जंग को लेकर अमेरिकी जनरल की चेतावनी,इजराइल के पास नहीं है पर्याप्त नौसैनिक ताकत
यूरोप में तैनात एक टॉप अमेरिकी मिलिट्री कमांडर ने पेंटागन को वॉर्निंग दी है कि ईरान के साथ चल रहे कॉन्फ्लिक्ट की वजह से अमेरिकी मिलिट्री स्टॉक पर भारी प्रेशर पड़ रहा है, जिससे वाशिंगटन को जल्द ही मिसाइल डिफेंस रिसोर्सेज को लेकर मुश्किल फैसले लेने पड़ सकते हैं. द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यूएस यूरोपियन कमांड के चीफ जनरल एलेक्सस ग्रिंकेविच ने इसी हफ्ते पेंटागन ऑफिशियल्स को बताया कि अमेरिका के पास इजराइल पर होने वाले ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल अटैक्स को रोकने के लिए पूरे नेवल रिसोर्सेज नहीं हैं. यह खुलासा ऐसे टाइम पर आया है जब मिडिल ईस्ट में महीनों की मिलिट्री एक्टिविटी के बाद अमेरिका के एडवांस्ड इंटरसेप्टर मिसाइलों के स्टॉक में कमी को लेकर टेंशन बढ़ रही है.रिपोर्ट के मुताबिक जनरल ग्रिंकेविच ने वॉर्न किया कि अगर रीजन में एक और अमेरिकी नेवी डिस्ट्रॉयर नहीं भेजा गया,

तो यूरोपियन कमांड को आखिरकार अमेरिकी इंटरेस्ट्स की सेफ्टी और इजराइल के लिए ईरानी अटैक्स के खिलाफ मिसाइल डिफेंस ऑपरेशन जारी रखने के बीच चुनना पड़ेगा. पेंटागन ने इस रिपोर्ट पर कमेंट करने से मना कर दिया, जबकि यूएस यूरोपियन कमांड ने भी रिस्पॉन्स रिक्वेस्ट का जवाब नहीं दिया. वाशिंगटन में इजराइली एम्बेसी के स्पोक्सपर्सन से भी तुरंत कॉन्टैक्ट नहीं हो सका.घटते मिसाइल स्टॉक को लेकर टेंशन पहले भी सामने आ चुकी है. इसी महीने पहले द न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट दी थी कि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर अटैक्स रोकने की बड़ी वजहों में से एक अमेरिकी एयर डिफेंस स्टॉक में भारी कमी का रिस्क था. उस रिपोर्ट में कहा गया था कि जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने सलाह दी थी कि भले ही ईरान के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशंस को बढ़ाना ऑपरेशनली पॉसिबल हो, लेकिन इससे यूएस सेंट्रल कमांड के पास मौजूद इंटरसेप्टर मिसाइल स्टॉक में बड़ी कमी आ सकती है.सीएनएन के हवाले से डिपार्टमेंट ऑफ वॉर की एक इंटरनल रिपोर्ट में पता चला कि ईरान के साथ जंग के दौरान आर्मी ने कई तरह की प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलों का भारी यूज किया है, जिससे आगे किसी बड़े कॉन्फ्लिक्ट की सिचुएशन में “नियर-टर्म रिस्क” पैदा हो सकता है. सीएनएन के मुताबिक, इनमें से कई सिस्टम्स को दोबारा भरने में कई साल लग सकते हैं. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के एनालिसिस के मुताबिक, पिछले सात हफ्तों की फाइटिंग में अमेरिका ने अपने एडवांस्ड मिसाइल स्टॉक का एक बड़ा हिस्सा यूज कर लिया है. करीब 45 पर्सेंट प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल, कम से कम आधे THAAD इंटरसेप्टर, लगभग 50 पर्सेंट पैट्रियट इंटरसेप्टर, करीब 30 पर्सेंट टॉमहॉक क्रूज मिसाइल, 20 पर्सेंट से ज्यादा जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल और लगभग 20 पर्सेंट SM-3 और SM-6 इंटरसेप्टर मिसाइलें हैं.द वॉशिंगटन पोस्ट ने यह भी बताया कि ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल अटैक्स से इजराइल की सेफ्टी के लिए अमेरिका ने खुद इजराइल के मुकाबले कहीं ज्यादा एडवांस्ड इंटरसेप्टर मिसाइलें दागी हैं. यह रिपोर्ट वाशिंगटन के सामने बढ़ती स्ट्रैटेजिक चैलेंज को दिखाती है, जहां एक तरफ रीजनल एलाइज को सपोर्ट करना है, तो दूसरी तरफ फ्यूचर की पॉसिबल जरूरतों के लिए पर्याप्त मिसाइल स्टॉक बचाकर रखना भी जरूरी है.
