टीम इंडिया पर सुपर-8 से बाहर होने का खतरा?पॉइंट्स टेबल में भारतीय टीम का ठीक नहीं है स्थिति
टीम इंडिया पर सुपर-8 से ही बाहर होने का खतरा बरकरार है. जिम्बाब्वे के खिलाफ वेस्टइंडीज के धमाकेदार प्रदर्शन के बाद हाल और बुरा है. कैसी है टीम इंडिया के आगे की राह आइए जानते हैं..जिम्बाब्वे को हराने के बाद वेस्टइंडीज के रन रेट में आग लग गई है. उसके रन रेट ने नई बुलंदी को छू लिया है. वो अब ग्रुप ए के पॉइंट्स टेबल में टॉप की टीम बन गई है. उसके और दूसरे नंबर पर मौजूद साउथ अफ्रीका के रन रेट के बीच अब बड़ा फर्क है. ग्रुप ए के पॉइंट्स टेबल में वेस्टइंडीज का रन रेट ऐसा दिख रहा है, जैसे वो किसी बॉलर की इकॉनमी हो. वेस्टइंडीज का रन रेट 5 से भी ऊपर का है और ये खबर टीम इंडिया की सेहत के लिए अच्छी नहीं है क्योंकि भारतीय टीम पर सुपर-8 से ही बाहर होने का खतरा मंडराने लगा है.अब सबसे पहले तो ये देख लीजिए कि जिम्बाब्वे को सुपर-8 में बुरी तरह से रौंदने वाली कैरेबियाई टीम का रन रेट कहां जा पहुंचा है? जिम्बाब्वे को हराने के बाद ग्रुप ए के पॉइंट्स टेबल में साउथ अफ्रीका को पछाड़कर टॉप की टीम बनी वेस्टइंडीज का रन रेट अब 5.35 का हो गया है. उसके और साउथ अफ्रीका के अंक 2-2 ही हैं. मगर दोनों के बीच रन रेट का बड़ा फासला है. वेस्टइंडीज का रन रेट जहां किसी गेंदबाज की इकॉनमी जैसी 5.35 का लग रहा है. वहीं साउथ अफ्रीका का रन रेट 3.8 का ही है।जिम्बाब्वे पर वेस्टइंडीज की जीत से टीम इंडिया को बस ये फायदा हुआ कि अब वो T20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 में ग्रुप ए के पॉइट्स टेबल में सबसे नीचे नहीं है. मगर उसके सिर पर सुपर-8 से ही बाहर होने का खतरा अब भी बरकरार है. भारतीय टीम का रन रेट साउथ अफ्रीका के खिलाफ सुपर-8 का पहला मुकाबला गंवाने के बाद -3.8 का है. साउथ अफ्रीका ने भारत को 76 रन से रौंदा था. मगर जिम्बाब्वे की हार उससे भी बड़ी रही. जिम्बाब्वे को 107 रन से हार मिली, जिसके बाद उसका रन रेट -5.35 का हो गया है.अब सवाल है कि टीम इंडिया पर सुपर-8 से बाहर होने का खतरा कैसे मंडरा रहा है? दरअसल, वेस्टइंडीज की विकराल जीत के बाद भारत के लिए अब अपने अगले दोनों मैच हर हाल में जीतने जरूरी हो गए हैं. भारत को 26 फरवरी को जिम्बाब्वे और 1 मार्च को वेस्टइंडीज से मैच खेलना है. इन दोनों मैच में जीत के अलावा टीम इंडिया को ये भी मनाना होगा कि साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज से अपना मुकाबला 26 फरवरी को जीत ले. ऐसा नहीं हुआ तो फिर नेट रन रेट को लेकर पेंच फंसेगा, जिससे टीम इंडिया के लिए सेमीफाइनल में जाना मुश्किल हो सकता है।आईसीसी टूर्नामेंट्स में हर टीम को उसके प्रदर्शन के आधार पर प्राइज मनी मिलती है. पिछले एडिशन के मुताबिक, सुपर-8 में पहुंचने वाली टीमों को बेसिक प्राइज मनी मिलती है, लेकिन आगे बढ़ने पर यह बढ़ती जाती है. सेमीफाइनल में पहुंचने वाली टीमों को लगभग 7,90,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 7 करोड़ 15 लाख रुपए) की गारंटीड रकम मिलती है।

वहीं, सुपर-8 से बाहर होने वाली टीमों (5वें से 8वें स्थान पर) को करीब 3,80,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 3.5 करोड़ रुपए) मिलते हैं।इस हिसाब से अगर टीम इंडिया सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच पाती है, तो उसे सेमीफाइनलिस्ट बनने वाली राशि से लगभग 4 लाख डॉलर (करीब 3.6 करोड़ रुपए) का नुकसान हो सकता है. यह अंतर टीम के लिए काफी बड़ा है, क्योंकि ग्रुप स्टेज में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद सुपर-8 में शुरुआती हार ने स्थिति को मुश्किल बना दिया है. टीम इंडिया के लिए अब चुनौती सिर्फ मैच जीतने की नहीं, बल्कि बड़े मार्जिन से जीतकर NRR को सुधारने की है. सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम को अब हर गेंद, हर रन पर फोकस करना होगा. ग्रुप स्टेज का शानदार फॉर्म वापस लाना और सुपर-8 में कमबैक करना जरूरी है, ताकि न सिर्फ सेमीफाइनल का टिकट मिले, बल्कि प्राइज मनी के नुकसान से भी बचा जा सके।
