चुनाव से पहले अखिलेश और आजम खान की मुलाकात के क्या हैं सियासी मायने?

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रामपुर जेल में बंद पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात की. करीब 45 मिनट तक चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए आजम खान के खिलाफ कार्रवाई को अन्याय बताया. उन्होंने कहा, ‘आजम थे, आजम हैं और आजम रहेंगे.’ अखिलेश ने आरोप लगाया कि आजम खान और उनके परिवार पर जितना अन्याय हुआ है, उतना किसी दूसरे राजनीतिक परिवार के साथ नहीं हुआ होगा. उन्होंने यह भी कहा कि आजम खान को झूठे मुकदमों में फंसाया गया है.अखिलेश यादव की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो रही हैं और समाजवादी पार्टी को कांग्रेस के साथ सीटों का बंटवारा भी तय करना है. आजम खान भले ही जेल में बंद हैं, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनका राजनीतिक प्रभाव और पार्टी के भीतर उनकी भूमिका सपा के लिए अहम मानी जाती है.

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ऐसे में मुलाकात के दौरान आजम के प्रभाव वाली सीटों पर संभावित उम्मीदवारों और कांग्रेस के साथ गठबंधन के तहत पश्चिमी यूपी में सीटों के बंटवारे पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है.अखिलेश यादव और आजम खान के बीच मुलाकातों का सिलसिला नया नहीं है. 22 मार्च 2024 को लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से पहले अखिलेश यादव सीतापुर जेल में बंद आजम खान से मिलने पहुंचे थे. उस समय रामपुर लोकसभा सीट के उम्मीदवार और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा हुई थी. बताया गया था कि आजम खान ने अखिलेश को रामपुर से चुनाव लड़ने की सलाह दी थी. इसके बाद 23 सितंबर 2025 को जमानत मिलने के बाद आजम खान सीतापुर जेल से रिहा हुए. 8 अक्टूबर 2025 को अखिलेश यादव रामपुर स्थित उनके आवास पर उनसे मिलने पहुंचे थे, लेकिन दोहरे पैन कार्ड मामले में सजा होने के बाद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को फिर जेल जाना पड़ा.22 अक्टूबर 2026 को अखिलेश यादव एक बार फिर रामपुर पहुंचे. उन्होंने जिला जेल में आजम खान से मुलाकात की और इसके बाद उनके घर जाकर परिवार के सदस्यों से भी भेंट की. मुलाकात के बाद अखिलेश के बयान से साफ था कि वह आजम खान को पार्टी के महत्वपूर्ण नेताओं में गिनते हैं. उन्होंने कहा, ‘आजम थे, आजम हैं और आजम रहेंगे.’आजम खान की राजनीतिक अहमियत को देखते हुए इस मुलाकात को केवल हालचाल पूछने तक सीमित नहीं माना जा रहा है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी रणनीति बनानी है. इसके लिए आजम खान के राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में उनके प्रभाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर आने वाले समय में बातचीत होनी है.ऐसे में अखिलेश यादव अपने वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करके उन सीटों पर स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं, जहां पार्टी की दावेदारी और गठबंधन की जरूरतों के बीच तालमेल बैठाना होगा. आजम खान के प्रभाव वाले विधानसभा क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों के नाम और कांग्रेस को पश्चिमी यूपी में दी जाने वाली सीटों पर भी चर्चा होने की संभावना है.आजम खान का राजनीतिक प्रभाव खासतौर पर रामपुर, मुरादाबाद और बरेली क्षेत्र में माना जाता है. वह रामपुर से कई बार विधायक और सांसद रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे हैं. लंबे समय तक उन्हें समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में गिना जाता रहा है. रामपुर के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर उम्मीदवारों के चयन में भी उनकी राय महत्वपूर्ण मानी जाती रही है. सुल्तानपुर की इसौली और कासगंज की पटियाली विधानसभा सीट पर उनके समर्थन या पैरवी से टिकट मिलने की चर्चा रही है.अखिलेश यादव के रामपुर दौरे से पहले 19 अक्टूबर को एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रामपुर में रैली की थी. इस दौरान ओवैसी ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर मुस्लिम नेताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मुस्लिम नेताओं के जेल जाने पर सपा की प्रतिक्रिया दूसरे नेताओं के मामलों जैसी नहीं होती. ओवैसी लगातार मुस्लिम नेतृत्व और समाजवादी पार्टी की राजनीति को लेकर सवाल उठा रहे हैं. ऐसे में आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है.रामपुर में आजम खान से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने ओवैसी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘रावण भी एक दिन के लिए वेशभूषा बदला था और मां सीता का हरण करके लेकर गया था… ये लोग तो सालों से वेशभूषा बदलते नजर आ रहे.’

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