बांग्लादेश वापस जाएंगी शेख हसीना,जानिए आखिर क्यों लिया ऐसा फैसला?

 बांग्लादेश वापस जाएंगी शेख हसीना,जानिए आखिर क्यों लिया ऐसा फैसला?
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बांग्लादेश में तख्तापलट के 2 साल बाद शेख हसीना वापसी की तैयारी में है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वह दिसंबर में वापस लौटना चाहती हैं. ढाका लौटने के सवाल पर समाचार एजेंसी एएफपी से बात करते हुए हसीना ने कहा, मैं जानती हूं कि मुझे वहां पर फांसी देने की तैयारी है. इसके बावजूद मैं वहां जाऊंगी, क्योंकि मेरे अपने लोग मुझे बुला रहे हैं.2024 में शेख हसीना सरकार का तख्तापलट हो गया था, जिसके बाद विशेष विमान से उन्हें भारत लाया गया था. हसीना तब से यहीं हैं. उनके खिलाफ 150 से ज्यादा केस दर्ज हैं. 10 मामलों में उन्हें दोषी भी ठहराया जा चुका है.बांग्लादेश की एक अदालत ने इसी साल मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में हसीना को फांसी की सजा सुनाई थी. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि हसीना वापस बांग्लादेश क्यों लौट रही हैं?पहला मामला नैरेटिव का है. शेख हसीना अपनी जिंदगी और सियासत के आखिरी दौर में हैं. उन्होंने अपना पूरा जीवन बांग्लादेश को समर्पित किया है। उनके पिता बांग्लादेश के संस्थापक थे. शेख हसीना अपने जीवन का आखिरी वक्त अपने मुल्क में बिताना चाहती हैं. साथ ही, वह देश छोड़कर भागने वाली नेता की अपनी छवि को भी खत्म करना चाहती हैं.शेख हसीना का अब भी बांग्लादेश में मजबूत जनाधार है. दिसंबर 2024 में एक सर्वे में 57 प्रतिशत लोगों ने शेख हसीना की पार्टी को बांग्लादेश में लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया. फरवरी 2026 के प्रथम आलो सर्वे के मुताबिक 25 प्रतिशत लोगों ने खुलकर आवामी लीग पर बैन के खिलाफ सवाल उठाया.

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हसीना की छवि धर्मनिरपेक्ष नेता की है. बांग्लादेश के शहरी इलाकों में शेख हसीना काफी लोकप्रिय हैं. शेख हसीना की पूरी लड़ाई कट्टरपंथी जमात के खिलाफ रही है. हाल के दिनों में बांग्लादेश में जमात का जुल्म काफी ज्यादा बढ़ गया है. शेख हसीना की पार्टी लगातार इसे मुद्दा बना रही है.शेख हसीना के जाने के बाद अंतरिम सरकार ने संविधान में संशोधन के साथ चुनाव कराए. इस चुनाव में बीएनपी की जीत हुई, लेकिन सत्ता में आने के बाद तारिक रहमान ने उन संशोधनों को लागू नहीं किया. तारिक रहमान की सरकार पुराने ढर्रे पर ही चल रही है. ऐसे में आवामी लीग को बड़ा मुद्दा मिल गया है. शेख हसीना वापस लौटकर यह बताना चाह रही है कि मैं जो कर रही थी, वह गलत नहीं था.हसीना की पार्टी धीरे-धीरे कमजोर हो रही है. अगर अभी वे वापस नहीं लौटती हैं तो आने वाले वक्त में आवामी लीग की स्थिति और ज्यादा खराब हो जाएगी. तारिक रहमान की सरकार नए सिरे से कानून लाने जा रही है, जिसके बाद आवामी लीग पूरी तरह से खत्म हो जाएगी. हसीना की कोशिश उससे पहले ही जन आंदोलन को शुरू करने की है.शेख हसीना की पार्टी के नेताओं के मुताबिक बांग्लादेश की विकास की रफ्तार थम गई है. बाहर के लोग बांग्लादेश में नहीं आना चाह रहे हैं. 2 साल में एक टका का निवेश नहीं हुआ है. भारत से दुश्मनी के कारण कपड़े का उद्योग भी ठप है.बांग्लादेश में तैनात रहीं भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सीकरी ने अपनी राय रखी है. उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आई थीं और तब से वह यहीं रह रही हैं. सीकरी के मुताबिक, हसीना भारत सरकार की सरपरस्ती में जरूर हैं, लेकिन उन्हें अपने लोगों से संवाद करने और अपनी बात रखने की पूरी आजादी है.वीना सीकरी ने कहा,ठीक दो साल पहले 5 अगस्त 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत आई थीं और तब से वह यहीं हैं. आप जानते हैं, वह बेशक भारत सरकार की सरपरस्ती में यहां रह रही हैं. काफी दिनों से वो शांत थीं लेकिन वह अपने लोगों से बात करने के लिए आजाद हैं. वो अपने लोगों से मिलती हैं, दूसरों से बात करने के लिए स्वतंत्र हैं. निकाले जाने के दो साल बाद उन्होंने अपने देश वापस लौटने की इच्छा जताई है तो इसमें गलत कुछ भी नहीं है।सीकरी ने बांग्लादेश में 2024 के दौरान हुए छात्र आंदोलन को लेकर कहा, ‘जो हुआ वो छात्रों के गुस्से का नतीजा नहीं था, लेकिन वो एक सत्ता को बदलने की सुनियोजित सियासत का हिस्सा था. ऐसा मैं इसलिए कह रही हूं क्योंकि अब भी बांग्लादेश की जनता खुश नहीं है. आर्थिक तौर पर वो संघर्ष कर रहे हैं, बेरोजगारों की कमी नहीं है, कोई विदेशी निवेश नहीं हो रहा है. कुल मिलाकर ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा जिसका दावा किया गया था. ऐसे में मुझे लगता है कि शेख हसीना ने लौटने का मन बना लिया है और मुझे लगता है कि 5 अगस्त को शायद वो प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पर ही जोर देंगी।वहीं पूर्व भारतीय राजनियक ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के दौरे का जिक्र करते हुए कहा, ‘दो दिन पहले ही भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर बांग्लादेश जाकर अवामी लीग के नेताओं से ढाका में मिलकर आए हैं. वहां उन्होंने जमात-ए इस्लामी जैसे संगठनों से मुलाकात नहीं की. वो जातीय दल के प्रतिनिधियों से भी मिले. गोर दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के क्षेत्रीय राजदूत भी हैं. तो मुझे नहीं लगता इसमें कोई बड़ी बात होगी. जब वो इन सबसे मिले और इसे राजनीतिक एक्ट नहीं करार दिया गया तो फिर कैसे शेख हसीना का जाना सियासी मामला हो सकता है?

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