दुनिया भर में भारत के अग्नि-5 की दहशत,चीन के डिफेंस एक्सपर्ट्स भी हुए हैरान
भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है. भारत ने ब्रह्मोस और अग्नि जैसी घातक मिसाइलें बनाई हैं, जिनसे दुश्मन कांपता है. भारत नए-नए हथियार और मिसाइलें तो बना ही रहा है, साथ ही अपनी पुरानी मिसाइलों को भी अपग्रेड कर रहा है. भारत की अग्नि-5 मिसाइल की बढ़ी क्षमता की दुनियाभर के डिफेंस सेक्टर में हो रही है. भारत ने अग्रि-5 मिसाइल में ऐसा अपग्रेड किया है, जिससे एक तीर से कई शिकार हुए हैं. चीन के डिफेंस एक्सपर्ट्स भी इस अपग्रेड को देखकर हैरान हैं.भारत की अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल की शुरुआती परीक्षणों के बाद चीन की PLA एकेडमी ऑफ मिलिट्री साइंसेज के शोधकर्ता ड्यू वेनलॉन्ग ने एक दिलचस्प बात नोट की थी. उन्होंने हिसाब लगाया कि अगर इस मिसाइल में इसके स्टैंडर्ड 1500 किलोग्राम के वॉरहेड की जगह 500 किलोग्राम का हल्का पेलोड लगाया जाए, तो यह हथियार 8000 किलोमीटर दूर तक के टारगेट को निशाना बना सकता है. यह रेंज DRDO द्वारा बताई गई 5000 से 5800 किलोमीटर की रेंज से काफी ज्यादा है.लेकिन डिफेंस एक्सपर्ट्स का यह अंदाजा केवल मैथमेटिकल थ्योरी पर आधारित था. भारत ने अग्नि-5 को उसकी रेंज से ज्यादा लॉन्च नहीं किया. क्योंकि 8000 किलोमीटर की रेंज में टेस्टिंग करना आसान नहीं था.बीते 8 मई 2026 को भारत ने अग्नि-5 Mk2 का एक खास परीक्षण किया. DRDO ने स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) के साथ मिलकर ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस्ड अग्नि-5 Mk2 का सफलतापूर्वक परीक्षण किया.

इस परीक्षण के बाद अग्नि-5 मिसाइल की चर्चा पूरी दुनिया में फिर से होने लगी.इस लॉन्चिंग के बाद एक DRDO के एक अधिकारी ने बताया कि इंजीनियर मिसाइल के कुल वजन को 20 प्रतिशत से ज्यादा कम करने में सफल रहे हैं. इसके रॉकेट मोटर्स में पुराने और भारी स्टील केसिंग की जगह एडवांस्ड कंपोजिट मटीरियल का इस्तेमाल किया गया है. बताया गया कि इस अपग्रेड के बाद यह हथियार आसानी से 7000 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज हासिल कर सकता है. खास बात यह है कि 7000 किलोमीटर का यह आंकड़ा तब का है, जब मिसाइल में हल्के कॉन्फिगरेशन की जगह स्टैंडर्ड और पूरी तरह से काम करने वाला परमाणु पेलोड लगा हो.अब सवाल उठता है कि क्या अग्नि-5 मिसाइल की रेंज 10000 किलोमीटर तक हो सकती है? तो इसका जवाब है- ‘हां’. अब जबकि मिसाइल का स्वयं का ढांचा 20% हल्का हो चुका है और इसमें ज्यादा कुशल सॉलिड-फ्यूल प्रोपेलेंट का इस्तेमाल किया गया है, 500 किग्रा के हल्के रणनीतिक वॉरहेड के साथ 10000 से 10200 किलोमीटर की सैद्धांतिक रेंज फिजिक्स के नियमों के अनुसार पूरी तरह व्यावहारिक है.अगर ऐसा हुआ तो अग्नि-5 मिसाइल की रेंज केवल केवल बीजिंग ही नहीं, बल्कि यूरोप, अफ्रीका और अमेरिकी महाद्वीप के मुख्य हिस्सों तक पहुंच जाएगी. हालांकि DRDO ने इस रेंज की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.रॉकेट डायनेमिक्स के अनुसार, प्रोपेलेंट केसिंग का वजन कम होने से ईंधन का द्रव्यमान अनुपात बढ़ जाता है. इसके परिणामस्वरूप मिसाइल की आखिरी बर्नआउट वेलोसिटी में लगभग 13% का इजाफा होता है. चूंकि बैलिस्टिक ट्रेजेक्टरी में रेंज गति के वर्ग के समानुपाती होती है, इसलिए गति में 13% का इजाफा रेंज को सीधे तौर पर लगभग 28 से 30 प्रतिशत तक बढ़ा देता है. यानी जितना कम वजन होगा उतनी बर्नआउट वेलोसिटी बढ़ेगी और मिसाइल की रेंज उससे भी ज्यादा तेजी से बढ़ेगी.8 मई 2026 के परीक्षण की सबसे बड़ी खासियत इसका मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल यानी MIRV कॉन्फिगरेशन था. इस टेक्नोलॉजी के तहत मिसाइल के पेलोड बस यानी अगले हिस्से पर एक साथ 3 से 5 परमाणु हथियार ले जाए जा सकते हैं. ये सभी वॉरहेड हवा में अलग होने के बाद सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पर स्थित अलग-अलग शहरों या सैन्य ठिकानों को एक साथ तबाह कर सकते हैं.दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम एक आने वाली मिसाइल को तो रोक सकते हैं, लेकिन जब एक ही मिसाइल से कई वॉरहेड और डेकोय एक साथ अलग-अलग दिशाओं में गिरते हैं, तो रडार और इंटरसेप्टर सिस्टम पूरी तरहओवरवेल्म होकर फेल हो जाते हैं.
