OTT की ये 10 कहानियां बदल देंगी गुरु और शिष्य के रिश्ते की परिभाषा,जरूर देखें

 OTT की ये 10 कहानियां बदल देंगी गुरु और शिष्य के रिश्ते की परिभाषा,जरूर देखें
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जब भी ‘टीचर्स डे’ की बात आती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले स्कूल की वो पुरानी घंटी, हाथ में सफेद चॉक लिए सख्त टीचर और डर के साए में थमाए जाने वाले रिपोर्ट कार्ड्स की तस्वीर खिंच जाती है. लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, समझ आता है कि जिंदगी का असली सिलेबस तो किताबों में कभी छपा ही नहीं था. जिंदगी के सबसे कड़वे और असरदार इम्तिहानों में हाथ थामने वाले गुरु कभी किसी कोचिंग के गलियारे में मिल जाते हैं, कभी कोर्ट के कटघरे में, तो कभी सुर और ताल की सख्त साधना के बीच.ओटीटी की दुनिया ने ‘गुरु-शिष्य’ के इस रिश्ते को चारदीवारी से निकालकर एक ऐसा नया कैनवास दिया है, जो सीधे दिल को छूता है.

इस शिक्षक दिवस के मौके पर, हमने तैयार की है ऐसी ही 10 चुनिंदा और असरदार वेब सीरीज की खास लिस्ट, जो ये साबित करती हैं कि सबसे बेहतरीन शिक्षक वो हैं जो आपको सिर्फ पास होना नहीं, बल्कि जिंदगी को जीना सिखाते हैं।रॉकेट बॉयज़-सोनी लिव की यह सीरीज दिखाती है कि जब कोई बड़ा विजनरी किसी नौजवान की पीठ पर हाथ रख दे, तो इतिहास कैसे रचा जाता है. डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने सिर्फ देश के लिए एटॉमिक रिसर्च नहीं की, बल्कि उन्होंने विक्रम साराभाई जैसे शर्मीले और शांत वैज्ञानिक के भीतर छुपी लीडरशिप को पहचाना. भाभा ने साराभाई को सिखाया कि सिस्टम की सुस्ती और अंग्रेजों के जमाने की सोच से लड़कर अपने सपनों को सच कैसे किया जाता है. आगे चलकर साराभाई ने यही भरोसा एक नौजवान एपीजे अब्दुल कलाम पर जताया. ये सीरीज साफ करती है कि एक सच्चा गुरु वही है, जो अपने शागिर्द को खुद से भी आगे ले जाने का हौसला रखता हो।टाइटन स्टोरी-एमएक्स प्लेयर पर आई ये डॉक्यू-ड्रामा सीरीज ठीक ‘रॉकेट बॉयज़’ वाले मेंटरशिप के जज्बे को एक नए मैदान पर ले जाती है. फर्क सिर्फ इतना है कि यहां मामला साइंस का नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट के अखाड़े का है. जब टाटा ग्रुप के भीतर एक नई देसी घड़ी ‘टाइटन’ बनाने की शुरुआत हुई, तो किसी को यकीन नहीं था कि यह विदेशी ब्रांड्स के सामने टिक पाएगी. ऐसे दौर में जेआरडी टाटा ने जेरेक्सेस देसाई जैसे मैनेजर्स को सिर्फ बिजनेस करना नहीं सिखाया, बल्कि यह भरोसा दिया कि ‘अगर तुम्हारा आइडिया सही है, तो पूरी दुनिया के खिलाफ जाकर भी रिस्क लो।. कॉर्पोरेट की बेरहम दुनिया में ऐसा हौसला देने वाले मेंटर किसी फरिश्ते से कम नहीं होते।जगमे-संगीतमप्राइम वीडियो पर आई यह सीरीज साउथ इंडियन शास्त्रीय संगीत के बैकड्रॉप पर बनी है. प्रकाश राज ने इसमें एक ऐसे बुजुर्ग गुरु का रोल निभाया है जो अपने पोते को अपनी संगीत परंपरा सौंपना चाहते हैं. लेकिन यहां कोई जबरदस्ती नहीं है. दादा अपने पोते को रियाज कराते हुए यह सिखाते हैं कि किसी कला को जिंदा रखने के लिए हुनर से ज्यादा सब्र और प्यार की जरूरत होती है. ये कहानी दिखाती है कि जब पीढ़ियों का फासला मिटाकर कोई बड़ा आपको कुछ सिखाता है, तो वो हुनर जिंदगी भर साथ रहता है।बंदिश बैंडिट्स-प्राइम वीडियो की इस सीरीज में संगीत को एक तपस्या की तरह दिखाया गया है. पंडित राधेमोहन राठौड़ (नसीरुद्दीन शाह) का अंदाज बेहद कड़क और अनुशासन से भरा है. जब उनका पोता राधे अपनी आवाज तराशने की कोशिश करता है, तो पंडित जी उसे सिर्फ सुर लगाना नहीं सिखाते, बल्कि यह समझाते हैं कि जब तक मन का घमंड खत्म नहीं होगा, तब तक गले से सच्चा संगीत निकल ही नहीं सकता. उनका कड़क मिजाज शुरुआत में बुरा लगता है, लेकिन बाद में समझ आता है कि किसी भी फन में माहिर होने के लिए एक सख्त गुरु की डांट कितनी जरूरी होती है।