाधा जेडीयू के 6 बड़े नेता हैं. इनमें केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, नालंदा से आने वाले ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप-मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और मंत्री अशोक चौधरी हैं. जब तक ये लोग हरी झंडी नहीं दिखाएंगे, वापसी संभव नहीं है.यदि ये लोग तैयार हो जाए तो वापसी संभव हो सकती है. फिलहाल नीतीश कुमार फैसला लेने की स्थिति में नहीं हैं. पार्टी में जो भी फैसला होगा, यही लोग लेंगे. आरसीपी के समर्थन में पार्टी के कुछ नेता हो सकते हैं, जिन्हें मंत्रिमंडल में और ना ही संगठन में स्थान मिला है. ऐसे में ये नेता भी चाहते होंगे कि आरसीपी सिंह आ जाए लेकिन सच्चाई यही है कि आरसीपी सिंह की वापसी में सबसे बड़ी बाधा ये बड़े नेता हैं.”केंद्र में मंत्री बनने के बाद आरसीपी सिंह का ललन सिंह के साथ विवाद हुआ था. सब लोग जानते हैं भला ललन सिंह अब क्यों चाहेंगे कि आरसीपी सिंह फिर से वापसी करें. वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में संजय झा आज मजबूत स्थिति में हैं. लिहाजा वह आरसीपी को क्यों आने देंगे? श्रवण कुमार के साथ तो आरसीपी सिंह का शुरू से विवाद रहा है, संजय गांधी, ललन सरार्फ, अशोक चौधरी, नालंदा से आने वाले सांसद और पार्टी में कई नेता आरसीपी सिंह के विरोधी रहे हैं.उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव तो जब आरसीपी सिंह को संगठन में लाया गया, उस समय उन्होंने विरोध किया था. आरसीपी सिंह जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे तो उस समय जेडीयू सबसे खराब दौर से गुजर रहा था. पहली बार जेडीयू 43 सीटों पर सिमट गया था लेकिन अब तो पार्टी के पास 85 विधायक हैं. 12 लोकसभा सांसद और 5 राज्यसभा सांसद हैं. संगठन स्तर पर पार्टी ने एक करोड़ से अधिक का सदस्य बनाया है. ऐसे में आरसीपी सिंह को लाने की कोई वजह भी नहीं दिख रही है.नीतीश कुमार के साथ तीन दशक का संबंध रहा है. उनके परिवार और निशांत के साथ भी नजदीकी संबंध रहा है. आरसीपी सिंह नालंदा से ही आते हैं और कुर्मी समाज से हैं. पार्टी में कई नेता, कई मंत्री और विधायक-सांसद के साथ उनका अच्छा संबंध रहा है. आरसीपी सिंह जेडीयू में फिर से वापसी करते हैं तो नीतीश कुमार के कोर वोटर में एकजुटता बढ़ेगी.आरसीपी सिंह का नीतीश कुमार के परिवार के साथ भी नजदीकी संबंध रहा है. पार्टी के अंदर जो आरसीपी के समर्थक हैं, कह रहे हैं कि यदि निशांत चाहेंगे तो आरसीपी सिंह की वापसी संभव है लेकिन संगठन स्तर पर निशांत अभी कोई फैसला नहीं ले रहे हैं. विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि आरसीपी की वापसी में निशांत की भूमिका अहम होगी लेकिन फिलहाल वह पार्टी के शीर्ष नेताओं से इतर कोई फैसला लेंगे, इसकी भी संभावना कम ही है.
