ईरान के आगे अमेरिका का हुआ नुकसान,जानिए आखिर कैसे?

 ईरान के आगे अमेरिका का हुआ नुकसान,जानिए आखिर कैसे?
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को 11 दिन हो चुके हैं. युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि इस अभियान का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना है. लेकिन अब तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है कि ईरान के सभी परमाणु ठिकाने पूरी तरह नष्ट कर दिए गए हैं. इसके अलावा अमेरिका अभी तक ईरान में सत्ता परिवर्तन कराने में भी सफल नहीं हो पाया है.जंग के दौरान एक बड़ा राजनीतिक बदलाव भी हुआ. ट्रंप की इच्छा के विपरीत मोज्तबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया गया. इसके बावजूद ईरान ने वेनेजुएला की तरह आत्मसमर्पण नहीं किया और युद्ध में डटा रहा. ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को भी बंद कर दिया, जिससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हुई और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया. अमेरिका अब तक इस अहम समुद्री मार्ग को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर पाया है.पश्चिमी एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान लगातार हमले कर रहा है. हालात ऐसे बने कि अमेरिका को सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन के कुछ सैन्य अड्डे खाली करने पड़े. ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से इजराइल को भी भारी नुकसान हुआ है. खासकर तेल अवीव में कई जगहों पर बड़ी तबाही की खबरें सामने आई हैं. वहीं अरब देशों के कई नेता भी अब युद्ध रोकने के लिए अमेरिका पर दबाव बना रहे हैं.हालांकि इस युद्ध में ईरान को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा है।

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इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई सैन्य ठिकाने नष्ट हो गए हैं और ईरान की मिसाइल क्षमता भी कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है. सबसे बड़ा झटका यह रहा कि युद्ध के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत हो गई. इसके बावजूद ईरान ने तेजी से जवाबी कार्रवाई की और कई अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. ईरान के हमलों से अमेरिका को अब तक लगभग 23,188 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है.कतर के अल-उदीद एयरबेस पर रडार सिस्टम नष्ट हो गया, जिससे करीब 10,114 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात में तैनात THAAD डिफेंस सिस्टम को भी भारी क्षति पहुंची, जिसकी कीमत लगभग 9 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है. कुवैत में तीन F-15E फाइटर जेट नष्ट हुए, जिनका नुकसान करीब 2,593 करोड़ रुपये आंका गया है. इसके अलावा ईरान ने तीन MQ-9 रीपर ड्रोन गिराने का भी दावा किया है, जिनकी कीमत करीब 827 करोड़ रुपये बताई जा रही है. यानी यह युद्ध दोनों देशों के लिए भारी साबित हो रहा है, जिसमें नुकसान दोनों पक्षों को उठाना पड़ रहा है।

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