NEET मामले में आखिर कौन है जिम्मेदार?छात्रों के सपनों से ऐसे हीं होते रहेगा खिलवाड़
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला देश के सबसे बड़े एग्जाम घोटालों में गिना जा रहा है. इस मामले में अब तक कई राज्यों से जुड़े किरदार सामने आए हैं. एक केमिस्ट्री प्रोफेसर, कोचिंग संचालक, छात्र, बिचौलिए और एक संगठित नेटवर्क. ‘गेस पेपर’ के नाम पर असली प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाजार में बेचा गया और लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हुआ.इस पूरे मामले का सबसे बड़ा किरदार पी.वी. कुलकर्णी सामने आया है, जिसे CBI ने गिरफ्तार किया. वह पुणे का केमिस्ट्री लेक्चरर है और NTA की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था, जिससे उसे प्रश्नपत्र तक पहुंच मिली. जांच में खुलासा हुआ कि कुलकर्णी अपने घर पर छात्रों को बुलाकर ‘स्पेशल क्लास’ चलाता था, जहां वह सवाल, उनके विकल्प और सही उत्तर डिक्टेट करता था. बाद में जब छात्रों की कॉपियों का मिलान 3 मई 2026 के असली NEET पेपर से किया गया, तो सवाल हूबहू मिले. इससे साफ हुआ कि पेपर लीक का स्रोत सीधे सिस्टम के अंदर से था।राजस्थान के बिवाल परिवार को इस नेटवर्क की मुख्य कड़ी माना जा रहा है. दिनेश बिवाल, मांगीलाल बिवाल और विकास बिवाल को CBI ने गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया कि इन्होंने पेपर खरीदकर सीकर के कोचिंग नेटवर्क में फैलाया. सूत्रों के मुताबिक पेपर करीब 15 लाख रुपये में खरीदा गया और फिर छात्रों को 3 से 5 लाख रुपये में बेचा गया. परिवार के कई सदस्य पहले भी मेडिकल एंट्रेंस से जुड़े रहे हैं, जिससे इनके नेटवर्क पर शक और गहरा हुआ है.राजस्थान का सीकर इस पूरे घोटाले का बड़ा वितरण केंद्र बनकर उभरा. यहां आरके कंसल्टेंसी चलाने वाले राकेश कुमार मंडावरिया पर आरोप है कि उसने बिवाल परिवार से पेपर खरीदकर छात्रों और कोचिंग संस्थानों को बेचा. उसका दफ्तर अचानक बंद मिला और बाद में उसे उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया. जांच एजेंसियों ने उसके कार्यालय से कंप्यूटर, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है.सत्यनारायण चौधरी, जिन्हें सीकर में ‘भाई सर’ के नाम से जाना जाता है, इस मामले का एक और अहम लेकिन रहस्यमयी चेहरा हैं. उनका ‘दीप करियर इंस्टीट्यूट’ नाम का कोचिंग संस्थान था, जिसके पोस्टरों में बिवाल परिवार की छात्राओं की तस्वीरें मिलीं. यह संयोग नहीं माना जा रहा. स्थानीय स्तर पर यह भी सामने आया कि वह ‘मास्टर स्ट्रोक’ नाम से गेस पेपर तैयार करते थे, जिनके सवाल कई बार असली परीक्षा से मिलते थे. SOG द्वारा पूछताछ के बाद से वह सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं.जांच में गुरुग्राम के डॉ. यश यादव का नाम भी सामने आया है, जो BAMS के छात्र हैं. एजेंसियों को शक है कि बिवाल परिवार ने सबसे पहले उनसे ही पेपर हासिल किया था. ऐसे में यश यादव को इस पूरे रैकेट में सोर्स लिंक माना जा रहा है, जहां से पेपर बाहर निकला और आगे नेटवर्क में फैला.महाराष्ट्र में भी इस नेटवर्क की गहरी पैठ मिली है. डॉ. शुभम खैरनार, डॉ. धनंजय लोखंडे और मनीषा वाघमारे जैसे नाम सामने आए हैं.

आरोप है कि इन लोगों ने पेपर खरीदकर ऊंचे दामों पर बेचा और छात्रों को स्पेशल क्लास के जरिए जोड़ा. इस पूरे नेटवर्क में मोटी रकम के लेन-देन के प्रमाण भी जांच एजेंसियों को मिले हैं.पेपर लीक का तरीका बेहद सुनियोजित था. 30 अप्रैल से 2 मई के बीच इसे ‘गेस पेपर’ बताकर व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए फैलाया गया. शुरुआत में इसे कुछ छात्रों ने 15 हजार रुपये में बेचा, जबकि बाद में बड़े स्तर पर लाखों में डील हुई. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि 180 में से करीब 135 सवाल असली पेपर से हूबहू मिले, जिसमें बायोलॉजी और केमिस्ट्री के पूरे सेक्शन शामिल थे. इससे यह साबित होता है कि यह महज गेस पेपर नहीं बल्कि लीक पेपर ही था।जांच में सामने आया है कि इस रैकेट के जरिए भारी पैसे की उगाही की गई. कुछ छात्रों से 10 लाख से 50 लाख रुपये तक वसूले गए, जबकि छोटे स्तर पर इसे सस्ते ‘गेस पेपर’ के रूप में भी बेचा गया. अलग-अलग स्तर पर बिचौलिये जुड़े थे, जो छात्रों तक पहुंच बनाकर इस नेटवर्क को विस्तार दे रहे थे.इस पूरे घोटाले का खुलासा एक व्हिसलब्लोअर के जरिए हुआ. एक छात्र ने पेपर अपने केरल में पढ़ रहे दोस्त को भेजा, जिसने इसे अपने पिता को फॉरवर्ड किया. पिता सीकर में पीजी हॉस्टल चलाते हैं और उन्होंने ही इस पूरे मामले की जानकारी आगे पहुंचाई. इसके बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं और मामला खुलता चला गया।NEET 2026 पेपर लीक एक साधारण लीक नहीं बल्कि एक बड़े संगठित सिंडिकेट का हिस्सा है, जिसमें सिस्टम के अंदर बैठे लोग, कोचिंग नेटवर्क और बिचौलिए शामिल थे. इस घोटाले ने 22 लाख छात्रों के भरोसे को झटका दिया है और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आने वाले दिनों में जांच और भी बड़े खुलासे कर सकती है।
