मुसलमानों के खिलाफ है वंदे मातरम,ओवैसी की पार्टी ने सरकार को दी चेतावनी
देश के महान कवि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर बिहार में महाभारत छिड़ गई है. दरअसल,मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने कुर्सी संभालने के बाद बिहार के शैक्षणिक संस्थानों के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ गाने को अनिवार्य कर दिया है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम इसका विरोध कर रही है.अब एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने इसको लेकर अब आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है।अख्तरुल ईमान ने कहा कि सरकार के इस फरमान को वापस लेने के लिए एआईएमआईएम के पांचों विधायक सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेंगे. उन्होंने कहा कि अगर देश हिन्दू राष्ट्र बन गया है तो सरकार इसकी घोषणा कर दे और फिर चाहे जो करना चाहे, करे. उन्होंने कहा कि देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने के लिए सरकार की ओर से यह सब षड्यंत्र किया जा रहा है. ईमान ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लिए ‘वंदे मातरम्’ गीत गाना आपत्तिजनक है. हम इस्लाम धर्म के आदर्शों का पालन करने वाले लोग हैं और उस पर आघात नहीं होने देंगे. हमलोग कदापि ‘वंदे मातरम्’ गाने वाले नहीं हैं. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए ईमान ने कहा, बिहार सरकार के विकास के सभी काम ठप पड़े हुए हैं और सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए ऐसे फरमान जारी कर हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच वैमनस्य को बढ़ाना चाहती है.अख्तरुल ईमान ने कहा कि सीएम की कुर्सी संभालते ही सम्राट चौधरी ने ‘वंदे मातरम्’ जैसे गीतों को शैक्षणिक संस्थानों के कार्यक्रमों में जबरन थोपकर समाज को तोड़ने का प्रयास किया है. उन्होंने कहा कि हम मूर्ति नहीं पूजते हैं, सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करते हैं. अब भाजपा की सरकार हमें दूसरे की वंदन करने के लिए फरमान जारी कर रही है, जिससे हमें दिक्कत है.दूसरी ओर,एआईएमआईएम विधायक सरवर आलम ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने जिस तरह से स्कूलों में बिहार सरकार द्वारा थोपे गए सूर्य नमस्कार के फरमान को हटाया, उसी तरह ‘वंदे मातरम्’ गीत को भी भाजपा सरकार ने थोपा है और उसे हटाने के लिए भी पार्टी के एक-एक नेता सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेंगे।

उन्होंने कहा, “हमारी कुछ धार्मिक मान्यताएं हैं। हम मूर्तिपूजा नहीं करते, बल्कि सिर्फ एक ईश्वर की इबादत करते हैं। जब हम दूसरों की आस्था का सम्मान करते हैं, तो हमारी मान्यताओं का भी सम्मान होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि सरकार के ऐसे “फरमान” को मानने के लिए किसी पर दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।उन्होंने राज्य सरकार पर पेपर लीक जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए ऐसे विवाद खड़े कर रही है। अख्तरूल ईमान ने मांग की कि वंदे मातरम गायन को वैकल्पिक बनाया जाए। उनका कहना था कि जो लोग इसे गाना चाहते हैं, वे गाएं, लेकिन जो नहीं गाना चाहते, उन पर कोई दबाव न डाला जाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने उर्दू शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया और नए मानक मंडल में उर्दू को शामिल करने की मांग की।अख्तरूल ईमान ने जदयू विधायक गोपाल अग्रवाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ जाने के बाद उनकी भाषा बदल गई है और वे “शेरशाहबादी” समाज को निशाना बना रहे हैं। वहीं विधायक सरवर आलम ने राज्य में बढ़ते अपराध और नशे की समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार की नशे पर कोई पकड़ नहीं है, जिसके कारण युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं और अपराध बढ़ रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो बिहार की हालत “उड़ता पंजाब” जैसी हो सकती है।
