चांद का इंतजार क्यों?जानिए इसके पीछे का विज्ञान!

 चांद का इंतजार क्यों?जानिए इसके पीछे का विज्ञान!
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करवा चौथ का व्रत 29 अक्तूबर (गुरुवार) को मनाया जा रहा है. इस बार दिल्ली में चांद निकलने का समय शाम 8.17 बजे है. बाजारों में मेहंदी से सजे हाथों वाली महिला मंडली खूब दिखाई दी. करवा चौथ के दिन व्रती महिलाएं फिर चांद का इंतजार करेंगी. और चांद देरी से नजर आएगा. दिनभर के व्रत के बाद शाम को पूजा की तैयारी हो जाती है. आसमान की ओर बार-बार नजर जाती है. फिर भी चांद कई बार देर से दिखाई देता है.ऐसा लगता है कि चांद जान-बूझकर इंतजार करवा रहा है. लेकिन इसके पीछे कोई जादू या खास रहस्य नहीं है. चांद का देर से दिखना उसकी गति, पृथ्वी के घूमने और चंद्रमा की बदलती अवस्था से जुड़ा है.आइए, इसी बहाने समझते हैं की करवा चौथ का चांद देर से क्यों निकलता है? इसके पीछे विज्ञान क्या है?हम आम बोलचाल में कहते हैं कि चांद निकल रहा है. असल में चांद रोज पृथ्वी के चारों ओर घूमता है.

