कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?इन नामों में से एक का आज हो सकता है ऐलान

 कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री?इन नामों में से एक का आज हो सकता है ऐलान
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बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान मंगलवार को होगा. राज्य में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनने जा रहा है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर्यवेक्षक बनकर आ रहे हैं. दोपहर दो बजे से बीजेपी विधायक दल की बैठक होगी. इसमें उस नेता का चयन होगा जो बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनेगा. मुख्यमंत्री बनने के लिए जो नाम चर्चा में हैं, उनमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे है. सूत्र बताते हैं कि खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके नाम की अनुशंसा की है, इसलिए उनका दावा सबसे मजबूत है. लेकिन बीजेपी की अब तक की राजनीति और अलग-अलग राज्यों में मुख्यमंत्री के चयन को देखते हुए, यह सब इतना आसान नहीं लग रहा.राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी किसी नए नाम को सामने लाकर चौंका भी सकती है, इसलिए सम्राट चौधरी के अलावा भी कई नाम चर्चाओं में हैं. बता दें कि सम्राट चौधरी कुशवाहा जाति से आते हैं. पिछड़ी जाति में यादव के बाद कुशवाहा सबसे बड़ी जाति है. सूत्रों की मानें तो जेडीयू ने बीजेपी को इसी जाति समूह से मुख्यमंत्री बनाने को कहा है. तभी सम्राट स्वाभाविक दावेदार बने हैं. हालांकि इसी जाति से आने वाली प्राणपुर की विधायक निशा सिंह के नाम की भी चर्चा हो रही है. नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाने से पहले बीजेपी यह दांव खेल सकती है.एक चर्चा अति पिछड़ी जाति के नेताओं को मुख्यमंत्री बनाने की भी है, इसमें मौजूदा मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी सबसे मजबूत दावेदारों में से एक हैं. वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के रास्ते बीजेपी में आए हैं. वह पहली बार मंत्री बने हैं. उनके पास सहकारिता और वन, पर्यावरण जैसे विभाग हैं. दीघा विधायक संजीव चौरसिया भी इस रेस में शामिल हैं. वह इस सीट से लगातार तीसरी बार चुनाव जीते हैं. उनके पिता गंगा प्रसाद चौरसिया गवर्नर भी रह चुके हैं.

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उनका परिवार संघ से जुड़ा रहा है. वह पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं. उनके जरिए अति पिछड़ी जातियों को साधा जा सकता है. स्पीकर प्रेम कुमार भी अति पिछड़ी जाति से आते हैं. उनकी इच्छा भी मुख्यमंत्री बनने की है लेकिन उम्र उनकी राह में रोड़ा बन सकता है. इस समूह से हरि सहनी, रमा निषाद जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं.इसके अलावा अनुसूचित जाति से आने वाले नेताओं को मुख्यमंत्री बनाए जाने की भी चर्चा है. करीब 20% आबादी वाले इस समूह से मुख्यमंत्री बनाने पर यूपी चुनाव में भी इसका असर होगा. पार्टी इस बात को ध्यान में रखकर सीएम का चुनाव कर सकती है. मौजूदा समय में देश के किसी भी राज्य में अनुसूचित जाति का मुख्यमंत्री नहीं है. इस वर्ग से आने वाले जनक राम के नाम की भी चर्चा है, वे रविदास समुदाय से आते हैं और मंत्री भी रहे हैं. वह बिहार विधान परिषद के सदस्य भी हैं. उनको मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी यूपी के जाटव मतदाताओं को संदेश दे सकती है.पातेपुर से दूसरी बार विधायक बने लखेंद्र पासवान ने बीते दिनों दोनों डिप्टी सीएम के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की थी. इसके बाद उनके नाम की भी चर्चा हो रही है. वे फिलहाल मंत्री हैं और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के करीबी माने जाते हैं. इसके अलावा बीजेपी सांसद संजय जायसवाल, मंत्री दिलीप जायसवाल जैसे नेताओं के नाम की भी चर्चा है.मंगलवार दोपहर तक चर्चाओं का बाजार गर्म रहेगा. विधायक दल के बैठक में नेता के चयन के साथ कयासबाजी समाप्त हो जाएगी. मौजूदा परिस्थितियों में सम्राट चौधरी सबसे आगे नजर आ रहे हैं. माना जा रहा है कि उनके नाम पर ही मुहर लग सकती है. देखना होगा कि बिहार का अगला सम्राट तय चेहरा होगा या इस बार भी भाजपा चौंकाएगी.

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