मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण के लिए तेज हुई बहस,पक्ष-विपक्ष में जमकर हुआ बहस
लोकसभा में शुरू हुए तीन दिवसीय विशेष संसद सत्र में महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने के लिए लाए गए तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर जोरदार बहस और हंगामा रहा. केंद्र सरकार ने संविधान विधेयक, 2026, संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 और डेलिमिटेशन विधेयक, 2026 पेश किए.इन विधेयकों का मकसद 2023 के नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए लोकसभा की सीटें बढ़ाना और महिला आरक्षण को डेलिमिटेशन के साथ जोड़ना है.बीते दिन सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए विपक्षी सदस्यों पर निशाना साधा।समाजवादी पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव के बयान पर पीएम मोदी ने कहा, “मैं आपका आभारी हूं कि आपने मेरी पहचान करा दी. अखिलेश मेरे मित्र हैं तो कभी-कभी मेरी मदद कर देते हैं.” पीएम ने महिला आरक्षण को राष्ट्रीय हित का मुद्दा बताते हुए विपक्ष से सहयोग की अपील की और कहा कि यह विधेयक महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का ऐतिहासिक कदम है.धर्मेंद्र यादव ने कहा कि हमने महिला बिल का कभी विरोध नहीं किया, मगर सरकार इसकी आड़ में परिसीमन कर भेदभाव कर रही है. नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन को लेकर 3 दिवसीय संसद के विशेष बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच काफी नोंक झोंक और छींटाकशी भी देखी गई. प्रधानमंत्री ने जहां लोकसभा में बोलते हुए विपक्षी पार्टियों को गारंटी दी कि यदि वो इसका समर्थन करते हैं तो वो उनको पूरी क्रेडिट देने को तैयार है.समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि, ये विधायक की आड़ में परिसीमन, जिसे विपक्ष कभी स्वीकार नहीं करेगा. इस सवाल पर कि, अखिलेश यादव ने मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण देने की मांग उठाई है, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को क्यों नहीं आरक्षण मिलना चाहिए. क्या वो दलित शोषित नहीं हैं.इस सवाल पर कि पीएम ने कहा कि एक बार बिल तो पास होने दें बाद में देख लेंगे. इस पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि, जब एक बार बिल पास हो जाए तब बाद में कुछ नहीं होता. सदन में पीएम मोदी के भाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी की, जिसके कारण स्पीकर ओम बिरला को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा. इस मुद्दे पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि, विधेयक सर्वसम्मति से पास होगा।केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने महिला आरक्षण विधेयक पर समर्थन जताते हुए कहा कि, इस विधेयक के पास होने के बाद संसद की कुल सीटें 816 हो जाएंगी और महिलाओं को 33.4 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, जिसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) महिलाओं को भी जगह दी जाएगी.अठावले ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस विधेयक का समर्थन करें, क्योंकि यह महिलाओं को सशक्त बनाएगा. उन्होंने कहा कि बिल महिलाओं के लिए सकारात्मक है और विपक्ष चाहे वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन हों या कांग्रेस सबको समर्थन करना चाहिए.जबकि, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने विधेयकों का पुरजोर विरोध किया. उन्होंने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी इसकी समर्थक है, लेकिन डेलिमिटेशन को जनगणना से अलग करने का फैसला गलत है. यादव ने मांग की कि मुस्लिम और पिछड़ी वर्ग की महिलाओं को भी अलग से कोटा दिया जाए. उन्होंने कहा, “बिना जनगणना के यह विधेयक लागू नहीं होना चाहिए. सदन में यादव के इस बयान पर गृह मंत्री अमित शाह ने तीखा पलटवार किया.शाह ने कहा, “अखिलेश यादव ने मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की बात की. यह असंवैधानिक है. धर्म के आधार पर आरक्षण का सवाल ही नहीं उठता. यह सरकार कभी इसे स्वीकार नहीं करेगी.” शाह ने सपा पर जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करने का आरोप लगाया. यादव के बयान के बाद सदन में जोरदार हंगामा मचा, जिसे नियंत्रित करने के लिए स्पीकर को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ा.कांग्रेस, सपा, डीएमके समेत कई विपक्षी दल ने विधेयकों का विरोध किया.

उन्होंने मांग की कि पहले जनगणना हो, फिर डेलिमिटेशन हो. डीएमके सांसद टीआर बालू ने भी डेलिमिटेशन बिल का विरोध किया.कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयकों का परिचय देते हुए कहा कि ये संशोधन 2023 के महिला आरक्षण कानून को 2029 के बाद लागू करने के लिए जरूरी हैं. लोकसभा की सीटें बढ़ाने और नए परिसीमन के साथ महिला आरक्षण को लागू करने का लक्ष्य है.तीन दिवसीय विशेष सत्र में इन विधेयकों पर विस्तृत चर्चा और मतदान होने की उम्मीद है. चर्चा यह भी है कि इस बिल के परिणाम 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदलने वाला साबित भी हो सकता है।प्रियंका ने गृह मंत्री अमित शाह पर राजनीतिक कुटिलता का आरोप भी लगाया और तंज कसते हुए कहा,यदि आज चाणक्य जिंदा होते तो आपकी कुटिलता से चौंक जाते।उनका कहना था कि सच्चाई यह है कि लोकसभा में हो रही चर्चा महिला आरक्षण विधेयक पर ही नहीं है, बल्कि परिसीमन पर भी है.उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने जिस ‘‘राजनीति की बू’’ का जिक्र किया, वह इस विधेयक में पूरी तरह घुली हुई है।प्रियंका ने आरोप लगाया कि सरकार यह विधेयक लाई है क्योंकि वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को भागीदारी नहीं देना चाहती है.कांग्रेस नेता ने दावा किया कि अगर यह विधेयक पारित होता है तो समझ लीजिए कि देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा.कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अगर प्रधानमंत्री ने यह ऐतिहासिक कदम ईमानदारी से उठाया होता तो पूरा सदन इसका समर्थन करता.’’उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप महिलाओं का सम्मान करते हैं तो महिलाओं का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं करते तथा यह कदम आपके पद और गरिमा के अनुकूल नहीं है।