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पृथ्वी भी अपनी धुरी पर लगातार घूम रही है. इसी घूमने के कारण हमें सूरज, चांद और तारे आसमान में चलते हुए दिखाई देते हैं. पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है. इसलिए आसमान की चीजें हमें पूर्व से पश्चिम की ओर जाती हुई लगती हैं. जब चांद हमारे क्षितिज के नीचे से ऊपर आता दिखाई देता है, तो हम कहते हैं कि चांद निकल आया. अलग-अलग जगहों पर चांद निकलने का समय अलग हो सकता है. यह जगह के अक्षांश, आसपास की पहाड़ियों, इमारतों और खुले क्षितिज पर निर्भर करता है.चांद, पृथ्वी का एक चक्कर लगभग 27.3 दिनों में लगाता है. इस दौरान पृथ्वी भी अपनी धुरी पर घूमती रहती है. इसलिए एक दिन से अगले दिन तक चांद की स्थिति बदल जाती है. चांद को फिर से उसी जगह दिखाई देने के लिए पृथ्वी को थोड़ा और घूमना पड़ता है. इसी वजह से चांद रोज कुछ मिनट बाद निकलता दिखाई दे सकता है. यह एक औसत समय है. हर दिन और हर जगह यह अंतर बिल्कुल एक जैसा नहीं होता. कभी चांद अपेक्षाकृत कम देर से आता है. कभी ज्यादा देर हो सकती है. चंद्रमा की कक्षा सीधी गोल नहीं है. उसका रास्ता थोड़ा झुका हुआ है. ये बातें भी उसके निकलने के समय को बदलती हैं.करवा चौथ चंद्र कैलेंडर की तिथि के अनुसार मनाया जाता है. यह आम तौर पर पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पड़ता है. पूर्णिमा के दिन चांद लगभग सूरज डूबने के समय निकलता है. उसके बाद हर दिन चांद का निकलना औसतन कुछ देर पीछे खिसकता है. इसलिए पूर्णिमा के कुछ दिन बाद चांद शाम को देर से दिखाई देता है.करवा चौथ पर भी चांद का समय शहर और स्थानीय हालात के अनुसार बदलता है. यही कारण है कि एक शहर में चांद पहले दिख सकता है, जबकि दूसरे शहर के लोगों को थोड़ी देर और इंतजार करना पड़ सकता है. करवा चौथ की तारीख हर साल बदलती है. चंद्रमा की स्थिति, पंचांग की गणना और स्थान के अनुसार चांद निकलने का समय भी बदलता है. इसलिए किसी एक साल या शहर का समय हर जगह के लिए सही नहीं माना जा सकता.चांद अपनी नियमित कक्षा में चलता रहता है. हमें उसका समय इसलिए खास महसूस होता है क्योंकि करवा चौथ के दिन हम चांद देखने की प्रतीक्षा करते हैं. रोजमर्रा के दिनों में शायद हम चांद के निकलने का समय ध्यान से नहीं देखते. हमारा इंतजार भावनाओं और परंपरा से जुड़ा है. चांद की गति प्राकृतिक नियमों से चलती है. दोनों बातें अपनी-अपनी जगह सच हैं. एक ओर व्रत का सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व है. दूसरी ओर चांद का दिखना खगोलीय गणित पर निर्भर करता है.कभी चांद क्षितिज के ऊपर आ चुका होता है, लेकिन हमें दिखाई नहीं देता. इसकी वजह बादल, धुंध, धूल या प्रदूषण हो सकता है. ऊंची इमारतें और पहाड़ भी चांद को कुछ समय तक छिपा सकते हैं. ऐसे में चांद समय पर निकलने के बाद भी की बार हमारी नजरों से दूर रह सकता है. शहरों में तेज रोशनी के कारण आसमान कम साफ दिखता है. खुले स्थानों पर चांद जल्दी नजर आ सकता है. यदि आसमान में बादल हों, तो चांद दिखने का समय और भी अनिश्चित हो जाता है. इसलिए चांद निकलने की गणना और चांद का आंखों से दिखाई देना हमेशा एक ही बात नहीं होती.चांद खुद रोशनी पैदा नहीं करता. उस पर सूरज की रोशनी पड़ती है. चांद पृथ्वी के चारों ओर घूमता है, इसलिए हमें उसका रोशन हिस्सा अलग-अलग मात्रा में दिखाई देता है. इसी से अमावस्या, अर्धचंद्र और पूर्णिमा जैसी अवस्थाएं बनती हैं. करवा चौथ के आसपास चांद पूर्णिमा के बाद वाली अवस्था में होता है. इसका रोशन हिस्सा धीरे-धीरे कम होता जाता है. चांद की यह बदलती अवस्था उसके निकलने के समय से जुड़ी है. इसलिए करवा चौथ का चांद पूर्णिमा वाले चांद की तरह शाम होते ही दिखाई नहीं देता.चांद निकलने का समय जानने के लिए अपने शहर का स्थानीय समय देखना चाहिए. पंचांग या भरोसेमंद खगोलीय कैलेंडर में दिए गए समय उपयोगी हो सकते हैं. ये समय जगह के अनुसार बदलते हैं. इसलिए किसी दूसरे शहर का समय अपने शहर पर लागू नहीं करना चाहिए. यदि आसमान में बादल हों, तो तय समय पर चांद दिखाई न देना सामान्य बात है. कुछ देर बाद आसमान साफ होने पर वह नजर आ सकता है. चांद को देखने के लिए ऐसी जगह चुनना मददगार हो सकता है जहां पूर्वी दिशा का क्षितिज खुला हो.करवा चौथ का चांद देर से दिखने का कारण पृथ्वी और चंद्रमा की गति है. चांद की कक्षा, उसकी अवस्था और हमारे स्थान के कारण उसका समय बदलता है. बादल और आसपास की बाधाएं उसे दिखने में और देर कर सकती हैं. विज्ञान हमें बताता है कि चांद कब और क्यों दिखाई देता है. परंपरा इस इंतजार को भावनात्मक अर्थ देती है. करवा चौथ पर चांद का इंतजार इसलिए खास लगता है क्योंकि वह एक साझा रस्म और भावना का हिस्सा है. चांद देर नहीं करता. वह बस अपनी तय चाल से चलता है. हम उसे देखने के लिए उस पल का इंतजार करते हैं.

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