रूस-चीन के चक्रव्यूह में फंस गए ट्रंप,अब ईरान को झुकाना हुआ मुश्किल

 रूस-चीन के चक्रव्यूह में फंस गए ट्रंप,अब ईरान को झुकाना हुआ मुश्किल
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ईरान पर बड़ा हमला करने वाले थे, लेकिन आखिरी समय में उन्हें अपने कदम पीछे खींचने पड़े. ट्रंप ने खुद इसकी वजह सऊदी अरब, कतर और UAE को बताया. लेकिन रिपोर्ट्स और रक्षा जानकारों का कुछ और ही मानना है. दरअसल, रूस और चीन ने मिलकर ईरान के लिए ऐसा ‘चक्रव्यूह’ तैयार कर दिया है, जिसे भेद पाना अमेरिका के लिए मुश्किल हो गया है. आइए जानते हैं पूरी कहानी क्या है.8 अप्रैल 2026 को ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम हुआ था. तब से लेकर अब तक ट्रंप 26 बार ईरान पर हमला करने की बात कह चुके हैं. हैरानी की बात यह है कि हर बार उन्होंने अपनी बात से पलटी मारी है. यह सिर्फ संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी रणनीतिक वजह है.अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बयान में कहा, “हम लोग ईरान पर बड़ा हमला करने जा रहे थे, लेकिन सऊदी अरब, कतर और UAE ने ऐसा करने से हमें रोक दिया. इन देशों ने दो-तीन दिन हमले न करने को कहा, क्योंकि उनका मानना है कि वे समझौते के बेहद करीब हैं और किसी भी वक्त ईरान से समझौता करवा सकते हैं.”लेकिन असली वजह कुछ और ही लग रही है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रंप जो कह रहे हैं, वह सिर्फ आधी सच्चाई है. असली वजह रूस और चीन की मदद से ईरान की बढ़ी हुई ताकत है. ईरान अब इतना बलवान हो चुका है कि अमेरिकी हमले का अंदाजा पहले ही लगा सकता है और उसका जवाब देने की क्षमता रखता है.रूस ने ईरान को अमेरिकी सेना के बारे में ऐसी खुफिया जानकारी दी है, जिसने पूरा खेल बदल दिया. रूस की मदद से ईरान ने यह खास बातें जान ली हैं-अमेरिकी फाइटर जेट और बॉम्बर के उड़ान भरने के पैटर्न।पायलटों का व्यवहार।हवा में रिफ्यूलिंग का समय।इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग का तरीका।यही वजह है कि अब ईरान आसानी से अमेरिकी हमले का अंदाजा लगा सकता है.जहां रूस ने इंटेलिजेंस दी, वहीं चीन ने ईरान की हवाई सुरक्षा को मजबूत किया. चीन की मदद से ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को अपग्रेड कर लिया है. अब ईरान अमेरिकी मिसाइलों को रोकने में सक्षम है. साथ ही अमेरिकी फाइटर जेट को गिराने की तकनीक भी उसके पास है और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के लिए पूरी तरह तैयार है. रिपोर्ट के मुताबिक युद्धविराम के दौरान ईरान ने अपने हवाई सुरक्षा नेटवर्क को पूरी तरह से नए सिरे से तैयार किया है.सबसे अहम मोड़ तब आया, जब हमले से ठीक पहले पेंटागन ने व्हाइट हाउस को चेतावनी दी. ईरानी न्यूज एजेंसी तंसीम न्यूज ने रिपोर्ट किया कि पेंटागन ने व्हाइट हाउस से साफ कहा कि ईरान ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों का पता लगाने की क्षमता विकसित कर ली है. अमेरिकी फाइटर जेट को गिराने की तकनीक भी तैयार है, अगर हमला किया गया, तो ईरान कई अमेरिकी विमानों को तबाह कर सकता है.

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इस चेतावनी के बाद ही ट्रंप ने हमले रोकने का आदेश दे दिया.युद्धविराम के दौरान ईरान ने अपनी स्थिति को लेकर कोई संदेह नहीं छोड़ा है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा, “अमेरिका को हमारी शर्तों को मानना होगा, वरना उसे हमारी बैलिस्टिक मिसाइलों के सामने सरेंडर करना पड़ेगा.” वहीं ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी साफ कहा है कि ईरान अमेरिका के सामने सरेंडर नहीं करेगा.ट्रंप ने अपने बयान में ये भी कहा कि अगर डील नहीं हुई, तो हम हमले के लिए तैयार हैं. क्योंकि हमारे पास अब दूसरा कोई रास्ता नहीं है. हम ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दे सकते. हालांकि, अब तक के घटनाक्रम को देखते हुए यह साफ है कि रूस और चीन की संयुक्त रणनीति ने ट्रंप की आक्रमण नीति को हैक कर दिया है.कहा जा रहा है कि रूस की इंटेलिजेंस और चीन के एयर डिफेंस ने मिलकर ईरान को एक ऐसा सुरक्षा कवच दे दिया है, जिसे भेदना अमेरिका के लिए आसान नहीं है, यही वह ‘चक्रव्यूह’ है, जिसकी वजह से ट्रंप को बार-बार अपने कदम पीछे खींचने पड़ रहे हैं. आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि क्या ईरान और अमेरिका के बीच कोई समझौता हो पाता है या ट्रंप एक बार फिर हमले की कोशिश करते हैं।

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