बिहार में राज्यसभा सीट के लिए ओवैसी चलेंगे बड़ा दांव,पांचवीं सीट पर राजद की बढ़ेगी परेशानी!

 बिहार में राज्यसभा सीट के लिए ओवैसी चलेंगे बड़ा दांव,पांचवीं सीट पर राजद की बढ़ेगी परेशानी!
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देशभर में राज्यसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है. इसी बीच बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए भी सभी राजनीतिक दल ताकत झोंकने में लग गए हैं. प्रदेश की एक सीट को लेकर खींचतान जारी है. पांचवी सीट को लेकर असदुद्दीन ओवैसी किंगमेकर की भूमिका में आ गए हैं. दरअसल उनके 5 विधायक इस सीट पर निर्णायक भूमिका में दिख रहे हैं. ओवैसी की विधायकों की वजह से एक सीट पर सियासी गणित बिगड़ता हुआ दिख रहा है. कहा जा रहा है कि ओवैसी के 5 विधायक अगर महागठबंधन को इस सीट के लिए समर्थन देते हैं तो बीजेपी गठबंधन के लिए मुश्किलें पैदा हो सकती हैं. फिलहाल इस सीट पर अब रणनीतियां तेज हो गई हैं. असदुद्दीन ओवैसी ने पार्टी प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान को दिल्ली बुला लिया है. इससे साफ दिख रहा है कि पांचवी सीट पर शीर्ष नेतृत्व ही फैसला लेगा.राज्यसभा चुनाव के लिए आगामी 16 मार्च को वोटिंग होगी. बता दें कि राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों की जरूरत होती है।

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ऐसे में बिहार की 5 सीटों के लिए 205 विधायकों की जरूरत है. इसमें एनडीए गठबंधन के पास 202 विधायक ही हैं. हलांकि एनडीए 4 सीटें आसानी से जीतने में कामयाब हो सकता है, लेकिन एक सीट को लेकर पेच फंसा हुआ है. ऐसे में महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं. जिससे उन्हें 6 और विधायकों की जरूरत पड़ेगी. इसमें मायावती के इकलौते विधायक और ओवैसी 5 विधायकों का समर्थन अगर महागठबंधन को मिलता है तो यह सीट उनके खाते में चली जाएगी. इसी गणित की वजह से अब एआईएमएआईएम किंगमेकर की भूमिका में आ गई है. पांचवी सीट को लेकर बन रहे गणित के बीच कांग्रेस ने मौन साध रखा है. वहीं राजद पूरी तरह एक्टिव दिखाई दे रही है. कांग्रेस की तरफ से महागठबंधन के प्रत्याशी को समर्थन देने को लेकर अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया है. हलांकि कांग्रेस विधायकों की संख्या के मुताबिक वह दावेदारी ठोकने की स्थिति में नहीं है. कांग्रेस की तरफ से खुलकर समर्थन न करना और सामने न आना भी कहीं न कहीं सवाल खड़े कर रहा है. कांग्रेस की तरफ से यह चुप्पी पार्टी के अंदर एकजुटता न होना है. दरअसल पार्टी दो धड़ों में बंट गईं हैं. एक गुट राजद के साथ गठबंधन को लेकर पूरी तरह खुश नहीं दिखा है, तो दूसरा धड़ गठबंधन की राजनीति को मजबूरी मानता है. यही वजह है कि कांग्रेस इस सीट पर खुलकर कुछ नहीं कह पा रही है. ऐसे में अब सबकी निगाहें ओवैसी के विधायकों के समर्थन पर टिकी हुई है. बता दें कि विधानसभा चुनाव में ओवैसी ने राजद से 6 सीटें मांगी थी जो उन्हें नहीं दी गई थीं. इसलिए राजद के लिए भी यह सीट जीतना और समीकरण बैठाना इतना आसान नहीं है।

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