पूर्व पीएम खालिदा जिया की मौत को लेकर उठने लगा सवाल,शेख हसीना पर लगा बड़ा आरोप

 पूर्व पीएम खालिदा जिया की मौत को लेकर उठने लगा सवाल,शेख हसीना पर लगा बड़ा आरोप
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बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव है. शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद पहली बार बांग्लादेश में चुनाव हो रहे हैं और चुनाव से पहले बीएनपी सत्ता के प्रमुख दावेदार के रूप में उभरी है, हालांकि शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर बैन है और अवामी लीग चुनाव में हिस्सा नहीं ले रही है, लेकिन बांग्लादेश की सियासत अभी भी शेख हसीना के ईद-गिर्द घूम रही है.चुनाव से पहले बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान की 17 सालों के बाद बांग्लादेश वापसी हुई है और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की मौत हुई है. लंबे समय से बीमार खालिदा जिया की मौत को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं. आरोप लगाया गया है कि शेख हसीना की सरकार के समय खालिदा जिया को स्लो पॉइजन दिया गया है.खालिदा इलाज के लिए बने मेडिकल बोर्ड के प्रमुख प्रोफेसर-डॉक्टर एफएम सिद्दीकी के आरोप से खलबली मच गई है. उन्होंने कहा कि हाल ही में दिवंगत बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और BNP चेयरपर्सन खालिदा जिया के इलाज में ‘जानबूझकर लापरवाही’ बरती गई.

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उन्होंने कहा, ‘गलत इलाज और लापरवाही के कारण खालिदा जिया के लिवर की हालत तेजी से बिगड़ी और उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया गया.’प्रोथोम एलो की एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर ने हाल ही में खालिदा जिया के लिए सिविल सोसाइटी द्वारा आयोजित एक नागरिक शोक सभा में अपने भाषण में यह मुद्दा उठाया.उन्होंने कहा कि 27 अप्रैल 2021 को Covid-19 से जुड़ी दिक्कतों के बाद खालिदा जिया को एवरकेयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद मौजूदा मेडिकल बोर्ड ने उनके इलाज की जिम्मेदारी संभाली. उस समय से लेकर 30 दिसंबर को उनकी मौत तक, प्रोफेसर एफएम सिद्दीकी सीधे तौर पर उनकी मेडिकल देखभाल में शामिल रहे.अपना अनुभव शेयर करते हुए उन्होंने कहा, “उनके भर्ती होने के तुरंत बाद, हमारी देखरेख में, हमने जरूरी जांच की और हमें बहुत हैरानी और चिंता हुई कि मैडम लिवर सिरोसिस से पीड़ित थीं. फिर भी मेडिकल यूनिवर्सिटी की मेडिकल डिस्चार्ज समरी में उन्हें आर्थराइटिस के इलाज के लिए रेगुलर तौर पर मेथोट्रेक्सेट नाम की एक टैबलेट लेने के लिए कहा गया था और हॉस्पिटल में भर्ती होने के दौरान भी उन्हें यह दवा दी गई. हमने तुरंत दवा बंद कर दी.”एफएम सिद्दीकी ने बताया कि खालिदा जिया रूमेटाइड आर्थराइटिस से पीड़ित थीं और रूमेटोलॉजिस्ट की सलाह पर दवा ले रही थीं. इसके अलावा, उन्हें MAFLD (मेटाबोलिक-एसोसिएटेड फैटी लिवर डिजीज) भी था.सीनियर डॉक्टर ने कहा, “यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि मैडम की लिवर की बीमारी का पता लगाना बहुत आसान था और इसके लिए किसी स्पेशलिस्ट की जरूरत नहीं थी. मेथोट्रेक्सेट लिखते समय, ब्लड टेस्ट के जरिए लिवर के कई फंक्शन पैरामीटर को रेगुलर मॉनिटर करना जरूरी है और अगर नतीजे अजीब मिलते हैं, तो दवा बंद कर देनी चाहिए और लिवर की जांच के लिए कम से कम पेट का एक बेसिक अल्ट्रासाउंड करवाना चाहिए. हैरानी की बात है कि मैडम के लिवर फंक्शन टेस्ट में अजीब नतीजे आने के बाद भी, सरकार के बनाए डॉक्टरों ने न तो अल्ट्रासाउंड किया और न ही MTX (मेथोट्रेक्सेट) बंद किया.”खालिदा जिया के उस समय उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों पर भरोसा न होने का जिक्र करते हुए, प्रोफेसर एपएम सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने वहां अल्ट्रासाउंड करवाने से मना कर दिया था.यह देखते हुए कि कई लोगों ने पूछा है कि क्या खालिदा जिया को “स्लो पॉइजन” दिया गया था, प्रोफेसर एफएम सिद्दीकी ने कहा, “मेरा जवाब है कि मेथोट्रेक्सेट वह दवा थी जिसने उनके फैटी लिवर की बीमारी को और खराब कर दिया और उसे लिवर सिरोसिस में बदल दिया. उस लिहाज से, यह उनके लिवर के लिए ‘स्लो पॉइजन’ था.”एफएम सिद्दीकी ने कहा, “बेगम खालिदा जिया के इलाज में इस तरह की लापरवाही, और उनके लिवर के काम करने के तरीके में तेजी से आई गिरावट ने उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया. यह जानबूझकर की गई लापरवाही है. यह एक माफ न करने लायक जुर्म है, और इसकी जांच होनी चाहिए कि क्या यह उन्हें मारने की किसी बड़ी योजना का हिस्सा था.” उन्होंने कहा, “मेडिकल बोर्ड के पास उनके डायबिटीज और आर्थराइटिस के इलाज में लापरवाही के भी साफ सबूत हैं.”उन्होंने कहा कि खालिदा जिया के इलाज में मेडिकल लापरवाही के तीन पहलुओं की कानूनी तरीकों से एक हाई-पावर्ड कमेटी द्वारा डिटेल में जांच की जानी चाहिए. प्रोफेसर सिद्दीकी ने उम्मीद जताई कि सरकार खालिदा जिया के परिवार से संपर्क करेगी और बिना देर किए जरूरी कानूनी कदम उठाएगी.लेकिन प्रोफेसर सिद्दीकी के दावे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उनके इलाज के लिए बने मेडिकल बोर्ड के सदस्यों में से एक उनकी बहू ज़ुबैदा रहमान भी थीं. फिर साजिश कैसे हो सकती है? यह सवाल किया जा रहा है कि क्या चुनाव से पहले ही बीएनपी शेख हसीना सरकार के फैसले पर सवाल उठाना शुरू कर दी है और खालिदा जिया को स्लो पॉइजन देने की बात कहकर एक ओर सहानुभूति वोट हासिल करना चाहती है, दूसरी ओर पूर्व की शेख हसीना सरकार को कटखरे में खड़ा करने का पूरा प्लान बना लिया है.शेख हसीना और बीएनपी के रिश्ते कभी भी अच्छे नहीं रहे. शेख हसीना सरकार में तारिक रहमान को देश से निर्वासित होना पड़ा था और अब जब शेख हसीना भारत में निर्वासन का जीवन जी रही हैं और तारिक रहमान सत्ता की दौड़ में सबसे आगे हैं. बीएनपी ने शेख हसीना पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है.

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