अमेरिका के आगे नतमस्तक होगा ईरान!खत्म होने के कगार पर पहुंचा ईरान का अर्थव्यवस्था?
अमेरिका-इजरायल के ईरान से चल रहे युद्ध के 14 दिन बीत चुके हैं, लेकिन मिसाइल-ड्रोन हमलों के धमाके बंद नहीं हो रहे हैं. उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि लड़ाकू विमानों ने ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ खार्ग द्वीप में सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है. वहां के तेल के ढांचों को भी आगे निशाना बनाया जा सकता है. ट्रंप का दावा इससे ईरान सरेंडर को मजबूर हो जाएगा. खबरों में पहले ही कहा जा रहा था कि अमेरिका ईरान के तेल निर्यात के सबसे बड़े इलाके खार्ग आइलैंड पर कब्जा कर सकता है, यहां से ईरान का 90 फीसदी तेल दूसरे देशों को जाता है. अगर अमेरिका ने 25-30 किलोमीटर के दायरे में फैले इस द्वीप पर कब्जा जमा लिया तो ईरान सरेंडर करने को मजबूर हो सकता है.खार्ग आइलैंड ईरान की इकोनॉमी की रीढ़ है. पिछले 70 सालों से ईरान और विदेशी कंपनियों ने यहां भारी निवेश किया है.

ये ईरान के तेल के कुओं और दुनिया भर के देशों को निर्यात के बीच अहम कड़ी है. अमेरिका-इजरायल के ईरान से युद्ध के बीच ऐसे रणनीतिक हथियार को आजमाने का प्रयास हो सकता है. ईरान के भीतर तेहरान, इस्फहान, कोम जैसे शहरों में सेना और सरकार के ठिकानों पर अमेरिका-इजरायल ने भीषण हमले किए हैं. लेकिन ईरान का मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप अभी तक अछूता रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप द्वीप पर कब्जे या घेराबंदी जैसे सैन्य ऑपरेशन पर विचार कर रहे हैं, ताकि ईरान को झुकने के लिए मजबूर किया जा सके. ईरान में अयातुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने के बावजूद अभी तक सत्ता परिवर्तन की मुहिम रंग नहीं लाई है. फारस की खाड़ी में ईरान के तट से लगभग 25-30 किलोमीटर दूर खार्ग एक छोटा ईरानी द्वीप है, लेकिन ये ईरान की इकोनॉमी की ऑक्सीजन की तरह है. ये द्वीप ईरान का अहम कच्चा तेल निर्यात टर्मिनल है, जहां से ईरान के तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत कारोबार होता है. यहां से रोजाना लगभग 70 लाख बैरल तेल की लोडिंग हो सकती है. अमेरिका ने ईरान के परमाणु संयंत्रों, मिसाइल लांचिंग सेंटर और सैन्य ठिकानों पर भारी बमबारी की है. लेकिन खार्ग जैसे तेल भंडारों पर कोई हमला नहीं किया गया है.ये दिखाता है कि ये जगह ईरान की अर्थव्यवस्था और ग्लोबल ऑयल मार्केट के लिए कितना अहम है. इस पर हमला करने या रोकने ईरान की कच्चे तेल के निर्यात की ताकत खत्म हो जाएगी. हालांकि इससे कच्चे तेल की कीमतों में थोड़े वक्त के लिए इजाफा भी देखने को मिल सकता है. अगर खाड़ी देशों में यह युद्ध लंबा फैला तो टैंकरों की आवाजाही ठप पड़ जाएगी. खार्ग आइलैंड होर्मुज स्ट्रेट के बेहद करीब है और सऊदी अरब, यूएई, जार्डन, ओमान से लेकर कतर-बहरीन तक सारे मध्य पूर्व देश जानते हैं कि ये कच्चे तेल-गैस की सप्लाई का सबसे अहम चोकप्वाइंट है. अगर यहां कोई भी बड़ी सैन्य कार्रवाई के दौरान मिसाइल-ड्रोन हमले होते हैं तो पूरी दुनिया पर असर पड़ेगा. अभी होर्मुज स्ट्रेट की सप्लाई में रुकावट के बिना ही कच्चे तेल में उछाल आ रहा है. भारत समेत कई देशों ने एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतें बढ़ा दी हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ईरान की युद्ध क्षमता खत्म करने के लिए खार्ग द्वीप पर स्पेशल ऑपरेशन कर सकती है. एक्सियोस रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और इजरायली सेना, खुफिया एजेंसी और शीर्ष अधिकारी ईरान के भीतर स्पेशल फोर्सेस के साथ ऐसा ऑपरेशन कर सकती है. यहां ईरान का सबसे बड़ा ऑयल एक्सपोर्ट टर्मिनल है. खार्ग आइलैंड पर ऐसा ऑपरेशन वेनेजुएला जैसी स्थिति ला सकता है, जिससे ईरान अमेरिकी शर्तों को मानने के लिए मजबूर हो सकता है.ईरान के पास देश, सेना को चलाने और हथियारों के लिए पैसा नहीं बचेगा.द्वीप (Kharg Island) पर कब्जे या उसकी नाकेबंदी से ईरान के तेल से मिलने वाला खजाना औंधे मुंह गिरेगा. खामेनेई सरकार ये लाइफलाइन है. ऐसा विकल्प ईरान के विशाल तेल भंडार खामेनेई सरकार के हाथों से फिसल जाएंगे. आर्थिक तंगी के कारण ईरान अमेरिकी शर्तों को मानने के लिए मजबूर होगा.खार्ग द्वीप अब तक युद्ध के दौरान सीधे हमलों से बचा रहा है. द्वीप में मौजूद तेल टर्मिनल, भंडारों या कंटेनरों को नुकसान पहुंचा तो तेल की कीमतें आसमान छूने का खतरा है. कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और सत्ता परिवर्तन होता है तो मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. ये द्वीप हाथ से निकलता है तो ईरान परमाणु हथियारों की ओर बढ़ सकता है. माना जाता है कि ईरान के पास लगभग 450 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक समृद्ध यूरेनियम है, जिसे एटमी हथियार में बदला जा सकता है. संवर्धित यूरेनियम की ऐसी परमाणु सामग्री को कब्जे में लेने या निष्क्रिय करने के लिए स्पेशल ऑपरेशन चलाया जा सकता है. ऐसे में खार्ग द्वीप के आसपास कोई भी अभियान विफल हुआ तो बड़ी तबाही का खतरा है.
