NEET मामले का आखिर कौन है दोषी,कब तक चलते रहेगा छात्रों के साथ ऐसा खेल?

 NEET मामले का आखिर कौन है दोषी,कब तक चलते रहेगा छात्रों के साथ ऐसा खेल?
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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा सोमवार को NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द किए जाने से एक बार फिर देश भर में गुस्सा फूट पड़ा है. स्टूडेंट ग्रुप और मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि कोचिंग सेंटर, बिचौलिए और पूरे भारत में पेपर लीक करने वाले संगठित नेटवर्क का गहरा गठजोड़ है. छात्र संगठन अधिकारियों से जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी धांधली रोकी जा सके.यह फैसला 3 मई को देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में 25 से 26 लाख उम्मीदवारों के शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद आया है. केंद्र द्वारा निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, लेकिन पेपर लीक और धांधली के आरोपों के कारण अधिकारियों को परीक्षा रद्द करने पर मजबूर होना पड़ा. इससे भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल ने इस कथित रैकेट में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, चाहे उनका प्रभाव या पद कुछ भी हो.विडंबना यह है कि यह विवाद परीक्षा से पहले केंद्र सरकार द्वारा घोषित सुरक्षा उपायों की एक लंबी सीरीज के बावजूद पैदा हुआ. पिछले महीने ही, शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए देश भर के चिकित्सा संस्थानों को सख्त निर्देश जारी किए थे.एक मुख्य उपाय के तहत परीक्षा के दौरान छात्रों की छुट्टियों पर रोक लगा दी गई थी. मेडिकल कॉलेजों को खास तौर पर सलाह दी गई थी कि वे 2 और 3 मई को असाधारण परिस्थितियों के अलावा छात्रों को छुट्टी न दें, ताकि छात्र नेटवर्क के दुरुपयोग या डमी कैंडिडेट जैसे रैकेट को रोका जा सके.हालांकि,इस ताजा घटना ने उन आशंकाओं को और पुख्ता कर दिया है कि संगठित परीक्षा धोखाधड़ी नेटवर्क कड़ी निगरानी और सुरक्षा तंत्र के बावजूद खामियों का फायदा उठाना जारी रखे हुए हैं.डॉ. मित्तल ने कहा, “यह पहली बार नहीं है जब नीट परीक्षाओं को लेकर गंभीर आरोप और अनियमितताएं सामने आई हैं.” उन्होंने आगे कहा कि निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के हित में परीक्षा रद्द करने और दोबारा आयोजित करने का निर्णय स्वागत योग्य है, लेकिन इतने बड़े घोटाले का अंतिम समाधान केवल परीक्षा रद्द करना नहीं हो सकता.इस विवाद ने देश को झकझोर देने वाले पिछले पेपर लीक घोटालों की यादें ताजा कर दी हैं. 2024 में भी, नीट-यूजी को पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स देने में गड़बड़ी के आरोपों का सामना करना पड़ा था. उस मामले ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया था और अंततः केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा जांच की गई थी.

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बिहार और अन्य राज्यों में ‘सॉल्वर गैंग’ और संगठित नकल गिरोहों से जुड़े आरोपों में कई गिरफ्तारियां की गई थीं.भारत ने पिछले एक दशक में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े कई घोटाले देखे हैं, जिसमें मध्य प्रदेश का कुख्यात व्यापम घोटाला भी शामिल है. उस घोटाले ने बिचौलियों, राजनेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से मेडिकल दाखिलों और सरकारी भर्तियों में बड़े पैमाने पर हो रही हेराफेरी को उजागर किया था. इसी तरह के पेपर लीक विवादों ने कई राज्यों में UGC-NET, पुलिस भर्ती परीक्षाओं और शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (TET) को भी प्रभावित किया है.चिकित्सा पेशेवरों और शिक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह मुद्दा केवल परीक्षा प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर भारत की भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावित करता है. डॉ. मित्तल ने आगे कहा, “आज मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्र ही कल के डॉक्टर बनेंगे. यदि अयोग्य उम्मीदवार भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के जरिए मेडिकल शिक्षा में प्रवेश पाते हैं, तो यह अंततः मरीजों की सुरक्षा और भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के साथ समझौता होगा.CBI ने नीट-यूजी 2026 परीक्षा के आयोजन में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के संबंध में मामला दर्ज किया है. सीबीआई प्रवक्ता के अनुसार, यह मामला भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग से प्राप्त लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है.जांच एजेंसी ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि उसने इस परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक को लेकर एक एफआईआर दर्ज की है. इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी और सबूत मिटाने जैसे अपराधों के लिए भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. इसके साथ ही इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024 के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।NTA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “भारत सरकार ने इन आरोपों की व्यापक जांच के लिए मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्णय लिया है. NTA जांच ब्यूरो को पूरा सहयोग देगा और जांच के लिए आवश्यक सभी सामग्री, रिकॉर्ड और सहायता प्रदान करेगा.”इसमें आगे कहा गया, “दोबारा होने वाली परीक्षा की तारीखें और फिर से जारी किए जाने वाले एडमिट कार्ड के शेड्यूल सहित आगे की सभी सूचनाएं एजेंसी के आधिकारिक चैनलों के माध्यम से दी जाएंगी. उम्मीदवारों और अभिभावकों से अनुरोध है कि वे केवल इन आधिकारिक चैनलों पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर चल रही असत्यापित खबरों को नजरअंदाज करें.”

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