जनरल कैटेगरी के कटऑफ से ज्यादा नंबर लाने वालों के लिए कोर्ट का बड़ा आदेश,जनरल सीट पर होगी सिलेक्शन

 जनरल कैटेगरी के कटऑफ से ज्यादा नंबर लाने वालों के लिए कोर्ट का बड़ा आदेश,जनरल सीट पर होगी सिलेक्शन
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आरक्षण विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रिजर्व कैटेगरी के जो कैंडिडेट जनरल कैटेगरी के कटऑफ से ज्यादा नंबर लाते हैं, उन्हें अनरिजर्व्ड सीटों पर एडजस्ट किया जाना चाहिए।यह फैसला जस्टिस एम एम सुंदरेश और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने सुनाया. बेंच ने कहा, ‘अब यह कानून का एक तय नियम है कि रिजर्व कैटेगरी (SC, ST, और OBC) का कोई कैंडिडेट जिसने जनरल कैटेगरी के कट ऑफ मार्क्स से ज़्यादा मार्क्स लाए हैं, उसे ओपन या अनरिजर्व्ड खाली पोस्ट के लिए क्वालिफाई माना जाएगा.’बेंच ने कहा कि इस मामले में रिजर्व कैटेगरी के उन कैंडिडेट को कोई छूट नहीं दी गई, जिन्हें जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट के लिए बनी पोस्ट पर अपनी मेरिट के आधार पर अपॉइंट किया गया था, क्योंकि उन्होंने सिलेक्शन प्रोसेस में जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट से ज्यादा मार्क्स हासिल किए थे.इसमें आगे कहा गया कि मामले के फैक्ट्स से यह भी साफ होता है कि अनरिजर्व्ड कैटेगरी के लिए नोटिफाई की गई सभी वैकेंसी, यानी 122 पोस्ट, कैंडिडेट के सिलेक्शन प्रोसेस में उनकी अपनी मेरिट के आधार पर मिले मार्क्स के आधार पर भरी गई थी और इसलिए, अपील करने वाली अथॉरिटी का रिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट को उनकी अपनी मेरिट के आधार पर अनरिजर्व्ड लिस्ट में माइग्रेट करना सही था, क्योंकि उन्होंने जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट से ज्यादा मार्क्स हासिल किए थे.सुप्रीम कोर्ट ने ये बातें केरल हाई कोर्ट के 2020 के फैसले को रद्द करते हुए कहीं. हाईकोर्ट ने पहले एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) को मेरिट वाले रिजर्व कैटेगरी (MRC) के कैंडिडेट को जनरल लिस्ट से हटाकर एक अनरिजर्व्ड कैंडिडेट को अपॉइंट करने का निर्देश दिया था.बेंच ने कहा, ‘इस कोर्ट की यह राय है कि केरल हाईकोर्ट के सिंगल जज और डिवीजन बेंच का दिया गया फैसला रद्द किया जाना चाहिए और इसलिए उसे रद्द कर दिया गया है और रेस्पोंडेंट नंबर 1 यानी शाम कृष्ण बी. या अनरिजर्व्ड कैटेगरी के किसी दूसरे व्यक्ति को अपॉइंटमेंट देने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि अनरिजर्व्ड कैटेगरी के तहत नोटिफाई की गई सभी वैकेंसी अपील करने वाली अथॉरिटी की बनाई मेरिट लिस्ट के हिसाब से ही भरी गई हैं.’बेंच ने कहा कि अपील करने वाली अथॉरिटी ने रिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट को अनरिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट्स की लिस्ट में शिफ्ट करने के अपने स्टैंड को सही ठहराया है, क्योंकि उन्होंने अनरिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट से ज्यादा या अनरिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट के बराबर मार्क्स पाए हैं.बेंच ने कहा, ‘रिजर्वेशन रजिस्टर या रोस्टर बनाए रखने के मुख्य रूप से दो मकसद होते हैं. पहला, यह पता लगाना कि किसी भी समय, किसी कैडर में किसी खास कैटेगरी (SC, ST और OBC) के कर्मचारियों की संख्या कैडर में उनके कानूनी कोटे से ज्यादा न हो. दूसरा मकसद यह पता लगाना है कि भविष्य की भर्तियों के लिए सभी कैटेगरी (UR, SC, ST और OBC) में कितने पद खाली हैं.’बेंच ने कहा कि रिजर्वेशन रोस्टर का इस्तेमाल रिक्रूटमेंट प्रोसेस के दौरान सिलेक्शन करने के लिए नहीं किया जाता है, बल्कि सिर्फ रिक्रूटमेंट के लिए एडवर्टाइज़िंग के लिए खाली पोस्ट की संख्या तय करने के लिए किया जाता है. ‘हालांकि, क्योंकि रिजर्वेशन रजिस्टर या रोस्टर रिक्रूटमेंट के लिए उपलब्ध कोटा तय करता है, इसलिए इसका इस्तेमाल यह तय करने के लिए किया जा सकता है कि कौन सिलेक्शन का हकदार है और कौन सिलेक्शन का हकदार नहीं है, क्योंकि संबंधित कैटेगरी का कोटा संबंधित कैंडिडेट के लिए उपलब्ध कैटेगरी में ज़्यादा काबिल कैंडिडेट से भरा जा रहा है.’बेंच की तरफ से फैसला लिखने वाले जस्टिस शर्मा ने कहा कि ‘अनरिजर्व्ड’ कैटेगरी जनरल कैंडिडेट्स के लिए ‘कोटा’ नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से मेरिट के आधार पर सभी के लिए एक ‘ओपन’ पूल है. बेंच ने कहा कि यह ‘मेरिट इंड्यूस्ड शिफ्ट’ आर्टिकल 14 (कानून के सामने बराबरी) और आर्टिकल 16 (पब्लिक नौकरी में मौके की बराबरी) की जरूरत है.

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बेंच ने कहा कि जब कोई रिजर्व कैटेगरी का कैंडिडेट बिना किसी छूट (जैसे उम्र या फ़ीस में छूट) के जनरल कैंडिडेट से बेहतर परफ़ॉर्म करता है, तो उसे ‘ओपन’ कैंडिडेट माना जाना चाहिए. यह विवाद 2013 में एएआई द्वारा जूनियर असिस्टेंट (फ़ायर सर्विस) के 245 पदों के लिए की गई भर्ती से शुरू हुआ था.एएआई ने सिलेक्शन प्रोसेस के बाद, जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट और ओबीसी, एससी और एसी बैकग्राउंड के काबिल कैंडिडेट, दोनों को शामिल करके 122 अनरिजर्व्ड सीटें भरीं. शाम कृष्ण बी, एक अनरिजर्व्ड कैटेगरी के कैंडिडेट, जिन्हें वेटिंग लिस्ट में सीरियल नंबर 10 पर रखा गया था, ने इस प्रोसेस को चैलेंज किया. केरल हाईकोर्ट ने उनके फेवर में फैसला सुनाया. इसमें एएआई के सिलेक्शन प्रोसेस को गलत पाया गया और उनके अपॉइंटमेंट का ऑर्डर दिया गया।

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