नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ेंगे पीएम मोदी,10 जून को लिखा जाएगा नया इतिहास

 नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ेंगे पीएम मोदी,10 जून को लिखा जाएगा नया इतिहास
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निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी 10 जून को प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का 4,399 का रिकॉर्ड पीछे छोड़ देंगे. कार्यवाहक प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा को सम्मिलित करने पर नरेंद्र मोदी देश के पंद्रहवें प्रधानमंत्री हैं. इस बीच कुछ प्रधानमंत्रियों को लंबे समय तक देश के सबसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ तो कुछ के कार्यकाल अति संक्षिप्त थे.इनमें चौधरी चरण सिंह अकेले थे, जिन्हें प्रधानमंत्री के रूप में संसद का एक दिन भी सामना करने का मौका नहीं मिला. पढ़िए आजादी के बाद से वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी तक के कार्यकाल के प्रधानमंत्रियों की कहानी.15 अगस्त 1947 को देश की स्वतंत्रता के पूर्व 2 सितंबर 1946 से पंडित जवाहर लाल नेहरू अंतरिम सरकार की अगुवाई कर रहे थे. इस सरकार में वायसराय की कार्यकारी परिषद के उपाध्यक्ष के तौर पर नेहरू का पद प्रधानमंत्री के समकक्ष था. आजादी मिलने के बाद संविधान सभा को अंतरिम लोकसभा के रूप में स्वीकार किया गया और पंडित नेहरू का कार्यकाल आगे प्रधानमंत्री के रूप में जारी रहा. 1951-52 और फिर 1957 और 1962 के तीसरे लोकसभा चुनावों में लगातार कांग्रेस ने पंडित नेहरू के नेतृत्व में जीत का सिलसिला जारी रखा.केंद्र की इन सरकारों की अगुवाई भी पंडित नेहरू अपने निधन 27 मई 1964 तक करते रहे. प्रथम आम चुनावों से निधन तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में पंडित नेहरू का 4,398 दिनों का कार्यकाल रहा. हालांकि अगर इसमें स्वतंत्रता की 15 अगस्त 1947 से प्रथम आम चुनाव के बीच की अवधि का समय जोड़ दिया जाए तो उन्हें प्रधानमंत्री पद को 6,130 दिन सुशोभित करने का अवसर प्राप्त हुआ.निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में पंडित नेहरू का 4,398 दिनों का कार्यकाल रहा.पंडित नेहरू के निधन के बाद 27 मई 1964 से 9 जून 1964 की 13 दिन की अवधि में कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में गुलजारी लाल नंदा ने कार्य किया. अगले प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 9 जून 1964 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. प्रधानमंत्री के रूप में उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को किसी चुनाव का सामना करने का अवसर नहीं मिला. लेकिन 1965 के पाकिस्तान युद्ध में भारत की जीत ने शास्त्री जी के कार्यकाल को यादगार बना दिया.इस युद्ध के बाद सोवियत संघ की मध्यस्थता में ताशकंद में पाकिस्तान से समझौता वार्ता हुई. समझौते की रात 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में शास्त्री जी का दुखद निधन हो गया. प्रधानमंत्री के रूप में उनका 581 दिन का कार्यकाल था. इसके बाद गुलजारी लाल नंदा ने एक बार फिर कार्यवाहक प्रधानमंत्री की शपथ ली. दूसरी बार भी 11 जनवरी 1966 से 24 जनवरी 1966 के बीच उन्हें 13 दिन का कार्यकाल मिला.अगली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चार कार्यकाल प्राप्त हुए. लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद कांग्रेस संसदीय पार्टी में नेता पद के चुनाव में मोरारजी देसाई को पराजित कर पहली बार 24 जनवरी 1966 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. 1967 के चौथे आम चुनाव और 1971 के मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस की जीत के साथ 24 मार्च 1977 तक इंदिरा प्रधानमंत्री पद पर आसीन रहीं.इमरजेंसी के दौरान लोकसभा के कार्यकाल के एक साल के विस्तार ने इंदिरा को पहले चरण में 4,077 दिन प्रधानमंत्री के रूप में देश के नेतृत्व का अवसर प्राप्त हुआ. 1977 के चुनाव में कांग्रेस पराजित हुई. इंदिरा गांधी भी अपनी रायबरेली सीट पर हार गईं. जनता पार्टी की अगली सरकार की अगुवाई मोरारजी देसाई ने की. देसाई का कार्यकाल 24 मार्च 1977 से 28 जुलाई 1979 के मध्य 856 दिन का रहा.जनता पार्टी की टूट और लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए मोरारजी सरकार के पतन के बाद कांग्रेस के समर्थन से चौधरी चरण सिंह अगले प्रधानमंत्री बने. 28 जुलाई 1979 को उन्होंने पद की शपथ ली. वे संसद का सामना कर सकें, इसके पहले 20 अगस्त 1979 को कांग्रेस ने उनकी सरकार को समर्थन वापस ले लिया. चौधरी चरण सिंह ने उसी दिन राष्ट्रपति को इस्तीफा सौंप दिया. चूंकि छठवीं लोकसभा में कोई अगली सरकार नहीं बन सकी, इसलिए लोकसभा भंग कर नए चुनावों की घोषणा हुई.कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर चौधरी चरण सिंह का 14 जनवरी 1980 तक कार्यकाल जारी रहा. इस प्रकार कुल 170 दिन तक उन्हें इस पद पर बने रहने का अवसर मिल गया.1980 के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई में कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में वापस हुई. 14 जनवरी 1980 को इंदिरा ने चौथी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. 31 अक्टूबर 1984 को उनके दो सुरक्षा सैनिकों ने उनकी हत्या कर दी. इस बार उनका 1,752 दिन का प्रधानमंत्री पद का कार्यकाल था.

