एकनाथ शिंदे ने बचाई बीजेपी की साख,मुंबई में बने BJP के मजबूत सहयोगी
करीब तीन दशक बाद मुंबई की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है. देश की सबसे अमीर नगर निकाय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर अब बीजेपी का राज है. महायुति गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. BJP पहली बार मुंबई में मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच गई है. वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अपने प्रदर्शन से साख बचा ली है. दूसरी ओर ठाकरे भाइयों को बड़ा झटका लगा है, जबकि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने सबको चौंकाते हुए जोरदार बढ़त दर्ज की है।227 सदस्यीय BMC सदन में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत थी. शुक्रवार को महायुति इस आंकड़े को पार करने में कामयाब रही. BJP ने 89 सीटें जीतीं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें मिलीं. इस तरह गठबंधन के पास मामूली बढ़त है, लेकिन बड़े फैसलों के लिए BJP को शिंदे गुट पर निर्भर रहना होगा।BJP विधायक और विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने साफ कहा है कि मुंबई का मेयर BJP का होगा. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा मुंबईकरों के जीवन में बदलाव अहम है.

हालांकि माना जा रहा है कि शिंदे गुट अहम पदों, खासकर स्टैंडिंग कमेटी की मांग कर सकता है.उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की MNS को मिलाकर 71 सीटें मिलीं. उद्धव गुट ने 65 और MNS ने 6 सीटें जीतीं. मुंबई के पारंपरिक मराठी इलाकों जैसे दादर, परेल, लालबाग, वरली और शिवड़ी में ठाकरे परिवार की पकड़ बनी रही. वरली में शिंदे गुट के उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा. हालांकि ठाणे और नवी मुंबई जैसे इलाकों में यह गठबंधन असर नहीं दिखा सका.चुनाव नतीजों के बाद एकनाथ शिंदे BJP के लिए मजबूत सहयोगी बनकर उभरे हैं. उनकी शिवसेना ने जहां 29 सीटें जीतीं, वहीं ठाकरे गुट के मुकाबले कम सीटें मिलीं, लेकिन सत्ता की चाबी उन्हीं के हाथ में नजर आ रही है. इससे अजित पवार की राजनीतिक अहमियत पर भी सवाल खड़े हो गए हैंइस चुनाव में सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM का रहा. पार्टी ने अपनी सीटें 2 से बढ़ाकर 8 कर लीं. कई अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में AIMIM ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया. माना जा रहा है कि ओवैसी के बयानों का असर अल्पसंख्यक वोटों पर पड़ा।कांग्रेस ने इस बार महा विकास अघाड़ी से अलग होकर चुनाव लड़ा. पार्टी को 24 सीटें मिलीं, जो 2017 के मुकाबले कम हैं. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि गठबंधन से दूर रहकर उन्होंने उत्तर भारतीय और मुस्लिम वोट बचाए. हालांकि AIMIM की बढ़त ने कांग्रेस को भी नुकसान पहुंचाया.विश्लेषकों के मुताबिक, मतदाताओं ने केंद्र, राज्य और शहर में एक ही पार्टी की सरकार के BJP के नारे को समर्थन दिया. BJP का हिंदुत्व और विकास का एजेंडा ठाकरे गुट की मराठी अस्मिता की राजनीति पर भारी पड़ा. BJP को अलग-अलग समुदायों का समर्थन मिला।
