नवमी के दिन आज करें मां सिद्धिदात्री की पूजा,पढ़िए मंत्र और आरती

 नवमी के दिन आज करें मां सिद्धिदात्री की पूजा,पढ़िए मंत्र और आरती
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आज चैत्र नवरात्र का अंतिम दिन है, जिसे महानवमी या रामनवमी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. नवरात्र के नौ दिनों तक चलने वाली उपासना का समापन भी इसी दिन होता है. पूजा के बाद कन्या पूजन किया जाता है और फिर व्रत का पारण करके नवरात्र का समापन किया जाता है. आइए जानते हैं कि आज चैत्र नवरात्र की नवमी पर कन्या पूजन का क्या शुभ मुहूर्त रहने वाला है. द्रिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च यानी कल सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 27 मार्च यानी आज सुबह 10 बजकर 06 मिनट पर हो जाएगा.नवमी कन्या पूजन आज (27 मार्च) सुबह 6 बजकर 17 मिनट से लेकर 10 बजकर 08 मिनट तक रहेगा.पूजा के लिए सुबह स्नान के बाद मां सिद्धिदात्री के सामने घी का दीपक जलाएं और उन्हें फूल अर्पित करें. देवी को फल, मिठाई या नौ प्रकार के भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है. इसके बाद ‘ऊं ह्रीं दुर्गाय नमः’ मंत्र का जाप करें. पूजा के बाद प्रसाद को पहले जरूरतमंद लोगों में बांटें और फिर स्वयं ग्रहण करें।

मां सिद्धिदात्री का ध्यान मंत्र:

वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
कमलस्थिताम् चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्र स्थिताम् नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम् ।
शङ्ख, चक्र, गदा, पद्मधरां सिद्धीदात्री भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्।।
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटिं निम्ननाभि नितम्बनीम् ॥
सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना यदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
ॐ देवी महागौर्यै नमः
ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:

सिद्धिदात्री माता की कथा:

धार्मिक मान्यता है कि असुरों के अत्याचारों से परेशान होकर जब सभी देवता भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे, तब तीनों देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति की उत्पत्ति हुई, जिसे माता सिद्धिदात्री के रूप में जाना गया. पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने भी मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या की और उनकी कृपा से ही उन्हें सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हुईं.ऐसा माना जाता है कि माता सिद्धिदात्री की कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हो गया और वे ‘अर्धनारीश्वर’ कहलाए. मां सिद्धिदात्री को सिद्धियों की दाता कहा जाता है. माता सिद्धिदात्री अपने भक्तों को ‘अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व’ जैसी आठ प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं. नवरात्रि के नौवें दिन (महानवमी) पर माता सिद्धिदात्री की पूजा के साथ नवरात्रि व्रत का पूर्ण फल मिलता है।माता सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं, वे कमल पुष्प पर आसीन होती हैं और उनका वाहन सिंह है. धार्मिक मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की पूजा से भक्तों को लौकिक और पारलौकिक मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और व्यक्ति संसार से निर्लिप्त रहकर मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं. इनकी पूजा करने से भक्तों को ब्रह्मांड पर जीत हासिल करने का साहस मिलता है और वे सांसारिक दुखों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करते हैं।

सिद्धिदात्री माता की आरती:

जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दाता
तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि
तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि
कठिन काम सिद्ध कराती हो तुम
हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,
तेरी पूजा में न कोई विधि है
तू जगदंबे दाती तू सर्वसिद्धि है
रविवार को तेरा सुमरिन करे जो
तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,
तू सब काज उसके कराती हो पूरे
कभी काम उस के रहे न अधूरे
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया
रखे जिसके सर पैर मैया अपनी छाया,
सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशाली
जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली
हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा
महानंदा मंदिर में है वास तेरा,
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता
वंदना है सवाली तू जिसकी दाता..

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