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पूर्व कार्यकाल के 4,077 दिन सम्मिलित करने पर कुल 5,829 दिन उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में देश को नेतृत्व प्रदान किया.इंदिरा की दुखद हत्या के दिन 31 अक्टूबर 1984 को अगले प्रधानमंत्री के रूप में राजीव गांधी ने शपथ ली. समय से पूर्व 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जबरदस्त जीत दर्ज की. एक बार फिर राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. लेकिन 1989 के चुनाव में कांग्रेस की पराजय के साथ 2 दिसंबर 1989 को उनका इस्तीफा हो गया. प्रधानमंत्री पद पर राजीव गांधी 1,858 दिन रहे.1989 से गठबंधन सरकारों का दौर शुरू हुआ. अगले पच्चीस वर्षों यह सिलसिला चला. भाजपा और वामपंथियों के समर्थन से बने जनता दल के विश्वनाथ प्रताप सिंह ने 2 दिसंबर 1989 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. राम रथ लेकर सोमनाथ से अयोध्या की यात्रा पर निकले लाल कृष्ण आडवाणी की समस्तीपुर में बिहार के मुख्यमंत्री लालू यादव द्वारा गिरफ्तारी के बाद भाजपा ने केंद्र सरकार से समर्थन वापस ले लिया.अल्पमत में होने के बाद भी विश्वनाथ प्रताप सिंह ने लोकसभा में विश्वास मत प्राप्त करने का असफल प्रयास किया. अंततोगत्वा 10 नवंबर 1990 को उनका इस्तीफा हुआ. उनका प्रधानमंत्री का कार्यकाल 343 दिन का था. चरण सिंह की तर्ज पर कांग्रेस ने जनता दल के टूटे धड़े की चंद्रशेखर सरकार को समर्थन दिया और फिर जल्दी ही राजीव गांधी के घर की जासूसी केआरोप में समर्थन वापस लेकर अगले चुनाव का रास्ता खोल दिया. चंद्रशेखर ने 10 नवंबर 1990 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. कांग्रेस ने 5 मार्च 1991 को समर्थन वापस लिया. अगले दिन 6 मार्च को चंद्रशेखर ने इस्तीफा दे दिया. 13 मार्च को लोकसभा भंग होने के कारण अगले चुनाव की घोषणा हुई. कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर 21 जून 1991 तक कुल 223 दिन प्रधानमंत्री पद पर चंद्रशेखर बने रहे.1991 के लोकसभा चुनाव में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं प्राप्त हुआ. फिर भी अन्य दलों के सहयोग से कांग्रेस के पी.वी नरसिंह राव कार्यकाल पूरा करने में सफल रहे. 21 जून 1991 से 16 मई 1996 तक कुल 1,791 दिन राव देश के प्रधानमंत्री रहे. 1996 के लोकसभा चुनाव नतीजों ने स्थिति और विषम कर दी. सबसे बड़े दल के नेता के रूप में राष्ट्रपति डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा ने अटल बिहारी वाजपेयी को 16 मई 1996 को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई. उनकी सरकार लोकसभा में बहुमत सिद्ध करने में विफल रही.16 दिन के भीतर 1 जून 1996 को उनका इस्तीफा हो गया. कांग्रेस के समर्थन पर टिके एच. डी.देवेगौड़ा 1 जून 1996 से 21 अप्रैल 1997 तक 324 दिन और आई.के.गुजराल 21 अप्रैल 1997 से 19 मार्च 1998 तक कुल 332 दिन प्रधानमंत्री रहे.1998 के चुनाव में एक बार फिर गठबंधन सरकार बनी. अटल बिहारी वाजपेयी ने 19 मार्च 1998 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. ए.आई.डी.एम.के. समर्थन वापस लेने के कारण अटल जी 17 अप्रैल 1999 को मात्र एक वोट के फासले से विश्वास मत प्राप्त करने में विफल रहे. लोकसभा भंग की गई. 1999 में फिर चुनाव हुए. इस बार 13 अक्टूबर 1999 अर्थात 573 दिन का अटल जी का कार्यकाल रहा.1999 से 2009 के बीच के तीन लोकसभा चुनावों में गठबंधन सरकारों का सिलसिला चलता रहा. हालांकि ये सरकारें अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल रहीं. 13 अक्टूबर 1999 को अटल जी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री की शपथ ली. समय से कुछ पहले 2004 में कराए गए चुनाव में सत्ता वापसी में वे विफल रहे. 22 मई 2004 तक वे प्रधानमंत्री रहे. इस बार उनका 1,683 दिन का कार्यकाल था.कांग्रेस की अगुवाई वाली यू.पी.ए. की 2004 और 2009 की दो सरकारों में डॉक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री रहे. 22 मई 2004 से 26 मई 2014 के मध्य 3,656 दिन प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने देश का नेतृत्व किया. नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री के रूप में 26 मई 2014 को यात्रा प्रारंभ हुई. 2019 और 2024 के चुनावों में सफलता के बाद प्रधानमंत्री के रूप में उनका तीसरा कार्यकाल चल रहा है. 10 जून 2026 को वे प्रधानमंत्री पद पर 4,399 दिन पूरे कर पंडित नेहरू के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,398 दिनों के कार्यकाल से आगे निकल जायेंगे.

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