बिहार के नए ‘सम्राट’ बनेंगे सम्राट चौधरी,कल सीएम पद का लेंगे शपथ

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बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बनने जा रहा है कोई। वह कौन है, यह नाम तय पक्का हो गया है- सम्राट चौधरी। सम्राट जन्म से भाजपाई नहीं हैं, संघी तो दूर-दूर तक नहीं। इसलिए संघ की पसंद नहीं। सात साल से कुछ ज्यादा वक्त हुआ होगा भाजपा में आए हुए। लेकिन, खास बात यह है कि जब से भाजपा में आए, तब से उत्तरोत्तर बढ़ते ही गए। नए सीएम के नाम के एलान के साथ ही जानिए सम्राट चौधरी के बारे में सबकुछ।16 नवंबर, 1968 को जन्म लेने वाले सम्राट चौधरी ने बहुत कम उम्र में राजनीति शुरू की थी। वैसे भी वह बचपन से राजनीति को देखते-समझते रहे हैं, क्योंकि उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की एक बड़ी राजनीतिक पहचान रहे। नीतीश कुमार ने लव-कुश समीकरण के साथ जनता दल से अलग होकर समता पार्टी की स्थापना की तो ‘कुश’ चेहरा के रूप में शकुनी चौधरी बड़ा नाम रहे। शकुनी चौधरी बिहार में लंबे समय तक मंत्री रहे हैं। सम्राट चौधरी को राजनीति में आए हुए अब करीब 35 साल हो चुके हैं। सम्राट चौधरी के बड़े भाई रोहित चौधरी जदयू से जुड़े हैं, लेकिन मूलत: शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। सम्राट के छोटे भाई धर्मेंद्र चौधरी सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

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सम्राट की पत्नी ममता चौधरी चुनाव के दौरान जनसंपर्क में भी साथ नजर आई थीं। तीन बहनों में एक की मौत हो चुकी है।लालू प्रसाद यादव की राजनीति यादवों पर केंद्रित रही है तो नीतीश कुमार की शुरुआत लव-कुश, यानी कुर्मी-कोइरी राजनीति से हुई थी। नीतीश कुर्मी हैं और सम्राट चौधरी कोइरी। राजनीतिक परिस्थितियों में सम्राट चौधरी महागठबंधन के शासनकाल में नीतीश के धुर विरोधी बने थे। उन्हें हटाए बगैर अपना मुरेठा नहीं खोलने की जिद ठाने बैठे थे। लेकिन, जैसे ही भाजपा की सरकार 2020 के जनादेश के तहत वापस लौटी तो सम्राट चौधरी नीतीश कुमार के साथ हो गए साये की तरह। फिर बिहार की सत्ता का शीर्ष ‘लव-कुश’ पर रहा। सम्राट चौधरी अब भी नीतीश कुमार के लिए भाजपाई सीएम की पहली पसंद हैं तो इसमें इस समीकरण की बड़ी भूमिका है।

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