RSS की बड़ी मांग आई सामने,NRC लागू करना बेहद जरूरी
देश में SIR को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच अब NRC की मांग भी खुलकर सामने आ गई है. RSS ने देशभर में National Register of Citizens यानी NRC लागू करने की मांग की है. संघ ने नागरिकों की पहचान, जनसंख्या संतुलन और राष्ट्रीय सुरक्षा को इससे जोड़ते हुए इसे जरूरी बताया है. दिलचस्प ये है कि SIR और Census के बीच RSS ने एक बार फिर अपनी पुरानी मांग को सामने रखा है.देशभर में वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर सियासी विवाद जारी है. विपक्ष लगातार SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है और इसे वोटर लिस्ट से नाम हटाने से जोड़कर विरोध कर रहा है.इसी राजनीतिक बहस के बीच RSS ने अब देशव्यापी NRC की मांग को खुलकर सामने रखा है. RSS के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि देश में नागरिकों की पहचान के लिए National Register of Citizens यानी NRC जरूरी है.आंबेकर ने कहा कि वोटर लिस्ट में गलत तरीके से शामिल लोगों की पहचान की जानी चाहिए.

RSS ने CAA का भी जिक्र किया. संघ के मुताबिक पड़ोसी देशों से भारत आए लोगों की नागरिकता सुनिश्चित करना जरूरी है और NRC के जरिए ऐसे लोगों की पहचान की जा सकती है. यानी SIR के जरिए वोटर की पहचान को लेकर चल रही बहस के बीच RSS अब नागरिकता की पहचान का मुद्दा भी सामने रख रहा है.RSS ने NRC की मांग को सिर्फ नागरिकता की पहचान तक सीमित नहीं रखा. संघ ने जनसंख्या असंतुलन को देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा से जोड़ते हुए इस पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा की जरूरत बताई.सुनील आंबेकर ने 1947 के विभाजन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का विभाजन धर्म और जनसंख्या के आधार पर हुआ था. इसलिए देश में population balance महत्वपूर्ण है. RSS ने जनसांख्यिकीय बदलाव को देश की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने के लिए जनसंख्या संतुलन जरूरी है. संघ ने सेक्युलरिज्म के नाम पर बनी नीतियों पर भी सवाल उठाए और विवाह कानून समेत अलग-अलग कानूनी प्रावधानों में समानता की बात कही. राजनीति दलों जैसे बीजेपी ने आरएसएस की माँग का समर्थन किया है. वही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे राजनीतिक टूल किट बताया है.NRC को लेकर RSS का रूख हालांकि नया नहीं है. 2019 में तत्कालीन सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी भी NRC को सरकार की जिम्मेदारी बता चुके हैं. 2021 में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने NRC को वास्तविक भारतीय नागरिकों की पहचान की प्रक्रिया बताया था और इसे हिंदू-मुस्लिम मुद्दे के तौर पर नहीं देखने की बात कही थी, लेकिन इस बार RSS की NRC की मांग ऐसे वक्त आई है, जब विपक्ष SIR को लेकर लगातार आंदोलन कर रहा है. राहुल गांधी भी SIR समेत वोटर लिस्ट और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार चुनाव आयोग- सरकार और RSS पर सवाल उठाते रहे हैं.राहुल गांधी अपने भाषणों में RSS को लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों के संदर्भ में घेरते रहे हैं. विपक्ष की ओर से SIR को NRC से जोड़कर भी सवाल उठाए गए हैं, जबकि BJP का कहना है कि वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा रखना और फर्जी, डुप्लीकेट या अयोग्य नामों की पहचान करना जरूरी है।