कोटा फैक्ट्री-नेटफ्लिक्स का ये शो आज हर उस छात्र के दिल के करीब है जो कभी किसी बड़े एग्जाम की तैयारी में पिसा हो. यहां जीतू भैया सिर्फ फिजिक्स के टीचर नहीं हैं, बल्कि वो उन बच्चों के बड़े भाई और दोस्त हैं जो कोटा के कमरों में अकेले रोते हैं. जब वैभव पढ़ाई के बोझ और डिप्रेशन में घिर जाता है, तो जीतू भैया उसे कोई किताबी ज्ञान नहीं देते. वो सीधे समझाते हैं कि 21 दिन में अपनी आदतें कैसे बदली जाती हैं और एग्जाम सिर्फ एक पड़ाव है, पूरी जिंदगी नहीं. आज के दौर में हर स्टूडेंट को ऐसे ही एक जीतू भैया की तलाश होती है।एस्पिरेंट्स-प्राइम वीडियो की इस सीरीज के ‘संदीप भैया’ (सनी हिंदुजा) का किरदार सोशल मीडिया पर क्यों छाया रहा? क्योंकि वो उस गुरु का चेहरा हैं जो खुद इम्तिहान में फेल हो रहा है, लेकिन अपने जूनियर्स को टूटने नहीं देता. दिल्ली के राजेंद्र नगर में जब अभिलाष यूपीएससी के दबाव में बिखरने लगता है, तो संदीप भैया एक चाय की टपरी पर खड़े होकर उसे जिंदगी का ऐसा पाठ पढ़ाते हैं जो किसी कोचिंग में नहीं मिलता. वो सिखाते हैं कि मेहनत का फल आज नहीं तो कल जरूर मिलता है, बस खुद पर से भरोसा नहीं उठना चाहिए.क्रिमिनल जस्टिस: ए फैमिली मैटर-जियोहॉटस्टार की इस सीरीज में माधव मिश्रा (पंकज त्रिपाठी) कोई हाई-फाई वकील नहीं हैं, लेकिन इंसानियत के मामले में उनका कोई सानी नहीं है. जब वो अपनी जूनियर शिवानी के साथ मिलकर केस लड़ते हैं, तो वो उसे सिर्फ कोर्ट के दांव-पेंच या कानून की धाराएं नहीं रटाते. वो उसे समझाते हैं कि कटघरे में खड़े मुजरिम के पीछे भी एक लाचार इंसान और उसका परिवार होता है. एक सीनियर अपने जूनियर को सख़्त पेशे में भी इंसानियत और ईमानदारी कैसे सिखाता है, यह माधव मिश्रा के किरदार से बेहतर कोई नहीं बता सकता। मिथ्या-ज़ी5 की ये थ्रिलर सीरीज बाकी कहानियों से थोड़ी अलग और डार्क है। प्रोफेसर जूही (हुमा कुरैशी) और उनकी स्टूडेंट रिया (अवंतिका दसानी) के बीच की ये कहानी दिखाती है कि जब टीचर और स्टूडेंट के रिश्ते में अहंकार, झूठ और बदला घुस जाता है, तो सब कुछ कैसे तबाह हो सकता है. ये सीरीज एक उल्टी मगर जरूरी सीख देती है कि एक शिक्षक को अपने पद और प्रभाव का कभी गलत फायदा नहीं उठाना चाहिए, क्योंकि भरोसा टूटने पर रिश्ते अपराध की हद तक पहुंच जाते हैं।आदर्श बाल विद्यालय-प्राइम वीडियो की यह हल्की-फुल्की सीरीज एक सरकारी स्कूल की खट्टी-मीठी दुनिया में ले जाती है. यहां के प्रिंसिपल ज्ञानेश्वर त्रिपाठी बच्चों पर नंबर लाने का दबाव नहीं बनाते, बल्कि वो उन्हें एक अच्छा इंसान बनने की सीख देते हैं. जब कोई बच्चा गलती करता है, तो उसे पीटने या जलील करने के बजाय वो प्यार से समझाते हैं कि गलती सुधारना ही सबसे बड़ी समझदारी है. यह शो याद दिलाता है कि स्कूल का असली काम सिर्फ डिग्रियां बांटना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर का डर खत्म करना है।सम लेसन्स आरन्ट टॉट इन क्लासरूम्स-सोनी लिव की यह डॉक्यूमेंट्री साफ तौर पर कहती है कि इंसान की सबसे बड़ी पाठशाला यह समाज और उसकी हकीकतें हैं. जब हम अपने आसपास के सिस्टम, इतिहास और असमानता पर सवाल उठाना शुरू करते हैं, तो हमारे भीतर का नजरिया अपने आप बदलने लगता है. ये डॉक्यूमेंट्री हर उस शख्स के लिए एक सीख है जो सिर्फ सुनी-सुनाई बातों को सच मान लेता है. यह शो सिखाता है कि सवाल पूछने की हिम्मत ही इंसान को सच के करीब ले जाती है.इस टीचर्स डे पर सिर्फ अपने पुराने स्कूल के मास्टरों को ही याद मत कीजिए, बल्कि फोन उठाइए और उस हर सीनियर, कलीग या दोस्त को एक मैसेज जरूर भेजिए जिसने आपके बुरे वक्त में आपका हौसला बढ़ाया था. क्योंकि असली गुरु वही है, जो आपको उस वक्त संभाल ले जब पूरी दुनिया आपका साथ छोड़ चुकी हो।

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