मधेश आंदोलन ने बदल दी नेपाल की राजनीति,मधेशियों का अब चलेगा वर्चस्प
नेपाल में हुए आम चुनाव की मतगणना का काम तेजी से चल रहा है. अब तक रुझानों के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी बहुमत के आंकड़ों को छू लेगी. क्योंकि बाकी दलों की हालत बहुत पतली है. इससे उम्मीद है कि पहली बार एक युवा बालेन शाह प्रधानमंत्री बन सकते हैं. उनके सामने दूर-दूर तक कोई नहीं है. नेपाल के लिए यह पहला मौका होगा जब कोई युवा प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचेगा. पहली बार कोई मधेशी नेपाल का पीएम बन सकता है.नेपाल का लोकतंत्र अभी कम उम्र का है, ऐसे में नए पीएम के रूप में बालेन शाह के सामने भी अनेक चुनौतियां होंगी. क्योंकि जिस जेन-जी के सहारे काठमांडु के मेयर के रूप में बालेन शाह नेपाल की राजनीति में अचानक सामने आए हैं, वह काबिल-ए-तारीफ तो है लेकिन यही बिन्दु चुनौतियां लेकर भी उनके सामने खड़ा होगा.बालेन शाह का नाम पीएम के दावेदार के रूप में सामने आने के बाद से मधेशी शब्द अचानक चर्चा में आ गया है. आइए, जानते हैं कि कौन होते हैं मधेशी, इसी समुदाय से आते हैं बालेन शाह.नेपाल की राजनीति और सामाजिक संरचना में ‘मधेशी’ शब्द एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहचान है. हाल के वर्षों में काठमांडू के मेयर बालेन शाह की बढ़ती लोकप्रियता और उनके भविष्य में प्रधानमंत्री बनने की चर्चाओं ने इस विमर्श को एक नया मोड़ दे दिया है. नेपाल की भौगोलिक बनावट को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बांटा गया है. हिमालय, पहाड़ और तराई. तराई का वह क्षेत्र जो भारत की सीमा से सटा हुआ है, उसे ‘मधेश’ कहा जाता है और यहां रहने वाले लोगों को ‘मधेशी’ कहा जाता है।

मतलब यह हुआ कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि की सीमा से सटे हुए नेपाली इलाके को मधेश कहा जाता है.मधेशी शब्द की उत्पत्ति मध्य देश से मानी जाती है. यह एक भाषाई, सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान है. मधेशी समुदाय में विभिन्न जातियां और धर्म शामिल हैं, जिनमें कुर्मी,कुशवाहा जिसे शाक्य और कोइरी के नाम से जाना जाता है।साथ हीं यादव, मुस्लिम, ब्राह्मण,दलित,वैश्य वर्ग और अन्य शामिल हैं. इनकी भाषाएं मुख्य रूप से मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका, अवधी और उर्दू हैं. ऐतिहासिक रूप से मधेशी समुदाय का भारत के साथ गहरा सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध है. इस समुदाय के साथ भारत का रोटी-बेटी का रिश्ता भी है. इसी कारण से, नेपाल के पहाड़ी शासक वर्ग ने लंबे समय तक मधेशियों को पूर्ण नेपाली मानने में संशय दिखाया, जिससे इस समुदाय में उपेक्षा और अलगाव की भावना पैदा हुई.साल 2006-2007 और उसके बाद 2015 में हुए मधेश आंदोलनों ने नेपाल की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया. ये आंदोलन नागरिकता के नियमों में सरलता, सरकारी सेवाओं और सेना में आनुपातिक प्रतिनिधित्व और संघीय संरचना में मधेश को एक सशक्त प्रांत के रूप में पहचान आदि पर केंद्रित थे. इन संघर्षों के परिणामस्वरूप नेपाल एक धर्मनिरपेक्ष और संघीय गणराज्य बना, लेकिन मधेशियों का एक बड़ा वर्ग आज भी महसूस करता है कि संविधान में उन्हें वे अधिकार नहीं मिले जिनके वे हकदार हैं.