ईरान-अमेरिका के बीच जल्द लौटेगी शांति,इन 14 महत्वपूर्ण मुद्दों पर बनी सहमति

 ईरान-अमेरिका के बीच जल्द लौटेगी शांति,इन 14 महत्वपूर्ण मुद्दों पर बनी सहमति
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अमेरिका और ईरान के बीच करीब चार महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए एक अहम समझौते पर सहमति बन गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को इसकी पुष्टि की. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरा हो गया है. उन्होंने कहा कि अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया के सभी जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी भी तुरंत हटा ली जाएगी.इस मामले में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई. शहबाज शरीफ ने बताया कि दोनों देशों ने सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई पूरी तरह रोकने पर सहमति जताई है. इसमें लेबनान भी शामिल है, जिसे लेकर पहले काफी मतभेद थे. समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे. समझौते के तहत अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा. साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू होगी. इस हफ्ते दोनों देशों के अधिकारी तकनीकी स्तर की बातचीत भी करेंगे.युद्ध तुरंत और हमेशा के लिए बंद किया जाएगा, इसमें लेबनान का मोर्चा भी शामिल होगा.अमेरिका, ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देगा.अमेरिका अपनी समुद्री नाकेबंदी हटाएगा और 30 दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा.अमेरिकी सेना ईरान के आसपास के इलाकों से हट जाएगी.ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में राहत दी जाएगी और ईरान को अपनी तेल कमाई का पैसा फिर से मिल सकेगा.अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर तक की मदद देंगे.अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच बातचीत चलेगी, जिसमें परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर चर्चा होगी.

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ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत यह वादा करेगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा.बातचीत के दौरान अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा.बातचीत के दौरान अमेरिका ईरान के खिलाफ कोई नई सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा.ईरान की 24 अरब डॉलर की फ्रीज की गई संपत्तियां चरणबद्ध तरीके से वापस की जाएंगी.समझौते का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी के लिए एक व्यवस्था बनाई जाएगी.अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मंजूरी दिलाने की कोशिश होगी.ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और उसके समर्थित प्रॉक्सी संगठनों के मुद्दे इस बातचीत का हिस्सा नहीं होंगे.परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते में कहा गया है कि ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को खत्म किया जाएगा और उसकी निगरानी के लिए सख्त व्यवस्था बनाई जाएगी. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इससे मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक शांति बनाए रखने में मदद मिलेगी. हालांकि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बयान अलग-अलग हैं.अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यूरेनियम को नष्ट किया जाएगा, जबकि ईरान का कहना है कि उसे अपने देश में ही कम संवर्धित रूप में रखने की अनुमति मिलेगी. यह समझौता अभी अंतिम शांति डील भी नहीं है. यह एक प्रारंभिक समझौता (MoU) है, जिसके बाद अगले 60 दिनों तक विस्तृत बातचीत होगी. ईरान के उप-विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने साफ कहा है कि वह पहले देखेगा कि अमेरिका अपने वादों को पूरा करता है या नहीं, उसके बाद ही अंतिम समझौते पर आगे बढ़ेगा.अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि वह स्विट्जरलैंड में होने वाले हस्ताक्षर समारोह में शामिल हो सकते हैं. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि डोनाल्ड ट्रंप भी अंतिम समय में समारोह में पहुंच सकते हैं. हालांकि सुरक्षा कारणों और फ्रांस में होने वाले G7 सम्मेलन के कार्यक्रम की वजह से अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है.अमेरिका की सीक्रेट सर्विस आमतौर पर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को एक साथ विदेश में होने वाले कार्यक्रमों में भेजने से बचती है. ऐसा सुरक्षा कारणों से किया जाता है. इसी वजह से अमेरिका-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर के कार्यक्रम में ट्रंप या जेडी वेंस में से कोई एक ही शामिल हो सकता है, दोनों के एक साथ आने की संभावना कम है.

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