जेडीयू के प्रति निशांत कुमार बदलेंगे लोगों की सोच,’यात्रा’ के जरिये जनता के बीच दिखाएंगे अपना दम
विधानसभा चुनाव के बाद जब किसी की सरकार नहीं बनी, तब नीतीश कुमार ने ‘न्याय यात्रा’ निकाली थी. उसका असर ये हुआ कि उसी साल नवंबर में हुए चुनाव में एनडीए को बहुमत मिल गई और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बन गए. उसके बाद 20 सालों तक नीतीश कुमार को कोई सत्ता से हटा नहीं पाया. अप्रैल 2026 में अपनी मर्जी से उन्होंने राज्यसभा सांसद बनने के बाद सीएम पद से त्यागपत्र दे दिया. इस बीच उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री हो गई. उनको जेडीयू का भविष्य बताया जा रहा है.राजनीतिक पारी की शुरुआत करने के बाद उनका पहला बड़ा कार्यक्रम ‘बिहार दौरे’ से ही शुरू हो रहा है. निशांत 3 मई से पश्चिम चंपारण से यात्रा की शुरुआत करेंगे. यात्रा के माध्यम से जेडीयू की तरफ से निशांत को एक तरह से लॉन्च करने की बड़ी तैयारी चल रही है. विपक्ष की भी उनकी यात्रा पर नजर होगी. वहीं जानकार भी अपने ढंग से निशांत की यात्रा को लेकर विश्लेषण कर रहे हैं.मुख्यमंत्री की कुर्सी से भले ही नीतीश कुमार हट चुके हैं लेकिन जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हुए हैं. न तो उनकी नई टीम में निशांत को कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है और न ही प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की टीम में जगह मिली है. इसके बावजूद निशांत को ही जेडीयू के ‘खेवनहार’ के तौर पर देखा जा रहा है. यही वजह है कि पार्टी के तमाम शीर्ष नेता 3 मई से उनकी प्रस्तावित ‘बिहार यात्रा’ को सफल बनाने में जुटे हुए हैं.नीतीश कुमार डेढ़ दर्जन से अधिक यात्रा कर चुके हैं और हर बार चंपारण से ही यात्रा की शुरुआत करते रहे हैं. अब निशांत भी पश्चिमी चंपारण से यात्रा की शुरुआत करने जा रहे हैं.

निशांत की यात्रा में प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, तमाम युवा विधायक और जेडीयू बिहार इकाई की टीम साथ रहेगी.यात्रा के दौरान निशांत विधायक और जेडीयू नेताओं से संवाद करेंगे. उनसे फीडबैक लेंगे. पार्टी को मजबूत करने के लिए सुझाव भी लेंगे. जेडीयू को एकजुट बनाए रखने की कोशिश होगी. इसके साथ ही लोगों के बीच नीतीश कुमार के 20 सालों के कामों का प्रचार करेंगे और भरोसा दिलाने की कोशिश करेंगे.असल में निशांत पहले से राजनीति में नहीं रहे हैं. सार्वजनिक जीवन में भी वह बेहद कम ही नजर आए हैं. ऐसे में पार्टी चाहती है कि वह यात्रा के माध्यम से लोगों के बीच जाएं और चीजों को नजदीक से देखें. जेडीयू प्रवक्ता किशोर कुणाल कहते हैं कि जब निशांत कुमार को ही नीतीश कुमार की विरासत संभालनी है तो लोगों के बीच जाना ही चाहिए.निशांत की तुलना नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से भी हो रही है. हालांकि आरजेडी ये मानने को तैयार नहीं कि निशांत कहीं से भी तेजस्वी को चुनौती देने की स्थिति में हैं।
