मिडिल-ईस्ट में गहराया जंग का बादल!ईरान पर हावी हुआ अमेरिका

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ईरान संकट सुलझाने के लिए जिनेवा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही. इसके बाद मध्य-पूर्व एशिया में बदलते हालात को देखते हुए चीन और कनाडा जैसे कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह जारी कर दी है. भारत के अलावा पोलैंड, स्वीडन आदि देश पहले ही ऐसी एडवाइजरी जारी कर चुके हैं. उधर ट्रंप प्रशासन ने इजराइल में अमेरिकी दूतावास के स्टाफ को देश छोड़ने का सुझाव दिया है.ईरान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच चीन ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने की सलाह दी है. चीन सरकार ने कहा है कि ईरान पर अमेरिकी हमलों का खतरा है और जोखिम काफी बढ़ गया है, ऐसे में नागरिक फिलहाल ईरान की यात्रा से बचें. चीनी विदेश मंत्रालय ने ईरान में मौजूद सभी चीनी नागरिकों को सलाह दी है कि वे सुरक्षा सावधानियों को ध्यान में रखें और जितनी जल्दी हो सके, वहां से निकल जाएं।कनाडा ने भी ईरान में मौजूद अपने सभी नागरिकों से जल्द से जल्द वहां से निकलने की अपील की है. सरकारी बयान में ईरान में रह रहे कनाडाई नागरिकों से कहा गया कि मौजूदा तनाव की वजह से इलाके में हालात अच्छे नहीं हैं. बिना किसी चेतावनी के संघर्ष शुरू हो सकता है. अगर आप सुरक्षित तरीके से ईरान छोड़ सकते हैं, तो अभी वहां से निकल जाएं।उधर इजराइल स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी अपने कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण अलर्ट जारी किया है. अमेरिकी राजदूत माइक हक्काबी ने शुक्रवार सुबह दूतावास के स्टाफ को ईमेल भेजकर कहा कि जो लोग देश छोड़ना चाहते हैं, वो आज ही ऐसा करें. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राजदूत ने कर्मचारियों से कहा कि वे वॉशिंगटन जाने वाली किसी भी उपलब्ध फ्लाइट में अपनी बुकिंग करा लें. यह एडवाइजरी ऐसे समय में आई हैं जब पूरे मिडिल ईस्ट में बड़ी जंग छिड़ने की आशंका गहरा रही है. अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी करते हुए बड़ी सेना तैनात कर दी है. वहीं ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने उसके निशाने पर होंगे, जिससे हजारों अमेरिकी सैनिकों की जान खतरे में पड़ सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि ईरान अपना यूरेनियम एनरिचमेंट और लंबी दूरी का मिसाइल प्रोग्राम पूरी तरह रोक दे और हमास जैसे सशस्त्र गुटों को समर्थन देना बंद कर दे. वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है. ट्रंप ने 19 फरवरी को ईरान को समझौता करने के लिए 15 दिनों की डेडलाइन दी थी, जिसकी अवधि अब खत्म होने जा रही है।वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के प्रतिनिधियों ने वार्ता के दौरान ईरान के सामने बेहद सख्त शर्तें रखी हैं. इसमें ईरान के तीन मुख्य परमाणु केंद्रों को नष्ट करना और संवर्धित यूरेनियम का पूरा भंडार अमेरिका को सौंपने की मांग शामिल है. हालांकि शुक्रवार को ईरान ने साफ कर दिया कि समझौते को संभव बनाने के लिए अमेरिका को अपनी सख्त मांगों को छोड़ना होगा. इस बयानबाजी ने जंग टालने की आखिरी कोशिश के रूप में देखी जा रही वार्ता से पैदा हुई उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

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