ईरान को सबक सिखाने की तैयारी में जुटा अमेरिका!जल्द देगा बड़ा झटका

 ईरान को सबक सिखाने की तैयारी में जुटा अमेरिका!जल्द देगा बड़ा झटका
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ईरान के साथ जारी टकराव के बीच हालात अब एक नए मोड़ पर पहुंचते दिख रहे हैं. करीब दो महीने से जारी इस जंग की रफ्तार भले ही कुछ धीमी पड़ी हो, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ है. इसकी सबसे बड़ी वजह बना है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां ईरान की नाकेबंदी ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को झटका दिया है. दुनिया के तेल और गैस की सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है और इसके प्रभावित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर साफ दिखाई दे रहा है.इसी दबाव के बीच अब अमेरिका सीधे सैन्य टकराव के बजाय एक नई रणनीति पर काम करता नजर आ रहा है. वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ‘मैरीटाइम फ्रीडम कंस्ट्रक्ट’ यानी समुद्री स्वतंत्रता संरचना नाम का एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की तैयारी में है. इस पहल का मकसद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को फिर से सामान्य करना और ईरान के दबाव को कम करना है. अमेरिका ने दुनिया के कई देशों से इसमें शामिल होने की अपील की है और साफ किया है कि सामूहिक प्रयास से ही समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है.यह प्रस्ताव सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर भी अहम माना जा रहा है. इस पूरी पहल को अमेरिकी विदेश विभाग और अमेरिकी सेंट्रल कमान मिलकर आगे बढ़ाएंगे. जहां एक तरफ विदेश विभाग साझेदार देशों और शिपिंग कंपनियों के बीच समन्वय करेगा, वहीं सेंटकॉम समुद्री गतिविधियों पर नजर रखेगा और जहाजों के साथ सीधे संपर्क में रहेगा. अमेरिका इसे मध्य पूर्व में भविष्य की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था की नींव के तौर पर देख रहा है.दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज के रास्ते पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी, जिसके बाद यहां से गुजरने वाला शिपिंग ट्रैफिक लगभग ठप हो गया. यही वजह है कि अब अमेरिका अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाकर ईरान को घेरने की कोशिश कर रहा है.दूसरी तरफ ईरान भी कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रिय हो गया है.

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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तुर्की, कतर, सऊदी अरब, मिस्र, इराक और अज़रबैजान के विदेश मंत्रियों से बातचीत कर अपनी रणनीति साफ की है. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इस्ना की रिपोर्ट के मुताबिक, अराघची ने इन बातचीतों में अमेरिका और इजरायल को क्षेत्र में अस्थिरता का कारण बताया और कहा कि ईरान शांति चाहता है, लेकिन दबाव में कोई समझौता नहीं करेगा।कुल मिलाकर ईरान और अमेरिका के बीच जंग भले ही फिलहाल धीमी पड़ गई हो, लेकिन टकराव खत्म नहीं हुआ है. एक ओर अमेरिका नए गठबंधन के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर ईरान क्षेत्रीय समर्थन और कूटनीति के जरिए जवाबी रणनीति तैयार कर रहा है.ऐसे में होर्मुज का यह संघर्ष अब सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और रणनीति की जंग बन चुका है, जिसके असर पूरी दुनिया पर पड़ सकते हैं।

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