इंडिया गठबंधन से इसलिए अलग हुए थे नीतीश,केसी त्यागी ने खोल दी कांग्रेस की पोल
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछले कुछ समय से फिर से चर्चा में हैं. कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक के दौरान दिग्विजय सिंह के यह कहने के बाद कि JDU नेता नीतीश कुमार को UPA से अलग नहीं होने देना चाहिए था, बताया जा रहा है कि इस बैठक के दौरान सोनिया गांधी ने उन्हें टोकते हुए कहा कि ‘अच्छा ही हुआ वह चले गए.’ जबकि समाजवादी नेता केसी त्यागी ने भी कांग्रेस नेता के बयान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ एक समस्या है. वह खुद नेतृत्व वाली की भूमिका चाहती है. कांग्रेस नीतीश को अपमानित कर रही थी.जनता दल यूनाइटेड (JDU) के पूर्व नेता केसी त्यागी ने कहा, “मैं उनसे (दिग्विजय सिंह) सहमत हूं. मैं उस घटना का गवाह रहा हूं. यह घटना हिसार में चौधरी देवी लाल की पुण्यतिथि पर हुई थी.

नीतीश कुमार ने तब हाथ जोड़कर गैर-कांग्रेसी दलों (ओम प्रकाश चौटाला, प्रकाश सिंह बादल) से यह अपील की थी कि अगर वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता से हटाना चाहते हैं, तो यह कांग्रेस के बिना नहीं हो सकता।उन्होंने आगे कहा, “वह दिल्ली आए और सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों से मुलाकात की. लेकिन अगले 6 महीने तक विपक्ष की कोई बैठक नहीं हुई. फिर निराश होकर, नीतीश कुमार ने आखिरकार खुद एक बैठक बुलाई।कांग्रेस पर निशाना साधते हुए त्यागी ने कहा, “कांग्रेस के साथ एक समस्या है.वह खुद ही नेतृत्व की भूमिका चाहती है. उसने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के साथ गठबंधन नहीं किया, और वह कभी भी शरद पवार को साथ नहीं लाती. वह बैठकों के आयोजन के लिए नीतीश कुमार को संयोजक बनाने को भी तैयार नहीं हुई थी.उन्होंने आगे कहा, “एक निजी बातचीत में, राहुल गांधी ने नीतीश कुमार से कहा था कि ममता बनर्जी आपके लिए तैयार नहीं हैं. वह चाहती थीं कि सभी गैर-कांग्रेसी और गैर-BJP दल तुरंत उन्हें नेता के रूप में स्वीकार कर लें.त्यागी ने आगे कहा कि कांग्रेस संयोजक बनाने तक को राजी नहीं हुई. इस मामले में बीजेपी की तारीफ करता हूं कि उसने जॉर्ज फर्नांडीस को एनडीए का संयोजक बनाया. उन्होंने शरद यादव को कन्वीवर बनाया. जबकि कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया. नीतीश कुमार ने दुखी होकर इन लोगों का साथ छोड़ा था. जलील कर रहे थे, अपमानित कर रहे थे. विपक्षी नेताओं को बुलाने का एजेंडा सब तय करेंगे और सभी को बुलाने का न्योता अगर नीतीश कुमार के हाथ से चला जाएगा तो क्या बुरा हो जाएगा. इतनी भी सत्ता के बंटवारे के लिए ये लोग तैयार नहीं होते हैं. ये लोग आजादी से पहले भी अपनी सत्ता में बंटवारा तय नहीं कर सकते. एक छोटा सा हिस्सा भी नहीं दे सकते.कांग्रेस पर निशाना साधते हुए त्यागी ने कहा, “INDIA गठबंधन के सभी कामकाज कांग्रेस ऑफिस से चलाए जा रहे हैं. अखिलेश यादव भी इससे असहज हैं. हालांकि वह INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन साथ ही वह ‘PDA’ अभियान भी चला रहे हैं. ‘PDA’ अपनी शर्तों पर चला रहे हैं. जिस दिन वह कांग्रेस के एजेंडे के साथ पूरी तरह जुड़ जाएंगे, उनका भी वही हश्र होगा जो ममता और कई अन्य नेताओं का हुआ है.केसी त्यागी ने देश के कई राज्यों में BJP के धीरे-धीरे सत्ता में आने के कारणों पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय दलों की वैचारिक प्रतिबद्धता कमजोर हो गई क्योंकि वंशवादी राजनीति और भ्रष्टाचार अधिक हावी हो गए.उन्होंने कहा, “दक्षिण में DMK का उदय पेरियार की अगुवाई वाले आंदोलन से हुआ था. यह समाज से जुड़े सवाल उठाता था.” इस तरह से DMK ने 1966 से 2012 तक तमिलनाडु की राजनीति में अहम भूमिका निभाई. हालांकि, जब वंशवादी राजनीति और भ्रष्टाचार ने इसमें जगह बनाई, तो इसकी वैचारिक प्रतिबद्धता की तीव्रता कम होती चली गई.कांग्रेस के रवैये की आलोचना करते हुए त्यागी ने कहा, “कांग्रेस के शासनकाल में राज्यों, भाषाओं और हाशिए पर पड़े समूहों की अक्सर अनदेखी की गई. जहां भी क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं ने इन मुद्दों को जोर-शोर से उठाया, वहां उनकी पार्टियां फली-फूलीं, जैसे पश्चिम बंगाल और केरल में CPI(M). फिर भी, जैसे-जैसे इन पार्टियों और दूसरों के बीच का अंतर धुंधला होता गया, और धीरे-धीरे वामपंथी पार्टियां भी कमज़ोर पड़ गईं.JDU का साथ छोड़ने वाले त्यागी ने आगे कहा, “कांग्रेस के शासनकाल में राज्यों, क्षेत्रीय भाषाओं और हाशिए पर पड़े समूहों की अनदेखी की गई. जहां भी क्षेत्रीय पार्टी के नेताओं ने इन मुद्दों को जोर-शोर से उठाया, उनकी पार्टियाँ फली-फूलीं, जैसे पश्चिम बंगाल और केरल में CPI(M). लेकिन जब उनके और अन्य पार्टियों के बीच का अंतर धुंधला हो गया, तो वामपंथी पार्टियां भी कमजोर पड़ गईं.उन्होंने आगे कहा, “मुलायम सिंह यादव ने निश्चित रूप से कांग्रेस का समर्थन किया, लेकिन कभी उसका हिस्सा नहीं बने. लालू यादव ने भी अपनी सरकार चलाने के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन किया. नीतीश कुमार, शरद यादव और जॉर्ज फर्नांडीस इससे नाखुश थे.मुझे यह पसंद नहीं आया जब बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडीस ने BJP के साथ गठबंधन किया. आगे चलकर जनता दल टूट गया, तो लालू यादव अलग हो गए. मतभेद वैचारिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक थे. अलग होने पर, वे कांग्रेस में शामिल नहीं हुए बल्कि BJP के साथ जुड़ गए. उन्होंने आगे कहा, “हालांकि, अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में BJP के साथ हमारे गठबंधन के समय बहस की काफी गुंजाइश रहती थी, क्योंकि BJP तब तक एक प्रमुख पार्टी नहीं बनी थी।
