चूड़ा-दही वाली बिहार में शुरू हुई पॉलिटिक्स,मकर संक्रांति बाद इस बार भी बदलेगा समीकरण
मकर संक्रांति पर हर साल की तरह इसबार भी बिहार का सियासी चूड़ा-दही भोज चर्चा में है. राजनीतिक दल और नेता पार्टी कार्यालयों और आवासों पर पारंपरिक भोज का आयोजन कर रहे हैं, जिसको लेकर नेताओं को न्योता दिया जा रहा है. बिहार के इस खास भोज पर पूरे देश के नेताओं की नजर होती है, क्योंकि कई बार भोज के बाद बिहार की सियासत बदल चुकी है.गयाजी के तिलकुट, दियारा की दही और भागलपुरी चूड़ा खाते ही नेताओं के मन बदलने लगते हैं. कई महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले पर मुहर लग जाती है. राज्य में सरकार तक गिर जाती है. ऐसा भी देखने को मिला है कि जिसके यहां भोज का आयोजन होता है, वही सत्ता से बाहर हो जाते हैं. इसलिए इस भोज को चूड़ा-दही पॉलिटिक्स भी कहा जाता रहा है।इस साल का मकर संक्रांति खास मानी जा रही है, क्योंकि राजद में अंदरूनी सियासत और पारिवारिक समीकरणों के बीच तेज प्रताप यादव अलग राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. तेज प्रताप इसबार चूड़ा-दही का भोज दे रहे हैं. पहला और बड़ा सार्वजनिक सियासी आयोजन है. तेज प्रताप यादव ने बीजेपी, जदयू और राजद के नेताओं को निमंत्रण दिया है।

नितिन नबीन हर वर्ष अपने सरकारी आवास पर मकर संक्रांति के अवसर पर चूड़ा-दही भोज का आयोजन करते रहे हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद इस वर्ष नितिन नबीन के द्वारा 16 जनवरी को अपने सरकारी आवास पर चूड़ा-दही भोज का आयोजन किया गया है. गठबंधन के सभी घटक दलों के बड़े नेताओं व कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया है.बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा कई वर्षों से मकर संक्रांति के अवसर पर भोज का आयोजन करते रहे हैं. उप मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने सरकारी आवास पर वह चूड़ा-दही भोज का आयोजन करते हैं. इस बार भी विजय सिन्हा के द्वारा 13 जनवरी को भोज का आयोजन किया जाएगा. मकर संक्रांति के अवसर पर लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान हर वर्ष भोज का आयोजन करते थे. चिराग पासवान की पार्टी के अध्यक्ष बनने के बाद यह परंपरा उनके द्वारा भी निभाई जा रही है. चिराग पासवान दिल्ली और पटना में इसका आयोजन करते हैं. पटना में 15 जनवरी को पार्टी के प्रदेश कार्यालय पटना में भोज का आयोजन किया गया है।जिस वक्त रामविलास पासवान भोज का आयोजन किए थे, उसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने थे. उस वक्त तक नीतीश कुमार एनडीए के साथ थे. एनडीए अपना पैठ बनाए रखना चाह रही थी. बिहार चुनाव 2015 में नीतीश कुमार एनडीए छोड़ महागठबंधन के साथ चुनाव लड़े थे और सीएम पद की शपथ ली थी.बिहार में महागठबंधन की सरकार बने हुए दो साल ही हुए थे कि मकर संक्रांति 2017 में एक बार फिर सियासी बदलाव देखने को मिला. उस समय राबड़ी देवी आवास पर चूड़ा-दही भोज का आयोजन किया गया था. सीएम नीतीश कुमार इस भोज में शामिल हुए थे. लालू यादव नीतीश कुमार के साथ सरकार बनाकर काफी खुश थे.भोज के दौरान लालू यादव ने नीतीश कुमार को दही का टीका लगाया था. लालू यादव ने इसके माध्यम से संदेश दिया था कि नीतीश-लालू का साथ हमेशा रहने वाला है. नीतीश कुमार ने भी मीडिया से बात करते हुए कहा था कि अब बीजेपी का जादू नहीं चलने वाला है, लेकिन कुछ महीनों के बाद ही राज्य में महागठबंधन की सरकार गिर गयी. नीतीश कुमार एनडीए के साथ मिलकर सरकार बनायी.मकर संक्रांति का भोज राजनीतिक दलों के नेताओं के लिए मायने रखता है. यही वह समय होता है, जब चूड़ा-दही की मिठास से गिले शिकवे भुला देते हैं और फिर से घर वापसी कर लेते हैं या फिर नयी पार्टी में शामिल हो जाते हैं. मंकर संक्रांति 2018 में JDU नेता वशिष्ठ नारायण सिंह के घर पर भोज का आयोजन किया गया था. इसमें तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी शामिल हुए थे. इसी भोज के डेढ़ महीने बाद अशोक चौधरी JDU में शामिल हो गए थे।
