मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में होगा बड़ा बदलाव,कई नामों की चर्चा हुई तेज
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बड़े फेरबदल की संभावनाओं पर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. सूत्रों के अनुसार सरकार खाली पदों को भरने के साथ युवा नेतृत्व, महिलाओं और गठबंधन सहयोगियों को जगह देने पर विचार कर रही है. इस प्रक्रिया में आने वाले विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखा जा सकता है.इस समय मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित करीब 69 सदस्य हैं. संविधान के अनुसार अधिकतम 81 सदस्य हो सकते हैं, यानी लगभग 12 पद उपलब्ध हैं. पार्टी के ‘एक व्यक्ति-एक पद’ सिद्धांत के कारण संगठनात्मक जिम्मेदारी संभालने वाले कुछ मंत्रियों की जगह नए चेहरों को मौका मिलने की बात कही जा रही है.जून 2026 में राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने इस्तीफा दे दिया था. जुलाई 2026 में नीट परीक्षा संबंधी विवाद और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद छोड़ दिया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सिफारिश पर इस्तीफा स्वीकार किया और प्रल्हाद जोशी को शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया. मध्य अगस्त 2026 में भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने करीब 65 सदस्यीय नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया. इसमें पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष का दायित्व मिला.इससे पहले जून में प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात ने भी फेरबदल संबंधी अटकलों को बल दिया था.कुछ दिग्गज मंत्रियों के मंत्रालयों में बदलाव या बाहर होने की संभावना तो कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल या उनकी भूमिका में कमी की भी संभावना की चर्चा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के विभाग में संभावित बदलाव की अटकलें भी तेज हो रही हैं. वहीं रेल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी तथा सूचना-प्रसारण जैसे कई मंत्रालय संभाल रहे अश्विनी वैष्णव के कार्यभार को कम करने की संभावना भी बताई जा रही है.पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है, इसलिए उनके बारे में भी मंत्रालय बदलाव या बाहर होने की चर्चा है.

कई मंत्री एक से अधिक विभाग संभाल रहे हैं, इसलिए फेरबदल में इनके बोझ को बांटने की संभावना भी जताई जा रही है.पार्टी में नए पद मिलने वाले नेताओं के बारे में चर्चा है. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल अब भाजपा के कोषाध्यक्ष हैं. सड़क परिवहन राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा दिल्ली इकाई के अध्यक्ष बनाए गए हैं, जबकि वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश इकाई के प्रमुख नियुक्त हुए हैं.नवंबर 2026 में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और सामाजिक न्याय राज्य मंत्री बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने वाला है. कुछ मंत्रियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर भी बदलाव का सामना करना पड़ सकता है.वहीं, संभावित नए नाम में शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) से श्रीकांत शिंदे का नाम सबसे अधिक चर्चा में है. गठबंधन सहयोग को मजबूत करने के लिए उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की वापसी की भी संभावना बताई जा रही है. उत्तर प्रदेश से अरुण गोविल और पंजाब से AAP के कुछ पूर्व नेताओं के नाम भी सामने आए हैं.युवा नेताओं और महिलाओं की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. उतर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों से प्रतिनिधित्व बढ़ाने की योजना पर भी भाजपा में चर्चा है.उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इसलिए वहां से अधिक चेहरों को जगह मिलने की उम्मीद है.आरबीआई के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास और बांसुरी स्वराज जैसे नाम भी चर्चा में रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि यह प्रक्रिया सिर्फ पद भरने तक सीमित नहीं रहेगी. युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाना, क्षेत्रीय संतुलन सुधारना और सहयोगी दलों को संतुष्ट करना मुख्य लक्ष्य हो सकते हैं.भाजपा के संसदीय बोर्ड में भी बदलाव की चर्चा है, जिसमें योगी आदित्यनाथ और देवेंद्र फडणवीस के नाम लिए जा रहे हैं. सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को देखते हुए समय-सारिणी तय की जाएगी.राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बदलाव तीसरे कार्यकाल को नई ऊर्जा देने और आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए तैयार रहने की दिशा में हो सकता है. हालांकि अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर पर ही होगा.
