चैत्र नवरात्र के पहला दिन आज होगी मां शैलपुत्री की पूजा,पढ़िए मंत्र और आरती
आज चैत्र नवरात्र का पहला दिन है. नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है. शास्त्रों के अनुसार, माता शैलपुत्री पूर्वजन्म में सती थीं, जिन्होंने अपने पति भगवान शिव का अपमान होने पर अपने शरीर की आहुति दे दी थी. मां शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत शांत और करुणामयी है. मां अपने एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल धारण करती हैं. देवी नंदी बैल पर सवार रहती हैं. इसलिए इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है.नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र को लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करें. देवी को सफेद रंग की वस्तुएं बहुत प्रिय हैं. इसलिए उन्हें सफेद वस्त्र. सफेद फूल और सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाया जाता है. आप देवी को नारियल, दूध या दूध से बनी चीजें, गाय के शुद्ध घी से बनी चीजों का भोग भी लगा सकते हैं. मान्यता है कि मां शैलपुत्री की आराधना से कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है.नवरात्र के पहले दिन यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना की जाती है. इसके बाद ही देवी की पूजा आरंभ होती है. इस साल घटस्थापना का पहला मुहूर्त 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. फिर दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना की जा सकेगी।मां शैलपुत्री की आराधना का मंत्र:
नवरात्रि के पहले दिन मंत्र का जाप करने से मां शैलपुत्री की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः।’
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

मां शैलपुत्री की आरती:
शैलपुत्री मां बैल असवार।
करें देवता जय जयकार।।
शिव शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने ना जानी।।
पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
दया करे धनवान करे तू।।
सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी।।
उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुख तकलीफ मिला दो।।
घी का सुंदर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के।।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।
प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।।
जय गिरिराज किशोरी अंबे।
शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।।
मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।।
मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा:
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार प्रजापति ने यज्ञ किया तो इसमें सारे देवताओं को निमंत्रण मिला लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया गया. तब भगवान शिव ने मां सती से कहा कि यज्ञ में सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया है लेकिन मुझे नहीं, ऐसे में मेरा वहां पर जाना सही नहीं है. माता सती का प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकर ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी. सती जब घर पहुंची तो उन्हें केवल अपनी मां से ही स्नेह मिला. उनकी बहनें व्यंग्य और उपहास करने लगीं जिसमें भगवान शंकर के प्रति तिरस्कार का भाव था. दक्ष ने भी उन्हें अपमानजनक शब्द कहे जिससे मां सती बहुत क्रोधित हो गईं. अपने पति का अपमान वह सहन नहीं कर पाईं और योगाग्नि में जलकर खुद को भस्म कर लिया. इस दुख से व्यथित होकर भगवान शंकर ने यज्ञ का विध्वंस कर दिया.मां सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय के यहां पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं. इन्हें पार्वती और हेमवती के नाम से भी जाना जाता है. मां शैलपुत्री का विवाह भगवान शंकर के साथ हुआ और वो भगवान शिव की अर्धांगिनी बनीं इसलिए नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है और उन्हें घी का भोग लगाया जाता है।
स्तोत्र पाठ करने से मिलेगा सौभाग्य का वरदान:
प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्।
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्।
सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन।
मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