बालेन्द्र शाह, जिन्हें बालेन शाह के नाम से जाना जाता है, पेशे से एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर और मशहूर रैपर हैं. साल 2022 के स्थानीय चुनावों में काठमांडू महानगरपालिका के मेयर के रूप में उनकी जीत ने पूरे नेपाल को चौंका दिया. उन्होंने स्थापित राजनीतिक दलों एमाले, कांग्रेस, माओवादी के उम्मीदवारों को हराकर यह साबित कर दिया कि नेपाली जनता अब पारंपरिक राजनीति से ऊब चुकी है. बालेन शाह की जड़ें मधेश इलाके के महत्तरी जिला से जुड़ी हैं, लेकिन उनकी परवरिश और शिक्षा काठमांडू में हुई है. यही कारण है कि वे एक ऐसी हाइब्रिड पहचान का प्रतिनिधित्व करते हैं जो पहाड़ और मधेश के बीच की खाई को पाट सकती है.नेपाल में अब तक जितने भी प्रधानमंत्री हुए हैं, वे मुख्य रूप से पहाड़ी मूल के रहे हैं. मधेशी मूल के नेताओं ने उप-प्रधानमंत्री या महत्वपूर्ण मंत्रालयों तक तो पहुंच बनाई, लेकिन पीएम की कुर्सी तक पहुंचना उनके लिए हमेशा एक चुनौती रहा है. भले ही बालेन शाह की जड़ें मधेश एरिया से जुड़ी हैं लेकिन वे केवल मधेशियों के नेता नहीं हैं. उनकी अपील नेपाल के शहरी युवाओं, तकनीक-प्रेमी पीढ़ी और उन लोगों के बीच है जो भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन चाहते हैं. बालेन शाह राष्ट्रवाद के नए चेहरे के रूप में सामने हैं. युवा नेपाल उन्हें प्यार करता है. चुनाव कैम्पेन में बालेन ने अक्सर नेपाली राष्ट्रवाद को प्रमुखता से उठाया है. उन्होंने काठमांडू में अतिक्रमण हटाने और सांस्कृतिक विरासत को बचाने के जो कदम उठाए, उसने उन्हें एक मजबूत नेता की छवि दी है. यह छवि उन्हें केवल एक क्षेत्रीय नेता तक सीमित नहीं रखती. यदि बालेन शाह पीएम बनते हैं तो वे पहले ऐसे नेता हो सकते हैं जिन्हें तराई के लोग अपना मानेंगे क्योंकि उनका मूल वहां है और पहाड़ के लोग उन्हें आधुनिक और विकासवादी मानकर स्वीकार करेंगे.अभी जो सूरत बनती हुई दिखाई दे रही है, उसमें बालेन शाह को प्रधानमंत्री की कुर्सी आसानी से मिलती हुई दिखाई दे रही है. लेकिन चुनौतियाँ इसके आगे शुरू होती हैं. नेपाल की भू-राजनीति और आंतरिक जातीय समीकरण अत्यंत जटिल हैं. हालाँकि, जिस राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के कैंडीडेट के रूप में वे जीते हैं, वह बहुमत की ओर तेजी से बढ़ रही है. पर, सबकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं. मधेशी पहचान को लेकर पहाड़ी समुदाय में जो पूर्वाग्रह हैं, उन्हें पूरी तरह खत्म करना एक बड़ी चुनौती होगी. मधेश के पारंपरिक दल बालेन को अपने वोट बैंक के लिए खतरे के रूप में देख सकते हैं. यद्यपि, बालेन शाह ने यह दिखा दिया है कि यदि काम करने की इच्छाशक्ति हो, तो पहचान की राजनीति से ऊपर उठकर परिवर्तन की राजनीति की जा सकती है. पर, अभी उन्हें साबित करना होगा।
