अमेरिका-ईरान के वजह से इंडिया में बढ़ी आम लोगों की परेशानी,कई वस्तुओं की बढ़ी डिमांड

 अमेरिका-ईरान के वजह से इंडिया में बढ़ी आम लोगों की परेशानी,कई वस्तुओं की बढ़ी डिमांड
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते संकट और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर जल्द ही आम भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है. अगर कच्चा तेल महंगा बना रहा और LPG की सप्लाई सीमित रहती है, तो घरों की पेंटिंग से लेकर रोजमर्रा के कई सामान महंगे हो सकते हैं. कई उपभोक्ता कंपनियों की लागत पहले ही बढ़ने लगी है. कंपनियां इस दुविधा में हैं कि बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डालें या नहीं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर कीमतें बढ़ती भी हैं, तो कुछ समय बाद बढ़ेंगी क्योंकि कंपनियां जानती हैं कि ग्राहक तुरंत ज्यादा कीमत नहीं झेल पाएंगे.ईरान, अमेरिका और इजराइल से जुड़े संघर्ष को अब 15 दिन हो चुके हैं. मनीकंट्रोल के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है, तो वित्त वर्ष 2027 में महंगाई बढ़ सकती है.

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लोगों को इन सेक्टर्स में ज्यादा असर देखने को मिलेगा.पेंट बनाने में कच्चे तेल से बनने वाले रसायनों का बड़ा इस्तेमाल होता है. करीब 60% लागत तेल से जुड़े उत्पादों पर निर्भर करती है. इसलिए अगर कच्चे तेल की कीमत ज्यादा समय तक ऊंची रहती है, तो अप्रैल से पेंट की कीमतें 2% से 5% तक बढ़ सकती हैं. हालांकि कंपनियां अभी मार्च तक इंतजार कर रही हैं ताकि तेल की कीमतों की स्थिति साफ हो सके.भारत खाने के तेल का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय सप्लाई में गड़बड़ी होने पर कीमतें बढ़ सकती हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक अगर रेड सी और Suez Canal जैसे समुद्री रास्तों पर दिक्कत होती है, तो तेल की खेप देर से पहुंचेगी और लॉजिस्टिक लागत बढ़ जाएगी.सिंथेटिक कपड़े बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पेट्रोकेमिकल्स से बनते हैं, जो कच्चे तेल से तैयार होते हैं. इस सेक्टर की लगभग 70-80% लागत तेल की कीमतों से जुड़ी होती है. इसलिए तेल महंगा होने पर स्पोर्ट्स जर्सी, योगा पैंट, कारपेट और इंडस्ट्रियल फैब्रिक जैसे उत्पाद महंगे हो सकते हैं.पैकेज्ड फूडपाम ऑयल की कीमतें मार्च की शुरुआत में करीब 4% बढ़ चुकी हैं. इसका असर पैकेज्ड फूड उद्योग पर पड़ सकता है. पाम ऑयल नमकीन बनाने वाली कंपनियों की लागत का 1525% और बिस्किट कंपनियों की लागत का लगभग 45% हिस्सा होता है.वेस्ट एशिया के संकट के कारण विमान ईंधन यानी ATF की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं. इसी वजह से Air India, Air India Express और IndiGo ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का फैसला किया है. घरेलू फ्लाइट टिकट पर फ्यूल सरचार्ज लगाया जाएगा, जबकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर भी अतिरिक्त शुल्क बढ़ाया गया है.साबुन, शैंपू और डिटर्जेंट जैसे पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स भी कच्चे तेल से बने रसायनों पर निर्भर होते हैं. इनकी कच्चे माल की लागत का लगभग 30-40% हिस्सा तेल से जुड़ा होता है. इसके अलावा पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक जैसे HDPE और PET भी पेट्रोलियम से बनते हैं. जब कच्चा तेल महंगा होता है तो इनकी कीमत भी बढ़ जाती है.अगर युद्ध लंबा चलता है तो ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी कीमतें बढ़ सकती हैं. टायर बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई कच्चे माल जैसे सिंथेटिक रबर, कार्बन ब्लैक और प्रोसेसिंग ऑयल कच्चे तेल से बनते हैं. टायर उद्योग की कुल कच्चे माल की लागत का लगभग 60-70% हिस्सा तेल से जुड़ा होता है. उद्योग के अनुसार टायर कंपनियां इस महीने के अंत तक कीमतों में 1.5-2% तक बढ़ोतरी कर सकती हैं, जबकि कुछ खास टायरों की कीमतें 3-8% तक बढ़ सकती हैं.

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